सस्ते लोन के लिए प्राइवेट बैंक से ज्यादा अच्छे हैं सरकारी बैंक, जानिए कैसे?

एसबीआई और आईओबी ने आम लोगों के लिए ब्याज दरों में 120 बेसिस प्वाइंट की कटौती की

एसबीआई और आईओबी ने आम लोगों के लिए ब्याज दरों में 120 बेसिस प्वाइंट की कटौती की

भारतीय रिजर्व बैंक का बेंचमार्क रेपो रेट पिछले साल 5.15% से गिरकर 4 फीसदी रह गया है लेकिन प्राइवेट बैंकों ने सिर्फ लोगों को 22 बेसिस प्वाइंट यानी 0.22 प्रतिशत की ही राहत दी.

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नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) लगातार ब्याज दरों में कटौती कर रहा है. मकसद कोरोना संकट में लोगों को सस्ता कर्ज मुहैया कराना. लेकिन उसकी इस मुहिम में निजी क्षेत्र के बैंक (Private sector banks) खरे नहीं उतरे हैं. हालांकि, सरकार बैंकों ने जरूर आरबीआई की मंशा के अनुसार कुछ राहत दी है.

निजी बैंकों ने आम लोगों के लिए ब्याज की दरों में इतनी कमी नहीं की, जितनी आरबीआई ने की. इसकी तुलना में देश के सरकारी बैंकों (PSU Banks) ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दरों में की गई कटौती का पूरा फायदा आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की. यानी कि लोन लेने के लिए देश में निजी बैंकों की तुलना में सरकारी बैंक ज्यादा अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं.

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115 बेसिस प्वाइंट की बजाय सिर्फ 22 बेसिस प्वाइंट की दी राहत
बीते एक साल में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पॉलिसी दरों में 115 बेसिस प्वाइंट की कमी की. इसकी तुलना में निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक (Axis Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), फेडरल बैंक और डीसीबी (DCB) ने नए लोन पर ग्राहकों को सिर्फ 22 बेसिस प्वाइंट की राहत दी है. वहीं, सरकारी बैंकों (psu bank) की करें तो भारतीय स्टेट बैंक (SBI), इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने आम लोगों के लिए ब्याज दरों में 120 बेसिस प्वाइंट की कटौती की. भारत के बैंकिंग नियामक रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है.

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बेसिस प्वाइंट का ऐसे असर पड़ता है ब्याज दर पर



एक बेसिस प्वाइंट का मतलब 0.01 परसेंटेज पॉइंट होता है. इसका मतलब यदि आरबीआई ने 115 बेसिस प्वाइंट की कमी की है तो ब्याज दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती होनी चाहिए.

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महंगा कर्ज देने की वजह से निजी बैंकों का मुनाफा बढ़ा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में की गई कमी का पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाने की वजह से निजी क्षेत्र के बैंकों (private bank) के मुनाफे में इजाफा हुआ है. इसकी तुलना में सरकारी क्षेत्र के बैंकों (psu bank) का मुनाफा कमजोर रहा है. इसके साथ भी सच्चाई यह भी है कि असुरक्षित कर्ज और हाई यील्ड रिटेल की वजह से निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ा है.
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