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ग्रुप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्‍लान है तो भी कराएं पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस, एक्‍सपर्ट से समझें आखिर क्‍यों है यह जरूरी

आजकल लगभग सभी निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को कॉर्पोरेट हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्रदान करती हैं.

आजकल लगभग सभी निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को कॉर्पोरेट हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्रदान करती हैं.

आजकल कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में लाखों रुपये खर्च होते हैं. कोविड-19 के इलाज में ही बहुत से लोगों ने अस्‍पतालों को दस-दस लाख रुपये दिए हैं. इसलिए ऐसी स्थिति में पर्सनल इंश्‍योरेंस प्‍लान (Personal Insurance Plan) बहुत काम आता है क्‍योंकि इसमें सम एश्‍योर्ड बहुत ज्‍यादा होता है और इससे हॉस्पिटेलाइजेशन का पूरा खर्च चुकाया जा सकता है.

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नई दिल्‍ली. आजकल लगभग सभी निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को कॉर्पोरेट हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्रदान करती हैं. ज्‍यादातर कर्मचारियों का यह मानना है कि कंपनी द्वारा कराए गए हेल्‍थ इंश्‍योरेंस की वजह से उन्‍हें पर्सनल इंश्‍योरेंस प्‍लान लेने की कोई आवश्‍यकता नहीं है. लेकिन, वित्‍तीय सलाहकार उनकी इस धारणा से इत्‍तेफाक नहीं रखते हैं. उनका कहना है‍ कि ग्रुप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्‍लान के साथ ही कर्मचारी के पास पर्सनल इंश्‍योरेंस प्‍लान होना वर्तमान समय में बहुत जरूरी है.

मनीकंट्रोल डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक कॉर्पोरेट ग्रुप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्‍लान में कई बार ऐसी शर्तें होती हैं, या फिर कंपनी ग्रुप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस में कुछ ऐसी चीजों को छोड़ देती है, जो कर्मचारी की जेब पर बहुत भारी पड़ती है. इसके अलावा ज्‍यादातर ग्रुप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी में सम एश्‍योर्ड भी काफी कम होता है. यह आजकल के भारी भरकम हॉस्पिटेलाइजेशन खर्च की भरपाई करने में नाकाफी होता है.

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कम सम एश्‍योर्ड
ज्‍यादातर ग्रुप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्‍लान 2-4 लाख रुपये तक सम एश्‍योर्ड ऑफर करते हैं. आज अगर कोई व्‍यक्ति अस्‍पताल में इलाज के लिए दाखिल होता है तो उसे बहुत ज्‍यादा खर्च करना पड़ता है. ग्रुप इंश्‍योरेंस प्‍लान द्वारा दिए जा रहे सम एश्‍योर्ड से यह खर्च पूरा नहीं होता और उसे अपने पास से अस्‍पताल को पैसे देने होते हैं. आजकल कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में लाखों रुपये खर्च होते हैं. कोविड-19 के इलाज में ही बहुत से लोगों ने अस्‍पतालों को दस-दस लाख रुपये दिए हैं. इसलिए ऐसी स्थिति में पर्सनल इंश्‍योरेंस प्‍लान बहुत काम आता है क्‍योंकि इसमें सम एश्‍योर्ड बहुत ज्‍यादा होता है और इससे हॉस्पिटेलाइजेशन का पूरा खर्च चुकाया जा सकता है.

नो क्‍लेम बोनस का फायदा
पसर्लनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्‍लान कोई कर्मचारी लेता है तो उसे नो क्‍लेम बोनस ऑफर मिलता है. इसका मतलब है कि अगर आप कोई राशि क्‍लेम नहीं करते हैं तो आपको अगले साल प्रीमियम में छूट मिलती है.  यह छूट 10 से 50 फीसदी तक होती है. यह भी आपकी सम एश्‍योर्ड को बढ़ाने का एक सस्‍ता रास्‍ता है. अगर आपके पास ग्रुप हेल्‍थ पॉलिसी है तो आप छोटे क्‍लेम के लिए उसका प्रयोग कर सकते हैं. इससे आप पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के नो क्‍लेम बोनस का फायदा उठा सकेंगे.

अगर नहीं मानी है कुछ शर्तें तो और भी जरूरी
कुछ कर्मचारी ग्रुप हेल्‍थ पॉलिसी लेते वक्‍त पॉलिसी की कुछ सेवाओं को लेने से इंकार कर देते हैं. ऐसा वे पैसा बचाने के लिए करते हैं. रूम रेंट इलीजिबिलिटी या कुछ बीमारियों को पॉलिसी में शामिल करने से वे मना कर देते हैं. इससे कई बार ऐसा होता है कि कर्मचारी को अस्‍पताल के बिल में से कुछ पैसा अपनी जेब से देना पड़ता है. अगर कर्मचारी के पास ग्रुप हेल्‍थ पॉलिसी के साथ ही पर्सनल हेल्‍थ प्‍लान भी है तो वह ऐसी स्थिति में इसका प्रयोग कर अपनी जेब से पैसा खर्च करने से बच सकता है.

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जल्‍द लें पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस 
पर्सनल इंश्‍योरेंस प्‍लान जल्‍दी ही ले लेना अच्‍छा होता है. इसका कारण यह है कि आजकल बहुत सी बीमा कंपनियां ऐसे लोगों का स्‍वास्‍थ्‍य बीमा करने से इंकार कर देती है जिन्‍हें कोई गंभीर बीमारी हो चुकी है या उनकी कोई बड़ी सर्जरी हुई है. डायबिटीज, रीढ़ की हड्डी से संबंधित बीमारियां और किडनी में पथरी जैसी दिक्‍कत कभी भी हो सकती है. इसलिए पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस जल्‍दी ही करा लेना चाहिए क्‍योंकि यह ताउम्र चलता है और इसे रिन्‍यू कराया जा सकता है. आप कितनी बार भी इसमें क्‍लेम ले सकते हो.

Tags: Health Insurance, Personal finance

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