14 राज्‍यों में पेट्रोल-डीजल पांच रुपये प्रति लीटर सस्ता, बाकी जगह ढाई रुपये की राहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच नौ किस्तों में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की थी.

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Updated: October 5, 2018, 7:04 AM IST
14 राज्‍यों में पेट्रोल-डीजल पांच रुपये प्रति लीटर सस्ता, बाकी जगह ढाई रुपये की राहत
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: October 5, 2018, 7:04 AM IST
केंद्र सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक व्यवस्था के तहत 2.50 रुपये प्रति लीटर कटौती की घोषणा की. केंद्र सरकार की घोषणा के बाद बीजेपी/एनडीए शासित अधिकतर राज्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्य स्तरीय करों में भी कटौती की है. इससे इन राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पांच रुपये प्रति लीटर तक कम हो गई हैं. वहीं बाकी राज्‍यों में तेल की कीमतें ढाई रुपये प्रति लीटर कम हुई हैं. यह कटौती आज आधी रात से लागू हो गई.

कच्चे तेल के अंतराष्ट्रीय बाजार में लगतार तेजी के बीच देश में डीजल पेट्रोल के दाम काफी ऊंचे हो गए हैं. उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र ने डीजल-पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 1.50 रुपये की कमी की है और पेट्रोलियम का खुदरा काम करने वाली सरकारी कंपनियों को भाव एक-एक रुपये प्रति लीटर कम करने और उसका बोझ खुद वहन करने के लिए कहा गया है. इससे कंपनियों पर 9,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.

भाजपा/एनडीए शासित राज्य सरकारों ने अपने यहां वैट/बिक्री कर में इसी के बराबर (2.50 रुपए प्रति लीटर) की कमी की है. केंद्र सरकार की इस घोषणा के बाद गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, जम्‍मू कश्‍मीर, उत्‍तराखंड, गोवा, महाराष्‍ट्र और हरियाणा राज्यों ने वैट में 2.50 रुपये की कटौती की है. इससे इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल की प्रभावी कीमत पांच रुपये प्रति लीटर कम हो गई है.

महाराष्ट्र ने सिर्फ पेट्रोल पर वैट में 2.50 रुपये की कटौती की है. इस प्रकार वहां डीजल की कीमत सिर्फ 2.50 रुपये और पेट्रोल की कीमत पांच रुपये प्रति लीटर कम हो गई हैं.


वहीं कर्नाटक और केरल ने ईंधन की कीमतों में और कटौती करने से मना कर दिया है, क्योंकि इन राज्यों ने पिछले महीने ही ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय कटौती की थी. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्य भी ईंधन की कीमतों में पहले कटौती कर चुके हैं.

बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार तेल कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर कम करे. वहीं केरल के वित्त मंत्री टी. एम. थॉमस इसाक ने इसे राजस्थान और मध्यप्रदेश के आगामी चुनावों से प्रभावित फैसला बताया.

कांग्रेस शासित पंजाब राज्य इस संबंध में शुक्रवार को फैसला करेगा. वहीं बिहार, दिल्ली, ओडिशा, तमिलनाडु, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और नगालैंड में अभी स्थिति साफ नहीं है.

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भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार के चार साल के कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती से केंद्र सरकार को 10,500 करोड़ रुपये के कर राजस्व का नुकसान होगा. जेटली ने राज्य सरकारों से भी इसी अनुपात में बिक्री कर या वैट में कटौती करने का आग्रह किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच नौ किस्तों में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की थी.
जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसमें दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी. हालांकि इस दौरान कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी.

पेट्रोल-डीजल की सबसे कम कीमत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में है. दिल्ली में पेट्रोल 84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 75.45 रुपये प्रति लीटर पर है.
 अगस्त से अब तक पेट्रोल की कीमत में 6.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 6.73 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.

सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के एक रुपये प्रति लीटर का बोझ वहन करने के निर्देश को पेट्रोल-डीजल पर फिर से सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के तौर पर देखा जा रहा है. अभी इनकी कीमतें बाजार के आधार पर तय होती हैं. इस घोषणा के बाद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है.

सरकारी कंपनियों की आय पर इस एक रुपये प्रति लीटर कीमत वहन करने का सालाना बोझ 10,700 करोड़ रुपये होगा. इसमें करीब आधा बोझ इंडियन ऑयल पर और बाकी का बोझ हिस्सेदारी हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम पर जा सकता है. ब्रेंट क्रूड बुधवार को चार साल के उच्चतम स्तर 86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि अमेरिका में ब्याज दर सात साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई.

(भाषा इनपुट के साथ)
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