कच्चे तेल की कीमतों में आई 5 साल की सबसे बड़ी गिरावट , अब भारत में 4 रुपये तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल

कच्चे तेल की कीमतों में आई 5 साल की सबसे बड़ी गिरावट , अब भारत में 4 रुपये तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल
कच्चे तेल के दाम गिरन के बाद पेट्रोल—डीजल सस्ता हो सकता है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 10 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गई है. इसी वजह से घरेलू बाजार में शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले कुछ महीनों में पेट्रोल-डीज़ल यहां से 4 रुपये तक सस्ता हो सकता है

  • Share this:
नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बीते शुक्रवार को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 10 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है. कच्चे तेल के भाव में यह गिरावट OPEC देशों द्वारा प्रोडक्शन में कटौती नहीं करने के फैसले के बाद देखने को मिली. इसीलिए एक्सपर्ट्स मान रहे है कि भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम आने वाले महीनों में 4 रुपये प्रति लीटर तक कम हो सकते है. आपको बता दें कि इस साल पेट्रोल और डीज़ल 4 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा सस्ता हो चुका है. ये गिरावट अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों की वजह से आई है.

US WTI और ब्रेंट क्रुड (Brent Crude Oil) के भाव में गिरावट आई. दोनों कच्चे तेल के भाव में क्रमश: 10.07 फीसदी और 9.4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. बता दें कि ओपेक और उसके सहयोगी देशों में बैठक के दौरान क्रुड प्रोडक्शन में कटौती करने पर बात नहीं बन सकी.

3-4 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में इस कटौती का सीधा लाभ घरेूल बाजार में भी देखने को मिलेगा. इस साल अब तक पेट्रोल के दाम में 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती हो चुकी है. वहीं, डीजल के भाव की बात करें तो साल की शुरुआत से लेकर अब तक 4.15 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती हुई है. केड़िया कमोडिटी के अजय केड़िया ने बताया कि अगर डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी आती है तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-4 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती देखने को मिल सकती है. वहीं, अगर रुपये में आगे भी कमजोरी जारी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती की उम्मीद कम हो जाएगी.



क्या है WTI और ब्रेंट क्रुड का भाव
शुक्रवार को US West Texax Intermediate (WTI) क्रुड का भाव 4.62 डॉलर यानी 10.07 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली. इसके बाद WTI का भाव 41.28 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया जोकि अगस्त 2016 के बाद सबसे न्यूनतम स्तर पर है. वहीं, ब्रेंट क्रुड की बात करें तो इसके भाव में भी 9.4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली, जिसके बाद ब्रेंट क्रुड का भाव 45.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. जून 2017 के बाद यह अब तक का सबसे न्यूनतम भाव है.

यह भी पढ़ें: 10 प्वाइंट में समझिए, कैसे Yes Bank की तस्वीर बदलेगा RBI

नहीं बन सकी क्रूड प्रोडक्शन में कटौती पर बात
कच्चे तेल के प्रोडक्शन में कटौती पर सहमति नहीं बनने के बाद ओपेक और उसके सहयोगी देशों (OPEC+) ने एक बार फिर बैठक करने की बात कही है. हालांकि, इसक पहले से ही प्रोडक्शन में कटौती को लेकर लिया गया फैसला लागू है और यह मार्च के अंत तक चलेगा. इसपर अनिश्चित्तता है कि इसे आगे भी लागू किया जाएगा या नहीं. रूस के उर्जा मंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने बैठक के बाद कहा है कि 1 अप्रैल तक कोई भी सदस्य अपने रणनीति के हिसाब से तेल का उत्पादन नहीं करेगा. हमने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि प्रोडक्शन में कटौती को लेकर कोई सहमति नहीं बन सका है.

यह भी पढ़ें: Yes Bank संकट को पहले ही भांप गया तिरुपति मंदिर ट्रस्ट, बच गए ₹1300 करोड़

2008 में की गई थी सबसे बड़ी कटौती

कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद से ही कच्चे तेल के डिमांड में कमी रही है. यही कारण है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. बता दें कि पिछली बार साल 2008 में ओपेक व उसके सहयोगी देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में 42 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती की थी. यह वैश्विक वित्तीय संकट (Global Financial Crisis) का दौर था. इस फैसले के बाद ही कच्चे तेल के भाव को सपोर्ट मिला था.

यह भी पढ़ें: यहां जानिए अपने Yes Bank के खाते से जुड़े सभी सवालों के जवाब
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading