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पेट्रोल-डीजल पर एक बार फिर बढ़ सकती है एक्साइज ड्यूटी, जानें क्यों?

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Updated: March 19, 2020, 4:41 PM IST
पेट्रोल-डीजल पर एक बार फिर बढ़ सकती है एक्साइज ड्यूटी, जानें क्यों?
एक बार फिर बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार गिरावट के बीच अब संभव है कि केंद्र सरकार एक बार​ फिर पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) को बढ़ा दे. SBI की ए​क रिपोर्ट में भी यह बात कही गई है.

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  • Last Updated: March 19, 2020, 4:41 PM IST
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नई दिल्ली. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में लगातार गिरावट को देखते हुए केंद्र सरकार एक बार फिर पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में इजाफा कर सकती है. कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से अर्थव्यवस्था पर बढ़ने वाले राजकोषिय घाटे (Fiscal Deficit) के बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार यह कदम उठा सकती है. गुरुवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

माना जा रहा है कि अगर एक्साइज ड्यूटी में कोई इजाफा नहीं किया जाता है और कच्चे तेल का भाव 30 डॉलर प्रति बैरल की नीचे आता है तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें मौजूदा स्तर से 10-12 प्रति लीटर तक कम हो सकती हैं. लेकिन सरकार अब इस कीमत में गिरावट को रोकते हुए, इन दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी को बढ़ा सकती है.

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​पहले ही हुआ है 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा



​शनिवार को, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. केंद्र सरकार की खजाने में इस कदम से एक साल में 45,000 करोड़ रुपये का इजाफा होने का अनुमान है.

रिपोर्ट में क्या कहा गया
SBI EcoWrap Report में कहा गया है, 'पेट्रोल-डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी के बाद पेट्रोल के दाम में अधिकतम 4.25 रुपये और डीजल के दाम में 3.75 रुपये प्रति लीटर की ही कटौती की जा सकेगी. ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र सरकार रिटेल कीमतों में कोई और कमी न करते हुए एक्साइज ड्यूटी को और बढ़ा सकती है.'

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90 फीसदी तक एक्साइज ड्यूटी पेट्रोलियम पदार्थों से
इसके पहले भी ब्रेंट क्रुड ऑयल (Brent Crude Oil) और रिटेल दरों में एक्साइज ड्यूटी के बीच संबंध को देखें तो GST के बाद कुल एक्साइज ड्यूटी में पेट्रोलियम पदार्थों से जुटाए गए एक्साइज ड्यूटी का हिस्सा 85-90 फीसदी तक होता है. वित्त वर्ष 2019-20 के ​अप्रैल से दिसंबर महीने के बीच पेट्रोलिमय पदार्थों के जरिए कुल एक्साइज ड्यूटी 1.5 लाख करोड़ रुपये का था.

राजकोषिय घाटे से निपटने में मिलेगी मदद
​इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वर्तमान दर पर वित्त वर्ष 2020 के लिए एक्साइज ड्यूटी कलेक्ट किया जाता रहा तो सरकार को करीब 14 हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा. ऐसे में सरकार के पास विकल्प है कि वो एक्साइज ड्यूटी में इजाफा करे. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रेवेन्यू ट्रेंड के आधार पर अगर राजकोषिय घाटे को 3.8 फीसदी की दर पर बनाए रखना है तो चालू वित्त वर्ष वर्ष में 1.2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है. व

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First published: March 19, 2020, 4:37 PM IST
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