सिर्फ एक चीज की कमी से देश के इस इलाके में सबसे महंगा मिलता है पेट्रोल, जानें वजह

कम बिक्री की वजह से श्री गंगानगर में डिपो बंद कर दिए गए

कम बिक्री की वजह से श्री गंगानगर में डिपो बंद कर दिए गए

राजस्थान के श्रीगंगानगर में डिपो न होने की वजह से परिवहन लागत ज्यादा आती है. इसके चलते पेट्रोल (Petrol-Diesel Price)की खुदरा कीमत 105.52 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है.

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नई दिल्ली. राजस्थान (Rajasthan) के श्रीगंगानगर (Sriganganagar) में पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel Price)  देश में सबसे ज्यादा महंगा है. यहां एक जून को पेट्रोल की खुदरा कीमत 105.52 रुपए प्रति लीटर और डीजल की 98.32 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है. ऊंची टैक्स की दरों के साथ ही परिवहन लागत इसकी मुख्य वजह है.

भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित श्रीगंगानगर में बेहतर माइलेज का दावा करने वाले प्रीमियम ईंधन के दाम तो और भी ज्यादा हैं. यहां फरवरी के मध्य में ही पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर का आंकड़ा लांघ गया था. डीजल के दाम भी उसी समय से 90 रुपए प्रति लीटर के ऊपर हैं. इस साल देश के बाकी हिस्सों में तो कीमतें कई महीनों बाद इसके आसपास पहुंच पाईं.

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राजधानी जयपुर से करीब चार रुपए ज्यादा है पेट्रोल की कीमत

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक राजस्थान वाहन ईंधन पर सबसे अधिक शुल्क लगाने वाले राज्यों में है मगर श्रीगंगानगर में कीमतें और भी ज्यादा रहने का कारण पेट्रोल और डीजल की परिवहन लागत है. राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक जून को पेट्रोल की कीमत 101.02 रुपए प्रति लीटर और डीजल की 94.19 रुपए प्रति लीटर थी. श्रीगंगानगर की तुलना में वहां पेट्रोल 4.45 रुपए और डीजल 4.38 रुपए प्रति लीटर सस्ता है.

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पहले 60 किलोमीटर दूर हनुमानगढ़ में ईंधन डिपो थे मगर वे बंद कर दिए गए

श्रीगंगानगर से विधायक राज कुमार गौड़ 2008 से ही यह मामला उठा रहे हैं. गौड़ ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि पहले 60 किलोमीटर दूर हनुमानगढ़ में ईंधन डिपो थे. मगर वे बंद कर दिए गए. इससे इलाके के बाशिंदों के लिए ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. गौरतलब है कि करीब 15 साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के ईंधन डिपो हनुमानगढ़ में थे, जहां से श्रीगंगानगर और बीकानेर में ईंधन पहुंचता था.

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तेल कंपनियों का दावा, सुरक्षा कारणों से बंद किए डिपो

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनीत बगई के मुताबिक ये डिपो कम बिक्री की वजह से बंद कर दिए गए. हालांकि तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि इन्हें सुरक्षा कारणों से बंद किया गया. बगई ने कहा कि वहां पेपर डिपो शुरू करने और 90 किलोमीटर दूर स्थित भटिंडा रिफाइनरी से तेल लाने की गुजारिश की की जा रही है मगर सीमावर्ती पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कम खपत होने के कारण कंपनियां इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहीं. पेपर डिपो के जरिए कोई तेल कंपनी अपना ईंधन दूसरी कंपनी के डिपो में रख सकती है.

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सीमावर्ती जिलों में 1,200 पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर

राजस्थान में में पेट्रोल पर 36 फीसदी वैट और 1,500 रुपए प्रति किलोलीटर का सड़क विकास उपकर लगाता है. इसके अलावा केंद्र सरकार पेट्रोल पर 32.90 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगाती है. राजस्थान और पड़ोसी राज्यों के बीच ईंधन की कीमतों का अंतर कभी 50 पैसे प्रति लीटर था लेकिन अब ऊंचे टैक्स की वजह से यह 12 रुपए प्रति लीटर हो गया है. इससे सीमावर्ती इलाकों में ईंधन की खपत घटी है. अनुमान है कि सीमावर्ती जिलों में 1,200 पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर हैं क्योंकि इतनी कम बिक्री में उन्हें मुनाफा ही नहीं हो पाता.

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पंजाब और हरियाणा से तेल लाएं तो बहुत सस्ता पड़ेगा मगर इजाजत नहीं

तेल कंपनियां हर एक किलोमीटर के लिए 2.80 रुपए प्रति किलोलीटर ढुलाई शुल्क लेती हैं. इसी वजह से एक ही राज्य और कभी-कभी एक जिले के अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमत अलग-अलग हो जाती है. आम तौर पर बड़े राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर तक का अंतर होता है. लेकिन तेल कंपनियां डिपो भी उन इलाकों के करीब बनाती हैं, जहां खपत ज्यादा होती है. इसीलिए कम खपत वाले दूरदराज के इलाकों में परिवहन लागत बढऩे से दाम भी बढ़ जाते हैं. उत्तर राजस्थान के पंप मालिक पंजाब और हरियाणा से तेल लाएं तो बहुत सस्ता पड़ेगा मगर उन्हें ऐसा करने की इजाजत ही नहीं है.

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