अपना शहर चुनें

States

देश में चार नए टर्मिनल बनाएगा पेट्रोलियम मंत्रालय, मिलेगी सस्ती गैस

पेट्रोलियम मंत्रालय गैस की आपूर्ति और शोधन के लिए 50 मिलियन मिट्रिक टन क्षमता के चार नए टर्मिनल बनाने जा रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय गैस की आपूर्ति और शोधन के लिए 50 मिलियन मिट्रिक टन क्षमता के चार नए टर्मिनल बनाने जा रहा है।

पेट्रोलियम मंत्रालय गैस की आपूर्ति और शोधन के लिए 50 मिलियन मिट्रिक टन क्षमता के चार नए टर्मिनल बनाने जा रहा है।

  • Share this:
आगरा। पेट्रोलियम मंत्रालय गैस की आपूर्ति और शोधन के लिए 50 मिलियन मिट्रिक टन क्षमता के चार नए टर्मिनल बनाने जा रहा है। यह टर्मिनल बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक होंगे, जिनके बनने के बाद गैस की सुलभता बढ़ेगी।

यह घोषणा पेट्रोलियम एवं गैस राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सरकार धर्मेंद्र प्रधान ने लघु उद्योग भारती के ताज ट्रेपेजियम जोन लघु उद्यमी सम्मेलन में की। प्रधान ने कहा कि मोदी सरकार में गैस की कीमत तीन बार घट चुकी है और जल्दी ही चौथी बार भी घटने की संभावना है। पिछली सरकार की अपेक्षा मोदी सरकार में 40 फीसदी कम दर पर गैस उपलब्ध है।

धर्मेन्द्र प्रधान ने उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए आश्वासन भी दिया, साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड क्षेत्र में कोयले की जगह सीएनजी उपलब्ध कराने की बात कही थी, रियायती दरों पर नहीं। अगर हम यहां उद्यमियों को गैस रियाटती दरों पर उपलब्ध कराते हैं तो इस अन्य प्रदेश भी इस मांग को रखने लगेंगे। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद गेल के अधिकारियों से कहा कि वह खुद को शहंशाह न समझें। इंडस्ट्री वाले आपके ग्राहक हैं। उन्हें उसी के अनुरूप सम्मान दें।



उन्होंने कहा कि सस्ती गैस सिर्फ केन्द्र का दायित्व नहीं। राज्य सरकारों को भी वैट घटाना चाहिए। यूपी में 26 प्रतिशत वैट लग रहा है। इसके घटने पर गैस के रेट कम हो सकते हैं। गैस की चोरी न होने दें। पेट्रोलियम मंत्रालय का प्रयास है नल में पानी की तरह गैस उपलब्ध हो। इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपए गेल को लाइप लाइन लगाने के लिए उपलब्ध करा दिए गए हैं।
उद्यमियों की समस्या

पहले जिस उद्यमी का जितना कोटा निर्धारित था उससे अधित प्रयोग करने पर आरएलएनजी का मूल्य देना होता था, जो कि अधिक होता था। लेकिन 2012 में कुछ बड़े उद्योगपतियों ने तत्कालीन सांसद सरकार यूपीए सरकार से उसकी औसत रेट की नई परंपरा शुरू की जिसे यूपीएम कहा जाता है। जिसमें छोटे उद्यमियों को बड़े उद्यमियों का ज्यादा गैस का प्रयोग करने पर खामियाजा भुगतना पड़ता है। बड़े उद्यमियों की प्रयोग की जाने वाली गैस का भुगतान छोटे उद्यमी कर रहे हैं। इसलिए लघु उद्यमी चाहते हैं कि पांच हजार मिट्रिक टन तक गैस खर्च करने वाले छोटे उद्यमियों को सस्ती दर पर गैल उपलब्ध कराई जाए। उन पर यूपीएम न लगाई जाए या आगरा को फिरोजाबाद को अलग कर दिया जाए, जैसा 2012 में था।
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज