पीएफ खाते से अपना पैसा निकालने पर देना होता है टैक्स, जानिए इस नियम के बारे में...

जॉब नहीं होने पर PF का पैसा निकालने का ये है रूल
जॉब नहीं होने पर PF का पैसा निकालने का ये है रूल

नौकरीपेशा लोगों को PF का पैसा बहुत प्यारा होता है. इसीलिए आमतौर पर लोग बिना मज़बूरी के उस पैसे को नहीं निकालते हैं. PF का पैसा नहीं निकालने की वजह से इस पर मिलने वाला भारी इंटरेस्ट.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2020, 7:31 PM IST
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नई दिल्ली. नौकरीपेशा के लिए पीएफ यानी प्रोविडेंट फंड का पैसा बहुत मायने रखता है. लोग बिना मज़बूरी के उस पैसे को कभी नहीं निकालते हैं. लेकिन किसी वजह से अगर नौकरी छूट जाती है तो  कुछ समय बाद पीएफ का पैसा निकाल सकता हैं. हालांकि, पैसा निकालने से जुड़े नियमों के बारे में कम ही लोग जानते है. ऐसे में उन्हें कई परेशानियों को झेलना पड़ता है. इसीलिए आज हम आपको पीएफ (PF) के पैसे निकालने से जुड़े एक नियम की जानकारी दे रहे है. आपको बता दें कि अगर कोई कर्मचारी 5 साल की अवधि से पहले अपना पीएफ निकाल लेता है तो उसे ईपीएफ निकालते समय टैक्स भरना पड़ता है. नौकरी बदलने के केस में कर्मचारी की EPF दूसरे इम्प्लॉयर में ट्रांसफर हो जाएगा. ऐसे में कर्मचारी का कंटीनुअस पीरियड कैलकुलेट करते समय नए इम्पलॉयर का पीरियड भी जोड़ा जाएगा.

अगर आप जॉब में पांच साल से कम समय तक रहे और इस बीच PF अकाउंट से पैसे निकालते हैं तो इनकम टैक्स कानून के नियमों के हिसाब से आपको इस पर इनकम टैक्स चुकाना पड़ेगा.

इन मौकों पर PF से रकम निकालने पर नहीं देना होता टैक्स
>> अगर इम्पलॉई की तबीयत खराब होने की वजह से नौकरी चली गयी हो.
>> नियोक्ता (कंपनी) ने कारोबार समेट लिया हो.



जॉब नहीं होने पर PF का पैसा निकालने का ये है रूल-EPF नियमों के मुताबिक, कोई सदस्य नौकरी के दौरान जमा किये गए कुल रकम का 75% जॉब छोड़ने के एक महीने बाद निकाल सकता है. अगर व्यक्ति दो महीने से ज्यादा बेरोजगार रहता है तो वह PF अकाउंट से पूरी रकम निकाल सकता है.

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पांच साल से पहले EPF अकाउंट से पैसे निकालने पर लगेगा टैक्स?
>> इनकम टैक्स कानून के मुताबिक पांच साल से पहले EPF अकाउंट से रकम निकालने पर टैक्स लगता है. आप पांच साल किसी एक नियोक्ता (कंपनी) के साथ काम करें या कई इम्पलॉयर के साथ. अगर आप पांच साल तक EPF में योगदान के बाद रकम निकालते हैं तो इस रकम पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा.

>> PF अकाउंट से पांच साल से पहले रकम निकालने पर इनकम टैक्स चुकाना पड़ता है. इस रकम पर इनकम टैक्स आपके मौजूदा स्लैब के हिसाब से ही चुकाना होता है.

>> जिस साल में आपने PF अकाउंट में योगदान (रकम जमा कराई) किया है, उस साल आपकी कुल आमदनी पर लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होता है.

ऐसे समझें- मान लीजिये कि आपने साल 2014-15 और 2016-17 में EPF में रकम जमा कराई. इसके बाद साल 2017-18 में आपने जॉब छोड़ दी और इसी साल आपने PF अकाउंट में जमा रकम निकालने का का फैसला किया.

इस तरह आपके PF अकाउंट से रकम निकालने पर साल 2017-18 में टैक्स चुकाना पड़ेगा. इस साल में आपकी आमदनी पर साल 2014-15 और साल 2016-17 में जो टैक्स लगता था, उसी हिसाब से इस साल आपको रकम निकासी के बाद टैक्स चुकाना पड़ेगा.

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किन मौकों पर PF पर टैक्स देना जरूरी- PF में योगदान के चार कंपोनेंट हैं-इम्पलॉई का योगदान, नियोक्ता द्वारा जमा कराई गयी रकम और दोनों पर ब्याज. इन चार में से तीन पर आपको टैक्स चुकाना पड़ता है-नियोक्ता के योगदान, आपके योगदान पर ब्याज और नियोक्ता के योगदान पर ब्याज.

>> पांच साल से पहले PF अकाउंट से रकम निकाली जाय तो उस पर आपको टैक्स चुकाना पड़ता है. इस हालत में आपको EPF के सभी चार कंपोनेंट पर टैक्स चुकाना पड़ेगा. इस रकम पर टैक्स की गणना हर उस साल के हिसाब से की जाएगी जिसमें आपने पीएफ अकाउंट में रकम जमा कराई है.

>> आपके PF में निवेश पर टैक्स की गणना इस बात पर भी निर्भर होती है कि आपने उस साल में आईटीआर फाइल करते वक्त इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन का लाभ लिया है या नहीं.

इनकम टैक्स कानून के हिसाब से अगर आप PF में रकम जमा करते हैं तो आपके योगदान पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है. अगर इस समय आपकी आमदनी शून्य है, तब भी आपको PF अकाउंट से रकम निकालने पर इनकम टैक्स चुकाना पड़ेगा. इसकी वजह यह है कि जिस साल PF में योगदान किया गया उस साल आपकी और आपके नियोक्ता की टैक्स देनदारी घट गयी थी.

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