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फाइजर और बायोएनटेक का mRNA वैक्सीन को लेकर एक और कदम, लाइसेंस के लिए किया आवेदन

फाइजर ने 500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की दवाइयां की हैं दान (सांकेतिक तस्वीर)

अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनी फाइजर और बायोएनटेक ने mRNA वैक्सीन को लेकर लाइसेंस ऐप्लीकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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    नई दिल्ली. भारत में दिन ब दिन बढ़ते कोविड-19 के बढ़ते मामलों और वैक्सीनेशन ड्राइव में वैक्सीन की कमी सभी को डरा रही है. भारत सरकार पहले से ही दो स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्‍सीन लोगों को लगवा रही है. रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी की पहली खेप भी हैदराबाद पहुंच चुकी है. अब अगर किसी वैक्सीन का देशवासी इंतजार कर रहे हैं तो वो है फाइजर का. वहीं खबर यह आ रही है कि अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनी फाइजर और बायोएनटेक ने mRNA वैक्सीन को लेकर लाइसेंस आवेजन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.


    शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि फाइजर और बायोएनटेक (Pfizer & BioNTech) ने आज 16 साल और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों के लिए कोरोना के प्रसार पर लगाम लगाने को लेकर mRNA वैक्सीन की मंजूरी के लिए अमेरिकी FDA (Food and Drug Administration) के साथ एक बायोलॉजिक्स लाइसेंस आवेदन शुरू की है.


    भारत में जल्द होगी उपलब्ध


    वैश्विक दवा कंपनी फाइजर के चेयरमैन और CEO अल्बर्ट बूर्ला ने कहा कि कंपनी अपनी फाइजर-बायोएटेक वैक्सीन को भारत में जल्द उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है, ताकि उसे तेजी से मंजूरी मिल सके. फाइजर ने इससे पहले अप्रैल में कहा था कि उसने भारत में सरकारी वैक्सीनेशन कार्यक्रम के लिए अपनी वैक्सीन को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने की पेशकश की है, और वह भारत में वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है.


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    काफी कारगर है फाइजर-बायोएनटेक 


    इस बीच एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि फाइजर-बायोएनटेक कोरोनावायरस वैक्सीन गंभीर निमोनिया और ब्रिटेन और साउथ अफ्रीका- दोनों ही वैरिएंट से होने वाली मौतों को रोकने में काफी कारगर है. 5 मई को, कतर और इजरायल की 2 स्टडी में पाया गया कि फाइजर-बायोएनटेक COVID वैक्सीन यूके और साउथ अफ्रीका वेरिएंट के कारण होने वाली गंभीर बीमारियों के खिलाफ प्रभावी है. 


    नो-प्रॉफिट, नो लॉस के आधार पर मदद करना चाहती है फाइजर


    फाइजर चाहती है कि उसकी वैक्सीन को भारत में जल्द से जल्‍द मंजूरी मिले. बता दें कि इससे पहले भी फाइजर ने भारत में सरकारी वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए नो-प्रॉफिट, नो लॉस के आधार पर मदद करना चाहती है. कंपनी ने भारत में वैक्सीन उपलब्ध कराने की भी इच्छा जताई थी. कोरोना महामारी ने भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों में तांडव मचा रखा है. भारत में भी रोजाना साढ़े तीन लाख से चार लाख कोरोना के केस प्रतिदिन रहे हैं. कोरोना रोजाना करीब साढ़े 3 हजार जिंदगियां निगल रहा है. इस वैश्विक महामारी से बचने के दो उपाय हैं. पहला, कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना और दूसरा जल्द से वैक्सीन लेना


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    फाइजर ने 500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की दवाइयां की हैं दान


    फाइजर ने जानकारी दी है कि उसने अमेरिका के अलावा यूरोप और एशिया के वितरण केंद्रों से 7 करोड़ डॉलर (करीब 510 करोड़) मूल्य की दवाएं भारत के लिए भेज रही है. कंपनी के सीईओ ने फाइजर इंडिया के कर्मचारियों को भेजे -मेल में कहा है कि वे भारत में कोरोना के हालात से काफी चिंतित है और इस संकट के समय वे भारत के सभी लोगों के साथ है. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से निपटने और वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने अप्रैल 2021 में ही आयातित विदेशी वैक्सीन का आपातकाल इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी.

    Published by:Amit Deshmukh
    First published: