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Coronavirus Outbreak: ये कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति बनाने का वक्त

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Updated: March 25, 2020, 9:14 PM IST
Coronavirus Outbreak: ये कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति बनाने का वक्त
फार्मा उद्योग का 90 फीसदी रॉ मैटीरियल चीन से आता है

चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू होने के बाद वहां से इंपोर्ट काफी प्रभावित हुआ है. दवाओं के 90 फीसदी रॉ मैटीरियल के लिए हमारी डिपेंडेंसी चीन पर ही है. मोबाइल और उसके ज्यादातर पार्ट वहीं से आते हैं.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 9:14 PM IST
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नई दिल्ली. इंडिया-चाइना इकोनॉमिक कल्चरल काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल प्रोफेसर मो. साकिब का कहना है कि कोरोना वायरस संकट का यह वक्त कच्चे माल के लिए चीन पर भारत की निर्भरता कम करने की रणनीति बनाने का वक्त है. दवाओं के 90 फीसदी रॉ मैटीरियल के लिए हमारी डिपेंडेंसी चीन पर ही है. मोबाइल और उसके ज्यादातर पार्ट वहीं से आ रहे हैं. ऑटोमोबाइल तीसरा ऐसा सेक्टर है जिसका सबसे ज्यादा सामान चीन से ही आता है. चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू होने के बाद वहां से इंपोर्ट काफी प्रभावित हुआ है. यही समय है कि हम इस बात पर विचार करें और नीति बनाएं कि आखिर कैसे हमारे यहां चीन की तरह छोटे और मध्यम उद्योग पनप सकते हैं.

न्यूज18 हिंदी से बातचीत में मो. साकिब ने कहा कि अमूमन इंडस्ट्री संचालक दो महीने का रॉ मैटीरियल रखते हैं फिर भी सप्लाई चेन टूट गई है इससे उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. चीन में 23 मार्च से कुछ फैक्ट्रियां खुलने लगी हैं. मुझे उम्मीद है कि 7 अप्रैल से वहां ऑफीशियली प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. लेकिन हमारे लिए यह ज्यादा जरूरी है कि हम किसी भी देश पर कच्चे माल के लिए अपनी निर्भरता कम करें. संसाधन बहुत हैं उसका सदुपयोग करने की जरूरत है. ताकि जब कोई ऐसी वैश्विक महामारी फैले तो हमारे देश में औद्योगिक उत्पादन पर असर न पड़े.

वित्त मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दिए गए एक आंकड़े के मुताबिक चीन से जनवरी में 42,955 करोड़ रुपये का आयात हुआ था तो फरवरी में यह 35,494 करोड़ रुपये का रह गया.

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कोरोना वायरस की वजह से चीन से इंपोर्ट प्रभावित हुआ है




सरकार ने क्या कहा?

भारत सरकार ने माना है कि चीन में कोरोनावायरस की वजह से फैक्ट्रियों के बंद होने से उन भारतीय उद्योगों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है जो वहां से कच्चे माल का आयात करते हैं. इसमें फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल उद्योग शामिल हैं. फार्मास्यूटिकल विभाग द्वारा दवाओं के स्टॉक की उपलब्धता की नियमित रूप से समीक्षा करने एवं क्राइसिस मैनेजमेंट का उपाय सुझाने के लिए ज्वाइंट ड्रम कंट्रोलर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है.

यही नहीं सरकार ने विदेश स्थित भारतीय मिशनों से कहा गया है कि वे हमारे उत्पादन के लिए अपने-अपने देशों में कच्चे माल के स्रोत का पता लगाएं. कई मिशनों ने अपने-अपने देश में संभावित आपूर्तिकर्ताओं की सूची एक्पोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साझा की है.

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First published: March 25, 2020, 8:58 PM IST
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