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दावोस में बोले पीयूष गोयल, निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार की तरफ बढ़ने की जरूरत

News18Hindi
Updated: January 21, 2020, 7:07 PM IST
दावोस में बोले पीयूष गोयल, निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार की तरफ बढ़ने की जरूरत
पीयूष गोयल

स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में हिस्सा ले रहे पीयूष गोयल ने कहा कि निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार की तरफ बढ़ने की जरूरत हैं.

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  • Last Updated: January 21, 2020, 7:07 PM IST
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दावोस. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने मंगलवार को कहा कि भारत कई देशों के साथ निष्पक्ष और न्यायंसगत व्यापार करने पर काम कर रहा है. पीयूष गोयल ने यह बात स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के 50वें सालाना बैठक में कही. वाणिज्य एवं औद्योगिक मंत्री ने सम्मेलन में हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में कई देशों के बीच व्यापार सहयोग पर भी जोर देते हुए कहा कि साथ-साथ हमें पर्यावरण को लेकर उठती समस्याओं को भी निवारण के साथ मिलकर करना होगा.

RCEP पर बोले
इस दौरान रिजनल कॉम्प्रीहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) को लेकर गोयल ने कहा कि मौजूदा सूरत में यह अग्रीमेंट काम करने लायक नहीं है. उन्होंने कहा, 'किसी भी समझौते से पहले कई अहम बातों को ध्यान में रखना होता है. वर्तमान में भारत एक गहरे राजकोषीय संकट (Fiscal Deficit) से जूझ रहा है. ये हाल चीन समेत कई अन्य देशों का भी है.'

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जलवायु परिवर्तन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
गोयल ने कहा कि पहली बार भारत ने यह साबित किया की व्यापार केवल कूटनीति के आधार पर नहीं किया जा सकता है. गोयल ने भारत द्वारा RCEP समझौते से हाथ पीछे खींचने की तरफ इशारा करते हुए कहा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि RCEP में कई विविधताओं को एक करना इसका प्रमुख फैक्टर है. लेकिन, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर भारत विशेष रूप से ध्यान दे रहा है और हम इसे लेकर निष्पक्ष सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं.

निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार की कोशिशगोयल ने कहा कि हिंद महासागर में हम एक धुरी की तरह हैं और हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में भारी क्षमता है. लेकिन, इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन भी भारत के लिए​ चिंता एक गंभीर विषय है. इस क्षेत्र में आगे बढ़ना पूरे ग्रुप के लिए बेहतर होगा. साथ ही हम निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार करने में सफल हो सकेंगे. जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत कई देशों से भी उम्मीद करता है कि वो इस दिशा में सही कदम उठाएं.

बता दें कि हिंद महासागर के क्षेत्र से दुनिया के तेल का एक तिहाई हिस्सा गुजरता है. वहीं, कंटेनर​शिप का आधा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से गुजरता है, जिसपर करीब 2.7 अरब लोगों निर्भर रहते हैं.

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First published: January 21, 2020, 7:07 PM IST
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