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बड़ी खबर! सरकार देश में बढ़ाएगी Ethanol का उत्पादन, चीनी उद्योग के साथ गन्ना किसानों को होगा डबल फायदा

सरकार देश में Ethanol का उत्पादन बढ़ाने जा रही है, जिससे किसानों को डबल फायदा होगा
सरकार देश में Ethanol का उत्पादन बढ़ाने जा रही है, जिससे किसानों को डबल फायदा होगा

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) की चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में एथेनॉल (Ethanol) के उत्पादन को बढ़ाने पर सहमति बनी है. एथेनॉल के उत्पादन से चीनी उद्योग के साथ किसानों को भी फायदा होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 12:54 PM IST
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नई दिल्ली. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) की गुरुवार शाम को शुगर इंडस्ट्री के साथ हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. इस बैठक में Sugar industry से जुड़े करीब 30 लोगों के साथ वाणिज्य मंत्री ने चीनी उद्योग के हालात पर कई अहम फैसले लिए हैं. वचुर्अल माध्यम से होने वाली इस बैठक में विभिन्न चीनी कंपनियों के सीईओ, सीएमडी और इस्मा जैसे कई शुगर एसोसिएशंस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. बता दें कि पीयूष गोयल की यह बैठक अपने कार्यभार संभालने के बाद पहली बैठक थी.

बैठक में लिए गए ये अहम फैसले-
चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में वाणिज्य मंत्री ने देश में एथेनॉल (Ethanol) के उत्पादन को बढ़ाने पर सहमति बनाई है. बता दें कि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं होती. ऐसे में एथेनॉल की कीमतें बढ़ने से किसानों को फायदा होगा. गन्ने का उत्पादन बढ़ने से चीनी उद्योग को भी फायदा पहुंचेगा.

जानिए क्या है एथेनॉल (Ethanol)
एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. एथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होती है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है. एथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है. इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है. इसके अलावा एथेनॉल हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है. एथेनॉल में 35 फीसदी फीसद ऑक्सीजन होता है. एथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है.




एथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है. इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है. कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है.यह इंजन की गर्मी को भी बाहर निकालता है. एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया. कहने का मतलब एथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है.

कैसे होगा किसानों को इससे फायदा
वर्तमान समय में एथेनॉल की कीमत 43.75 रु प्रति लीटर से लेकर 59.48 रु प्रति लीटर है. आपको बता दें कि चीनी कंपनियों से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जिस कीमत पर एथेनॉल खरीदती हैं वो सरकार तय करती है. एथेनॉल के उत्पादन से खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है. भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो एथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती. ऐसे में एथेनॉल की कीमतें बढ़ने से किसानों को फायदा होगा. क्योंकि शुगर मिल आसानी से गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान कर पाएंगी.

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2030 तक रखा ये लक्ष्य
पिछले इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-19 के दौरान चीनी मिलों और अनाज आधारित भट्टियों (डिस्टिलरीज़) द्वारा लगभग 189 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की गई थी, जिससे 5 प्रतिशत सम्मिश्रण तैयार हुआ और वर्तमान इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2019-20 में, 190-200 करोड़ लीटर की आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि 5.6 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके. सरकार ने 2022 तक पेट्रोल के साथ 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का और 2030 तक 20 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है. सरकार के इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग नियमित रूप से वित्तीय सेवा विभाग; पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय; पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य सरकारें. चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों और बैंकों के साथ मिलकर बैठकें कर रहे है.
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