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लक्ष्मी विलास बैंक के DBS में मर्जर को HC में चुनौती, शेयरहोल्डर्स को अधर में छोड़ने का आरोप

आरबीआई ने मर्जर योजना को 25 नवंबर, 2020 को मंजूरी दी थी और 27 नवंबर, 2020 को यह मर्जर हुआ था.
आरबीआई ने मर्जर योजना को 25 नवंबर, 2020 को मंजूरी दी थी और 27 नवंबर, 2020 को यह मर्जर हुआ था.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार और आरबीआई लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के शेयरहोल्डर्स के हितों की सुरक्षा करने में असफल रहे हैं.

  • Last Updated: January 17, 2021, 7:26 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में दायर एक याचिका में लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) का डेवलपमेंट बैंक ऑफ सिंगापुर (Development Bank of Singapore) में मर्जर को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि बैंक के शेयरहोल्डर्स को अधर में छोड़ दिया गया है और केंद्र तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) उनके हितों का संरक्षण करने में विफल रहे हैं.

RBI का SC से अपील, याचिकाओं को बॉम्बे HC में ट्रांसफर किया जाए 
यह याचिका 13 जनवरी को चीफ जस्टिस डी एन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच के सामने लिस्टेड थीं, लेकिन इसे 19 फरवरी तक आगे बढ़ा दिया गया है. बेंच को सूचित किया गया कि रिजर्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मर्जर योजना के खिलाफ सभी याचिकाओं को बॉम्बे हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया है.

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दिल्ली हाईकोर्ट के एक वकील ने दायर की है याचिका


दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका वकील सुधीर कठपालिया ने दायर की है, जो लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरहोल्डर भी हैं. इस मर्जर योजना की वजह से उन्हें कंपनी में अपने 20 हजार शेयर गंवाने पड़े हैं. कठपालिया ने योजना के उस प्रावधान को रद्द करने की अपील की है जिसमें कहा गया है कि मर्जर की तारीख से चुकता शेयर पूंजी की पूरी राशि और रिजर्व ओर सरप्लस 'राइट ऑफ' कर दिया जाएगा. याचिका में कहा गया है कि योजना के तहत डीबीएस को लक्ष्मी विलास बैंक के निवेशकों को बदले में कोई शेयर देने की जरूरत नहीं है. ऐसे में शेयरहोल्डर्स को अधर में छोड़ दिया गया है.

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शेयरहोल्डर्स के हितों की सुरक्षा करने में असफल रहने का आरोप 
याचिकाकर्ता का आरोप है कि केंद्र सरकार और आरबीआई लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरहोल्डर्स के हितों की सुरक्षा करने में असफल रहे हैं. इसमें यह भी दावा किया गया है कि अन्य बैंकों और वित्त संस्थानों से विलय के लिए बोलियां मंगाये बिना ही डीबीएस को मर्जर के लिए चुन लिया गया.

गौरतलब है कि आरबीआई ने इस मर्जर योजना को 25 नवंबर, 2020 को मंजूरी दी थी और 27 नवंबर, 2020 को यह मर्जर हुआ था.
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