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इस साल 5 फीसदी और अगले साल 6-6.5 फीसदी रह सकती है GDP दर: बिबेक देबरॉय

भाषा
Updated: January 24, 2020, 9:17 PM IST
इस साल 5 फीसदी और अगले साल 6-6.5 फीसदी रह सकती है GDP दर: बिबेक देबरॉय
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन बिबेक देबरॉय

प्रधानमंत्री के आर्थिक सहलाकार समिति के चेयरमैन ने कोलकाता के सम्मेलन में कहा कि इस साल जीडीपी दर 5 फीसदी रह सकती है. वहीं, उन्होंने अगले साल के लिए कहा कि 6-6.6 रह सकता है.

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कोलकाता. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन विवेक देबरॉय (Bibek Debroy) ने शुक्रवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष (2019- 20) में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर पांच प्रतिशत रह सकती है. उन्होंने टाटा स्टील कोलकाता साहित्य सम्मेलन में कहा कि मौजूदा स्थिति में 9 प्रतिशत की GDP वृद्धि दर हासिल करना मुश्किल है.

देबरॉय ने कहा, ‘‘महत्वाकांक्षी वृद्धि दर साढ़े छह से सात प्रतिशत के बीच हो सकती है. इस अवस्था में नौ प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर पाना मुश्किल है.’’ इस साल वृद्धि दर पांच प्रतिशत रहेगी और यह वास्तविक है न कि सांकेतिक. वहीं, अगले साल (2020- 21) जीडीपी वृद्धि दर छह से साढ़े छह प्रतिशत के बीच कहीं रह सकती है.’’

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हाल ही में IMF ने घटाया था अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 20 में 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. जबकि इससे पहले उसने अक्टूबर में इसके 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था. देवरॉय ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) अभी जिस माहौल में वृद्धि कर रही है उसमें कहीं न कहीं संरक्षणवाद का प्रभाव है और इससे निर्यात में गिरावट आ रही है.उन्होंने कहा, ‘‘जब देश नौ प्रतिशत जैसी तीव्र आर्थिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रहा था तब जीडीपी के मुकाबले निर्यात का अनुपात 20 प्रतिशत था. लेकिन अब परिदृश्य बदला हुआ है. विश्व व्यापार संगठन के धराशायी हो जाने के बाद विकसित राष्ट्र संरक्षणवादी हो गये हैं, जिसके कारण जीडीपी में निर्यात का बड़ा योगदान संभव नहीं हो पा रहा है.’’

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मजबूत हो रहा सर्विस सेक्टर
देबरॉय ने कहा, ‘‘भारत सेवा क्षेत्र में मजबूती रही है, न कि विनिर्माण में. ऐसे में देश को कुछ पाने के लिये कुछ खोना पड़ेगा. यह विशेषकर क्षेत्रीय व्यापार समझौतों में कुछ पाने के लिये कुछ खोने वाली स्थिति है.’’

GST राजस्व में अनुमान से कम
कर व्यवस्था के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश अब बिना किसी छूट वाली स्थिर प्रत्यक्ष कर व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. वस्तु एवं सेवा कर (GST) अभी भी विकास की प्रक्रिया में है. GST राजस्व (GST Revenue) के लिहाज से ठीकठाक रहने का अनुमान था. लेकिन GST आने के बाद सरकार का राजस्व कम हुआ है, जो वहनीय नही है.’’

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First published: January 24, 2020, 9:11 PM IST
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