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₹100 लाख करोड़ की पीएम गति-शक्ति योजना, चीन से मुकाबले में साबित हो सकती है ब्रह्मास्त्र

गति-शक्ति पोर्टल पर करीब 200 प्रोजेक्ट्स में आ रही परेशानी का निपटारा हुआ.

गति-शक्ति पोर्टल पर करीब 200 प्रोजेक्ट्स में आ रही परेशानी का निपटारा हुआ.

भारत के सामने एक बड़ी समस्या है चल रही परियोजनाओं में देरी. पीटीआई की एक खबर के मुताबिक, देश में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

गति-शक्ति योजना के तहत एक पोर्टल बनाए गया है जहां 16 मंत्रालयों की सेवाएं मिलेंगी.
इसे प्रोजेक्ट्स को जल्दी मंजूरी देने और उनमें आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए बनाया गया है.
इस योजना का मकसद लॉजिस्टिक्स की बधाओं को दूर कर ट्रांसपोर्टेशन बेहतर करना है.

नई दिल्ली. दुनियाभर के निर्माता अपना प्रोडक्शन बढ़ाने और सप्लाई चेन के विस्तार के लिए अब चीन प्लस वन पॉलिसी की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में भारत इस पोजिशन के लिए एक मजबूत दावेदार बनकर उभर सकता है. भारत के पास युवा श्रम है जो व्यापक रूप से अंग्रेजी बोल और पढ़ सकता है. इसके अलावा भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था है और यह तथ्य देश के पक्ष में काम करता है.

हालांकि, प्रोजेक्ट्स में देरी भारत के सामने एक बड़ी समस्या है. पीटीआई की एक खबर के मुताबिक, देश में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में आधे देरी से चल रहे हैं. इतना ही नहीं, हर 4 में से एक प्रोजेक्ट की कीमत उसकी एस्टिमेटेड वैल्यू से ऊपर जा चुकी है. इसी दुविधा का 100 लाख करोड़ रुपये (1.2 ट्रिलियन डॉलर) की पीएम गति-शक्ति योजना अंत कर सकती है. इस योजना के तहत 16 मंत्रालयों को एक प्लेटफॉर्म गति-शक्ति पोर्टल पर लाया गया है. जहां निवेशकों को प्रोजेक्ट के डिजाइन, एस्टिमेडेट कॉस्ट और उसके लिए तेजी से अनुमति प्राप्त होगी.

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कैसे सहायक होगी गति-शक्ति
ट्रांसपोर्ट और इंफ्रा के क्षेत्र से जुड़ी कंपनी कार्नी इंडिया के पार्टनर अंशुमन सिन्हा कहते हैं, “गति शक्ति देश में वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों को एक से दूसरे स्थान पर आसानी से पहुंचाने में मदद करेगी.” उन्होंने कहा कि अगर आप गति शक्ति योजना को बारीकी से समझते हैं तो आप पाएंगे कि यह लॉजिस्टिक नेटवर्क को किस तरह से मजबूत कर रही है. बकौल सिन्हा, ये लॉजिस्टिक्स में आ रही परेशानियों को पहचानकर उन्हें हटाने का काम करेगी. देश में निवेश को बढ़ावा दे रही एक सरकारी एजेंसी ने कहा है कि गति शक्ति टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यह सुनिश्चित करेगी कि एक बार सड़क बन जाने के बाद फोन केबल या गैस पाइपलाइन डालने के लिए उसे दोबारा न खोदा जाए. एजेंसी के अनुसार, इस योजना का मकसद है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर को उसी तरह बढ़ाया जाए जैसे यूरोप ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद और चीन 1980-2010 के बीच किया.

200 प्रोजेक्टस की समस्यओं को खत्म किया
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विशेष सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि इस योजना का मकसद प्रोजेक्ट्स को समय पर खत्म करवाना और ओवरकॉस्ट से बचाना है. उन्होंने बताया कि करीब 422 परियोजनाओं में गति-शक्ति पोर्टल ने कुछ समस्याओं की पहचान की और इनमें से 200 का निपटारा कर दिया. मीणा ने कहा कि सरकार गति-शक्ति पोर्टल का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में आ रही परेशानियों को पहचानने के लिए कर रही है. करीब 196 प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता पर रखा गया है. सड़क मंत्रालय 11 ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स तैयार करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है जो सरकार की भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनाए जाने हैं. इनकी कीमत करीब 106 अरब डॉलर है. इसमें 83677 किलोमीटर सड़क बननी है.

Tags: Business news in hindi, China, Economy, Indian economy, Infrastructure Projects, Manufacturing sector

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