PM किसान योजना: 2000 रुपये की पहली किस्त के लिए नहीं देना होगा आधार नंबर, मार्च में मिलेगा पैसा

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान योजनाके तहत पहली किस्त के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा. हालांकि, दूसरी किस्त पाने के लिए आधार को अनिवार्य किया गया है.

भाषा
Updated: February 4, 2019, 7:53 PM IST
PM किसान योजना: 2000 रुपये की पहली किस्त के लिए नहीं देना होगा आधार नंबर, मार्च में मिलेगा पैसा
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: February 4, 2019, 7:53 PM IST
छोटे किसानों को नकद समर्थन उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान योजना (PM Kisan scheme) के तहत पहली किस्त के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा. हालांकि, दूसरी किस्त पाने के लिए आधार को अनिवार्य किया गया है. सरकार ने अंतरिम बजट में 75 हजार करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) की घोषणा की है. इस योजना के तहत 2 हेक्टेयर तक की जोत वाले छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपये की नकद मदद दी जाएगी. यह राशि तीन किस्तों में उनके बैंक खाते में डाली जाएगी.

पहली किस्त के लिए आधार अनिवार्य नहीं
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार 2,000 रुपये की पहली किस्त के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन दूसरी किस्त पाने के लिए आधार नंबर को अनिवार्य किया गया है. किसानों को अपनी पहचान बताने के लिए आधार नंबर देना होगा.

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मार्च तक जारी होगी पहली किस्त


केंद्र द्वारा पूर्ण वित्त पोषित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का क्रियान्वयन इसी साल से होगा और किसानों को पहली किस्त मार्च तक हस्तांतरित की जाएगी. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को भेजे पत्र में कहा है, ‘दिसंबर 2018 से मार्च 2019 की अवधि किस्त पाने के लिए आधार नंबर जहां उपलब्ध होगा वहीं लिया जाएगा.’

आधार न रहने पर वैकल्पिक पहचान पत्र चलेंगे
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यदि आधार नंबर नहीं है, तो अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों मसलन ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र नरेगा रोजगार कार्ड या केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा जारी किसी अन्य पहचान पत्र के आधार पर पहली किस्त दी जा सकती है. मंत्रालय ने कहा कि दूसरी और उसके बाद की किस्त के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा. मंत्रालय ने राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पात्र किसानों को दोहराव नहीं हो.

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डेटाबेस बनाने का निर्देश
राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे गांवों में लाभार्थी छोटे और सीमान्त किसानों का डाटाबेस बनाएं. राज्यों से ऐसे किसानों का ब्योरा मसलन नाम, स्त्री हैं या पुरुष, एससी-एसटी, आधार, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर जुटाने को कहा है. केंद्र ने छोटे और सीमांत किसानों को पति, पत्नी, 18 साल तक के नाबालिग बच्चों के हिसाब से परिभाषित किया है, जिनके पास संबंधित राज्य के भू रिकॉर्ड के अनुसार दो हेक्टेयर तक खेती योग्य जमीन है.
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