कोरोना काल में पीएम मोदी दुनिया में भारत का डंका बजाने की कोशिश में जुटे रहे

कोरोना काल में पीएम मोदी दुनिया में भारत का डंका बजाने की कोशिश में जुटे रहे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पिछले कुछ हफ्तों मे पीएम मोदी ने अंतराष्ट्रीय मंच पर व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई सम्मेलनों को संबोधित किया है. 9 जुलाई को पीएम मोदी ने इंडिया ग्लोबल वीक 2020 को संबोधित किया था.

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  • Last Updated: July 31, 2020, 12:18 AM IST
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अमिताभ सिन्हा


प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी ने जब भारत अमेरिका व्यापार परिषद के सम्मेलन में कहा कि भारत में निवेश करने का ये सबसे उपयुक्त समय है और वो भी ऐसे देश में जिस पर भरोसा कर सकते हैं, तो साफ हो गया कि अब पीएम मोदी का सिर्फ एक ही लक्ष्य है. और वो है भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को आत्मनिर्भर बनाना और विदेशों में भी भारतीय वस्तुओं की धाक जमाना. निशाना भी साफ था. कोरोना काल के बाद की दुनिया में जब मानवता को बचाना ही मुहिम बची हो, ऐसे में चीन जैसी चाल चलने वाले देश को पीछे छोड़ते हुए भारत के सूक्ष्म और लघु उद्योगों को आगे बढाना ताकि गांव के स्तर तक लोग आत्मनिर्भर हो जाएं तो दुनियाभर में भारत अपनी चीजें निर्यात करना शुरु कर दे. इसीलिए पिछले एक दो महीनों से पीएम मोदी तमाम मंत्रालयों की बैठकें भी ले रहे हैं तो पूरा ध्यान इसी बात पर है कि रोजगार कैसे बढ़े और दूर गांव मे बैठे लोगों को काम धंधे में कैसे लगाया जाए. ताकि कोरोना काल के बाद आत्मनिर्भर भारत अभियान सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को इसके असर से बार सके.

दुनिया भर के विकसित देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की कवायद
पीएम मोदी ने इंडिया आइडिया समिट को संबोधित किया जो भारत अमेरिका व्यापार परिषद की 45वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित की गयी थी. इस साल होने वाले सम्मेलन की थीम थी 'एक बेहतर भविष्य का निर्माण'. इस सम्मेलन में भारत और अमेरिका के शीर्ष पॉलिसी मेकर्स, व्यापार जगत और समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिका के सेक्रेट्री ऑफ स्टेट माइक पॉम्पियो भी इसे संबोधित किया. पीएम मोदी ने भी अमरीका के उद्योग जगत को दो टुक कहा कि अगर वे अपने निवेश के लिए उपयुक्त समय की तलाश करते हैं तो वो भारत वो समय गया है और भारत में निवेश का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता है.



पिछले कुछ हफ्तों मे पीएम मोदी ने अंतराष्ट्रीय मंच पर व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई सम्मेलनों को संबोधित किया है. 9 जुलाई को पीएम मोदी ने इंडिया ग्लोबल वीक 2020 को संबोधित किया था. फिर उन्होने 15 जुलाई को हुई भारत और यूरोपीयन यूनियन की 15वीं बैठक की संयुक्त अध्क्षता की. पीएम मोदी ने 17 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र की 75वी वर्षगांठ पर एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित किया था. कुल मिला कर संदेश यही है कि पीएम मोदी इसी कोशिश में लगे हैं कि कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में भारत एक बड़ी ताकत के रुप में उभरे.

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अर्थव्यवस्था से जुड़े सभी मंत्रालयों और स्टेकहोल्डर्स से संवाद
कोरोना का अर्थव्यवस्था पर इतना बूरा असर पड़ा कि लोगों के धंधे चैपट हो गए. प्रवासी मजदूर अपना ठिकाना छोड कर अपने अपने गावों की तरफ निकल पड़े. लोग कहने लगे की आजादी के बाद हुए बंटवारे के बाद का ये सबसे बड़ा पलायन था. लेकिन इस चुनौती को भी पीए मोदी और उनकी सरकार अवसर में बदलने की कोशिशों में लगी रही. इस मुहिम में मजदूरों को गांव में ही मनरेगा के तहत काम, उनके स्कील की मैपिंग करवा कर उन्हें रोजगार देने की शुरुआत, छोटे मोटे धंधों के लिए लोन की सुविधा उपलब्ध करा कर प्रवासी श्रमिकों को रोजमर्रा की जरुरतें पूरा करने में सक्षम बनाना शामिल रहा.

लॉकडाउन के बाद पीएम मोदी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है. 29 जुलाई को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (NBFC) के तमाम स्टेकहोल्डर्स से बैठक में पीएम ने कहा कि किसानों, छोटे उद्योगों और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को संस्थागत लोन लेने के लिए प्रेरित करें. पीएम मोदी ने ये भी सलाह दी कि बैंको को अपने नीतियों में बदलाव करना चाहिए ताकि वो सभी लोन लेने वालों को एक पैमाने में नहीं नापें. यानि हर लोन लेने वाले को एनपीए समझ कर इनकार नहीं करें. इसके पहले पीएम मोदी ने स्वनीधि योजना की समीक्षा कर रेहड़ी-पटरी वालों को 10 हजार लोन देने के लिए सक्रियता बढ़ाने को कहा. उधर सूक्ष्म और लघु उद्योग मंत्रालय ने एक बड़े पैकेज का ऐलान कर साफ कर दिया है कि अब मोदी सरकार का पूरा ध्यान भारत की पहचान को मजबूत करने वाले उध्योग धंधों पर ही रहेगा.

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विदेशी निवेश के लिए निवेशकों का पसंसदीदा ठिकाना बन रहा है भारत
पीएम मोदी जानते हैं कि अगर चीन से निकल रही 10 से 15 फीसदी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां भी भारत में डेरा डाल देतीं हैं तो आने वाले दिनों मे इस बात का डंका जरुर बज जाएगा कि भारत निवेश के लिए उपयुक्त देश है, जहां श्रम के साथ—साथ स्कील्ड लेबर की संख्या भी भरपूर है. अब भारत भी आईफोन बनाने के एक महत्वपूर्ण हब के रूप में उभर कर सामने आया है. सूत्र बताते हैं कि चीन से बाहर जा रही कम से कम 10 फोन और आईटी कंपनियों ने भारत मे निवेश करने की तैयारी कर ली है. कोरोना से लंबी जंग बाकी है और साथ ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर भी लाना है. इसलिए यही कहा जा सकता है कि लड़ाई लंबी है लेकिन सही दिशा में है.
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