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बैंकॉक में आसियान समिट आज, भारत को छोड़ अन्य सभी 15 देश RCEP पर हो सकते हैं राजी

भाषा
Updated: November 4, 2019, 12:50 PM IST
बैंकॉक में आसियान समिट आज, भारत को छोड़ अन्य सभी 15 देश RCEP पर हो सकते हैं राजी
RCEP को मुकाम तक पहुंचाने के लिये बातचीत का दौर जारी

भारत को छोड़कर RCEP के अन्य सभी 15 देश आज आसियान समिट में समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं.

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बैंकॉक. बैंकॉक में आज आसियान (ASEAN) समिट होने वाला है. आसियान में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) थाइलैंड में हैं. पीएम मोदी और रिजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) के अन्य 15 सदस्य देशों के नेता आज यहां समझौते को लेकर बातचीत करेंगे और उम्मीद की जा रही है कि इसमें सकारात्मक परिणाम सामने आएगा. भारत आरसीईपी में बाजार पहुंच के मद्दे को काफी जोरशोर से उठा रहा है.

भारत और आसियान के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारत को जोड़कर आसियान क्षेत्र की आबादी 1.85 अरब की है. यह दुनिया की आबादी का करीब 25 प्रतिशत बैठता है. इनका सामूहिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमानत: 3,800 अरब डॉलर है. पिछले 17 साल में भारत को आसियान से करीब 70 अरब डॉलर का निवेश मिला है. देश में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का यह 17 प्रतिशत बैठता है.

थाइलैंड के प्रधानमंत्री प्रायुथ चन-ओचा ने दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के संघ (आसियान) की शिखर बैठक के बाद संवाददाता सम्मलन में आरसीईपी समझौते को पूरा करने का आह्वान किया. आसियान देश इस समझौते को जल्द करने पर जोर दे रहे हैं. रिजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप में आसियान (ASEAN) संगठन के 10 देश और उनके मुक्त व्यापार भागीदार- चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. यह इस मामले में काफी महत्व रखता है कि भारत इस समझौते को लेकर अभी भी बाजार पहुंच और शुल्क संबंधी मुद्दों को लेकर अपनी मांग पर अड़ा है.

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RCEP होगा दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एरिया
लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) बातचीत में लगे विभिन्न देशों के राजनयिक इस बात को लेकर उम्मीद जता रहे हैं कि आज समूह के नेताओं की शिखर बैठक से पहले कोई निदान निकल आने की उम्मीद है. आरसीईपी समझौता यदि हो जाता है तो यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र होगा. इसमें शामिल 16 देशों में दुनिया की कुल आबादी में से 3.6 अरब लोग हैं. यह संख्या दुनिया की कुल आबादी का करीब आधा है.

क्या है RCEP?
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आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में सहूलियत प्रदान करता है. अग्रीमेंट के तहत सदस्य देशों को आयात और निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं भरना पड़ता है या बहुत कम भरना पड़ता है. इस अग्रीमेंट पर आसियान के 10 देशों के साथ-साथ छह अन्य देश, जिसमें भारत भी शामिल है, दस्तखत करेंगे.

आरसीईपी के 16 देशों के व्यापार मंत्री शनिवार को भारत द्वारा उठाये गये मुद्दों का समाधान करने में असफल रहे. हालांकि, इस मामले में आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान अलग अलग जगहों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है. राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आरसीईपी सम्मेलन में शामिल विभिन्न देशों के नेता सम्मेलन के समाप्ति पर एक संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं जिसमें समझौते को लेकर पिछले कुछ वर्षों से जारी बातचीत के समाप्त होने और लंबित रह गये मुद्दों का तय समयसीमा के भीतर अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिये समाधान निकालने पर सहमति हो सकती हैं.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरसीईपी के अन्य 15 सदस्य देशों के नेता आज को यहां समझौते को लेकर बातचीत करेंगे और उम्मीद की जा रही है कि इसमें सकारात्मक परिणाम सामने आयेगा. भारत आरसीईपी में बाजार पहुंच के मद्दे को काफी जोरशोर से उठा रहा है. वह अपने घरेलू बाजार को बचाने के लिये भी कुछ सामानों की सूची आगे बढ़ा रहा है. भारत में कुछ उद्योग क्षेत्रों को यह खतरा बना हुआ है कि आरसीईपी समझौता होने के बाद देश में सस्ते चीनी माल की बाढ़ आ जायेगी. आरसीईपी समझौते के बाद समूह के सदस्य देशों के बीच माल एवं सेवाओं का शुल्क मुक्त आयात- निर्यात हो सकेगा. ऐसे में भारत में चीन से कृषि और औद्योगिक उत्पादों के सस्ते सामान का आयात बढ़ सकता है. सूत्रों ने बताया कि भारत को छोड़कर आरसीईपी के अन्य सभी 15 देश आज होने वाली शिखर बैठक में समझौते को अंतिम रूप देने पर राजी है.

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First published: November 4, 2019, 11:55 AM IST
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