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PM मोदी यूपी को देंगे 6 लेन सड़क का तोहफा, खर्च हुए 2447 करोड़ रुपये, 30 नवंबर को जाएंगे वाराणसी

पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 30 नवंबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) दौरे पर रहेंगे. वह इसी दिन एनएच-19 के हंदिया (प्रयागराज) से राजातालाब (वाराणसी) सेक्शन के 6 लेन सड़क प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 8:41 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 30 नवंबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) दौरे पर रहेंगे. प्रधानमंत्री इसी दिन एनएच-19 के हंदिया (प्रयागराज) से राजातालाब (वाराणसी) सेक्शन के 6 लेन सड़क प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे. वाराणसी दौरे के दौरान पीएम मोदी देव दीपावली (Dev Deepawali) में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री वाराणसी के राजघाट पर दिए जलाएंगे, जहां दोनों तरह 11 लाख दिए प्रकाशमय किए जाने हैं.

प्रयागराज-वाराणसी एनएच के चौड़ीकरण से मुसाफिरों को होंगे ये फायदे
एनएच-19 के प्रयागराज से वाराणसी सेक्शन के चौड़ीकरण करने में 2447 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. 73 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना के पूरा होने से अब प्रयागराज से वाराणसी तक जाने में 1 घंटा कम समय लगेगा.

वाराणसी के इस प्रोजेक्ट की प्रगति की पीएम समीक्षा करेंगे
वाराणसी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निर्माणाधीन काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट की साइट पर जाएंगे. पीएम स्वयं इस प्रोजेक्ट के कार्यों के प्रगति का जायजा लेंगे. इसके साथ ही पीएम मोदी सारनाथ के आर्कियोलॉजिकल साइट पर लाइट और साउंड शो का भी आनंद लेंगे. गौरतलब है कि इस लाइट और साउंड शो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही किया था.



क्या है देव दीपावली
देव दीपावली आज एक विश्व प्रसिद्ध प्रकाशोत्सव बन चुका है. कार्तिक महीने के प्रत्येक पूर्णिमा को यह दीप दान का त्योहार काफी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. 30 नवंबर को यह त्योहार देशभर में मनाया जाएगा. इसी के साथ ही कार्तिक मास स्नान भी 30 नवंबर को समाप्त हो जाएगा. एक मास के कार्तिक स्नान के आखिरी दिन पूर्णिमा को श्रद्धालु मंदिरों में दीप दान करते हैं. इसी दीप दान को देव दीपावली के नाम से जाना जाता है.

देव दीपावली को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित
देव दीपावली को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है. एक कथा के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही माता तुलसी वनस्पति के रूप में पृथ्वी पर प्रगट हुई थीं. एक दूसरे कथा के अनुसार त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक स्वर्ग, भूलोक और पाताल लोकवासी डरे हुए थे. त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया था. त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था. उसके तप से तीनों लोक जलने लगे. तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिए. त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव, जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं. इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा. सभी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से इस दैत्य के अंत का उपाय पूछा. ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया. सभी देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की. तब महादेव ने त्रिपुरासुर के वध का निर्णय लिया. महादेव ने तीनों लोकों में दैत्य को ढूंढ़ा. कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया. उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानि काशी में आकर दीपावली मनाई.
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