PMFBY: लॉकडाउन में 10 राज्यों के किसानों को दिए गए 1008 करोड़ रुपये

PMFBY: लॉकडाउन में 10 राज्यों के किसानों को दिए गए 1008 करोड़ रुपये
PM-Kisan योजना लिस्ट में ऐसे रजिस्टर कराएं अपना नाम, 2000 पाने का सुनहरा मौका

अब किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) रखने वालों के लिए स्वैच्छिक है कर दी गई है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सिर्फ 2 से 5 फीसदी तक लगता है प्रीमियम

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान भी मोदी सरकार ने किसानों को राहत दिलाने का काम जारी रखा हुआ है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY-Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)  के तहत अब तक 10 राज्यों के किसानों को 1,008 करोड़ के दावों (Claim) का भुगतान किया गया है. उधर, सरकार की यह कोशिश भी जारी है कि इस योजना से ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़ें. 2018-19 सिर्फ 507.987 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र का ही बीमा हुआ. जबकि पहले यह इससे कहीं ज्यादा हुआ करता था.

फिलहाल सरकार ने बीमा कंपनियों के सामने कई तरह की शर्तें रख दी हैं ताकि किसानों का हित सुरक्षित रहे. इसके तहत बीमा का अधिकांश प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर देती हैं. किसानों को खरीफ फसलों पर कुल प्रीमियम का 2 फीसदी, रबी फसलों पर 1.5 और बागवानी नकदी फसलों पर अधिकतम 5 फीसदी प्रीमियम देना होता है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक लोग इस योजना का फायदा उठाएं.

क्या किसानों के हित सुरक्षित कर पाएंगे ये बदलाव



(1)  किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) धारकों के लिए फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया गया है. अब तक बीमा कंपनियां उन किसानों के खाते से प्रीमियम का पैसा पहले ही काट लेती थीं, जिनके पास केसीसी होता था.
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फसल खराब होने पर मुआवजे के लिए बीमा करवाना है फायदेमंद


(2)  किसान अपनी पसंद और जरुरत के मुताबिक बीमा ले सकेंगे. जैसे सूखा या बाढ़ के लिए अलग-अलग या फिर दोनों में में कोई एक भी.

(3)  योजना में फसल नुकसान का आकलन अब सैटेलाइट द्वारा किया जाएगा. इसके जरिए स्मार्ट सैंपलिंग होगी. इससे किसानों को बीमा दावों का भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी होगा.

(4)  बीमा कंपनियां एक साल के बजाए कम से कम तीन साल के लिए टेंडर भरेंगी. यानी अब कम से कम तीन साल के लिए बीमा कार्य दिया जाएगा, जिससे किसानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एवं जवाबदेही पूरी होगी.

(5)  तय समय में बीमा राशि का भुगतान न करने वाले राज्यों को योजना से बाहर किया जाएगा. सिंचित क्षेत्रों में केंद्रीय सब्सिडी 25 और गैर सिंचित क्षेत्र के लिए बीमा केंद्रीय सब्सिडी 30 फीसदी तक सीमित होगी.

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