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वीवीआईपी लोगों ने नहीं चुकाए Air India के इतने करोड़ रुपये, RTI में हुआ खुलासा

News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 4:06 PM IST
वीवीआईपी लोगों ने नहीं चुकाए Air India के इतने करोड़ रुपये, RTI में हुआ खुलासा
एयर इंडिया ने बताया हैं कि 30 नवंबर 2019 तक वीवीआईपी चार्टर फ्लाइट्स का कुल 822 करोड़ रुपये बकाया है.

रिटायर्ड कोमोडोर लोकेश के बत्रा (Commodore Lokesh K. Batra (Retd.)) ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत एयर इंडिया के बकाया बिल की जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में एयर इंडिया ने बताया हैं कि 30 नवंबर 2019 तक वीवीआईपी चार्टर फ्लाइट्स का कुल 822 करोड़ रुपये बकाया है.

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  • Last Updated: February 6, 2020, 4:06 PM IST
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नई दिल्ली. पैसों की तंगी से जूझ रही सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया (Air India) को सरकार बेच रही हैं. लेकिन आपको ये जानकारी हैरानी होगी कि देश के अति विशिष्ठ लोग यानी वीवीआईपी (VVIP) ने  चार्टर फ्लाइट्स से सफर करने के बाद 822 करोड़ रुपये नहीं चुकाए हैं. ये खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ हैं. रिटायर्ड कोमोडोर लोकेश के बत्रा (Commodore Lokesh K. Batra (Retd.)) ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत एयर इंडिया के बकाया बिल की जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में एयर इंडिया ने बताया हैं कि 30 नवंबर 2019 तक वीवीआईपी चार्टर फ्लाइट्स का कुल 822 करोड़ रुपये बकाया है.

>> आपको बता दें कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे VVIPs के लिए एयर इंडिया चार्टर्ड एयरक्राफ्ट उपलब्ध कराता है. इसके लिए जरूरत के मुताबिक कमर्शल जेट्स को सुइट में बदला जाता है.

>> इन विमानों का किराया रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, PMO और कैबिनेट सचिवालय के कोष से चुकाया जाता है. पेंडिंग बिल्स का मुद्दा 2016 में CAG ने भी उठाया था.

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 >> सरकारी विमानन कंपनी भारी कर्ज़ के तले दबी हैं. साल 2016-17 में 48,447 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो 2017-18 में बढ़कर 55,308 करोड़ रुपये और 2018-19 में 58,255 करोड़ रुपये हो गया.






क्यों बढ़ रहा है Air India पर  कर्ज़- सरकार ने संसद में बताया हैं कि एयर इंडिया पर कर्ज में बढ़ोतरी की मुख्य वजह ऊंची ब्याज दर, सस्ती विमानन सेवा के कारण बढ़ी प्रतिस्पर्धा, रुपये में गिरावट के कारण मुद्रा विनिमय पर प्रतिकूल प्रभाव सहित विभिन्न कारणों से होने वाला नुकसान है.


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सरकार एयर इंडिया की 100% हिस्सेदारी बेच रही है. पिछले साल 76% शेयर बेचने के लिए बोलियां मंगवाई थीं, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला. इसके बाद ट्रांजेक्शन एडवाइजर ईवाय ने बोली प्रक्रिया विफल रहने के कारणों पर रिपोर्ट तैयार की थी. रिपोर्ट के आधार पर इस बार शर्तों में बदलाव किया गया है.

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First published: February 6, 2020, 3:23 PM IST
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