प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए ई-रिक्शा के बाद ई-ऑटो चलाने की तैयारी

प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए ई-रिक्शा के बाद ई-ऑटो चलाने की तैयारी
सांकेतिक तस्‍वीर.

नीति आयोग की योजना है कि टू व्‍हीलर को इलैक्ट्रिक वाहनों में रिप्‍लेस करने के साथ-साथ थ्री व्‍हीलर को भी इलैक्ट्रिक कैटेगिरी में लाया जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2018, 9:16 AM IST
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(रवि सिंह)

दिल्‍ली में शुक्रवार को होने जा रहे ग्‍लोबल मोबिलिटी समिट को लेकर गुरुवार को नीति आयोग ने इसकी रूपरेखा सामने रखी. शहरों के बढ़ते प्रदूषण को लेकर नीति आयोग की योजना है कि सबसे पहले देश में सबसे ज्‍यादा हिस्सेदारी रखने वाले टू-व्‍हीलर और उसके बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक वाहनों में रिप्‍लेस किया जाए. जिससे प्रदूषण से लेकर फ्यूल कॉस्‍ट को कम किया जा सके.

सबसे ज्यादा प्रदूषण टू-व्हीलर से
देश के बड़े शहरों में बढ़ते वाहनों के दबाव और उससे फैलते प्रदूषण को कम करने को लेकर नीति आयोग, अगले कुछ सालों में वाहनों को इलेक्‍ट्रिक वाहनों की कैटेगिरी में बदलने पर काम कर रह है. नीति आयोग की योजना है कि सबसे पहले सभी बड़े शहरों में लगभग 76 प्रतिशत शेयर रखने वाले टू-व्‍हीलर को इलेक्ट्रिक वाहनों में रिप्‍लेस किया जाए. टू-व्हीलर 64 फीसदी फ्यूल कंज्‍यूम करता है और 30 फीसदी प्रदूषण के लिए भागीदार है. थ्री-व्हीलर से पांच प्रतिशत प्रदूषण होता है. अगर नीति आयोग ऐसा करने में कामयाब होता है तो आने वाले दिनों में आपको अपनी बाइक या स्‍कूटी में पेट्रोल डीजल की नहीं बल्कि बिजली की जरूरत होगी.
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दस लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सड़कों पर
यहीं नहीं नीति आयोग की योजना है कि टू-व्‍हीलर को इलेक्ट्रिक वाहनों में रिप्‍लेस करने के साथ-साथ थ्री-व्‍हीलर को भी इलेक्ट्रिक कैटेगिरी में लाया जाए. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक आने वाले कुछ सालों में देश में पांच से लेकर 10 लाख तक इलेक्ट्रिक थ्री-व्‍हीलर सडकों पर आ जाएंगें. जिसके बाद प्रदूषण के स्‍तर में कमी आने की संभावना है.

सरकार के सामने बड़ी चुनौती
लेकिन सवाल ये है कि अगर वाहनों का इतना बड़ा वर्ग इलेक्‍ट्रॉनिक की तरफ मूव होता है तो क्‍या हमारी जनता महंगे ई-वाहनों की तरफ जाएगी. यही नहीं अगर 80 प्रतिशत वाहन इलेक्‍ट्रॉनिक होते हैं तो क्‍या भारत के पास इतनी पावर है कि वो इन वाहनों को भी बिजली दे सके और घरों को भी. ये सवाल इसलिए भी अहम हो जाता है क्‍योंकि देश के कुछ राज्‍यों को छोड़कर अभी भी घरों में बिजली की कटौती आम बात है.

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