वर्ल्ड बैंक की अर्थशास्त्री बन सकती है भारत की पहली महिला मुख्य आर्थिक सलाहकार

वर्ल्ड बैंक की अर्थशास्त्री बन सकती है भारत की पहली महिला मुख्य आर्थिक सलाहकार
वर्ल्ड बैंक में भारत की लीड इकनॉमिस्ट पूनम गुप्ता (फाइल फोटो)

वर्ल्ड बैंक (World Bank) में भारत की लीड इकनॉमिस्ट पूनम गुप्ता देश की पहली मुख्य आर्थिक सलाहकार बन सकती है. अरविंद सुब्रमण्यन का एक्सटेंशन अगस्त में खत्म हो गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 21, 2018, 1:14 PM IST
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देश को जल्द मुख्य आर्थिक सलाहकार मिल सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक में भारत की लीड इकनॉमिस्ट पूनम गुप्ता को यह पद दिया जा सकता है. अरविंद सुब्रमण्यन का एक्सटेंशन अगस्त में खत्म हो गया था. इसके बाद से यह पद खाली है. इनके अलावा उनके साथ जेपी मॉर्गन के चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट साजिद चिनॉय और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन भी मुख्य आर्थिक सलाहकार पद की रेस में शामिल हैं.

अंग्रेजी के बिज़नेस न्यूज पेपर इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, भारत की लीड इकनॉमिस्ट पूनम गुप्ता मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद की रेस में सबसे आगे है. (ये भी पढ़ें-Ease of Doing Rating: भारत की रेटिंग में जबरदस्त उछाल, 100 नंबर से चढ़कर अब 77वें पायदान पर)

कौन है पूनम गुप्ता- वर्ल्ड बैंक में भारत की ओर से इकनॉमिस्ट नियुक्त है. वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया चेयर प्रोफेसर थीं. इसके अलावा वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर रही है. उन्होंने IMF में इकोनॉमिस्ट के तौर पर काम भी किया है. वह इंटरनेशनल इकोनॉमी में पीएचडी है.(ये भी पढ़ें-दुनियाभर में खुले नए बैंक खातों में 55 प्रतिशत भारत के)



नियुक्त हुई कमेटी- सरकार ने उनका उत्तराधिकारी ढूंढने के लिए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में एक सर्च कमेटी बनाई है. अरविंद से पहले रघुराम राजन मुख्य आर्थिक सलाहकार थे. इन दोनों के पास इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक में काम करने का तजुर्बा था. उनके पास शानदार एकेडमिक बैकग्राउंड था.(ये भी पढ़ें-11 सरकारी कंपनियों में पैसा बनाने का मौका! सरकार दे रही बड़ा डिस्काउंट)



क्या करता है मुख्य आर्थिक सलाहकार-एक्सपर्ट्स के मुताबिकये बात कम लोग जानते हैं कि CEA दरअसल वित्त मंत्रालय का मुख्य आर्थिक सलाहकार होता है, भारत सरकार का नहीं. आर्थिक सलाहकार तो हर मंत्रालय में होते हैं, जो इंडियन इकनॉमिक सर्विस से आते हैं. उनका चयन यूपीएससी के जरिये ही होता है. 2009 तक मुख्य आर्थिक सलाहकार का ओहदा भी यूपीएसएसी से आए अफसरों से ही भरा जाता था.(ये भी पढ़ें-सरकारी बैंकों को दिसंबर में मिलेंगे 45-50 हजार करोड़ रुपये, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर)

वित्त मंत्रालय के अफसर तो यही मानते हैं कि सीईए का काम सिर्फ आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करना है. ये बात सच है कि आर्थिक सर्वेक्षण, आंकड़ों और उनके विश्लेषण के संग्रह और नए-नए क्रांतिकारी सुझावों को पेश करने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर उभरा है.

सबसे पहले 1984 से 1989 के दौरान बिमल जालान ने और फिर 1992 से 1994 के दौरान अशोक देसाई ने आर्थिक सर्वेक्षण के स्तर में काफी सुधार किया, जिससे ये पहले से ज्यादा पढ़ने लायक बना है. लेकिन आंकड़ों का संग्रह तैयार करना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान है, जिसे बड़ी आसानी से बजट दस्तावेज में शामिल किया जा सकता है, या सांख्यिकी मंत्रालय के हवाले किया जा सकता है.(ये भी पढ़ें-एक ही कार्ड में पाएं डेबिट और क्रेडिट की सुविधा, मिल रहा है 24 लाख का मुफ्त इंश्योरेंस)
First published: November 21, 2018, 11:53 AM IST
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