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High Risk High Gain: निवेश में रिस्क है तो रिटर्न भी, पोर्टफोलियो में बनाएं जोखिम प्रबंधन

High Risk High Gain: निवेश में रिस्क है तो रिटर्न भी, पोर्टफोलियो में बनाएं जोखिम प्रबंधन

स्मार्ट निवेशक वही है जो रिस्क को कम करते हुए अपने रिटर्न को हाई (High Risk High Reward) बनाए रखे. और यह काम पोर्टफोलियो के सही प्रबंधन से किया जा सकता है.

स्मार्ट निवेशक वही है जो रिस्क को कम करते हुए अपने रिटर्न को हाई (High Risk High Reward) बनाए रखे. और यह काम पोर्टफोलियो के सही प्रबंधन से किया जा सकता है.

जोखिम और निवेश एकदूसरे के पूरक हैं. रिस्क आपके पहले निवेश के साथ शुरू होता है जब तक निवेश चलता है, रिस्क भी साथ में बना रहता है. पोर्टफोलियो में सम्पत्तियों का बंटवारा आपकी जोखिम उठाने की क्षमता के बारे में भी बताता है.

    Best Investment Plan: कोई भी निवेश, चाहे कितना भी स्थिर क्यों न हो, उसमें जोखिम जरूर शामिल होता है. बिना रिस्क के मुनाफा नहीं कमाया जा सकता है. बाजार में तो एक कहावत प्रचलित भी है कि हाई रिस्क-हाई गेन (High Risk High Gain), नो रिस्क-नो गेन. यानी बिना जोखिम के आप मुनाफा नहीं कमा सकते हैं.

    और यह फार्मूला बाजार ही नहीं जीवन के हर मोर्च पर काम करता है. जिन लोगों ने लीक से हटकर अपनी लाइफ में रिस्क लिए हैं उन्होंने ही कामयाबी के मुकाम को छूआ है.

    लेकिन स्मार्ट निवेशक वही है जो रिस्क को कम करते हुए अपने रिटर्न को हाई (High Risk High Reward) बनाए रखे. और यह काम पोर्टफोलियो के सही प्रबंधन से किया जा सकता है. पोर्टफोलियो में रिस्क मैनेजमेंट होना बहुत जरूरी है, इनमें जोखिम की पहचान, उसकी गणना और उसका समाधान शामिल है.

    जोखिम और निवेश एकदूसरे के पूरक हैं. रिस्क आपके पहले निवेश के साथ शुरू होता है जब तक निवेश चलता है, रिस्क भी साथ में बना रहता है. रिस्क मैनेजमेंट (risk management) से हम अपने पोर्टफोलियो में एक संतुलन बनाते हुए निवेश की उन नीतियों का इस्तेमाल करते हैं जो हमें लंबे समय के निवेश पर अच्छा मुनाफा दिला सकें. रिस्क मैनेजमेंट हमारे अंदर निवेश का नया नजरिया भी पैदा करता है.

    पोर्टफोलियो में रिस्क मैनेजमेंट की कुछ रणनीतियां (portfolio risk management strategies) हैं जिन्हें हर निवेशक को पालन करना चाहिए-

    रिस्का का विविधीकरण (Diversification of risk)
    किसी भी पोर्टफोलियो के निर्माण में पहला कदम विविधीकरण है. यह एक निवेश रणनीति है जहां हम निवेश पूंजी को विभिन्न वर्गों जैसे स्टॉक, बॉन्ड, कमोडिटीज, ट्रेजरी बिल, सोना, नकद जमा या रियल एस्टेट के बीच बांटते हैं. संपत्ति का यह विविधीकरण जोखिम कम करने में मददगार होता है.

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    उदाहरण के लिए, किसी एक जगह अपना सारा पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग जगहों पर लगाना चाहिए. क्योंकि किसी विशेष घटना का अलग-अलग संपत्तियों पर अलग-अलग तरीकों से असर पड़ता है. विविधीकरण किसी एक परिसंपत्ति या उद्योग के लिए निवेशक के जोखिम को सीमित करता है.

    जोखिम की क्षमता के अनुसार संपत्ति का आवंटन करें
    आपके पोर्टफोलियो में हर सम्पत्ति का एक अलग भाग होता है. पोर्टफोलियो में सम्पत्तियों का बंटवारा आपकी जोखिम उठाने की क्षमता के बारे में भी बताता है.

    वैसे जोखिम उठाने की क्षमता निवेशक की जीवनशैली और उम्र पर निर्भर कर सकती है. उदाहरण के लिए, 20 वर्ष की आयु वाला व्यक्ति रिटायरमेंट की आयु के करीब पहुंचे व्यक्ति की तुलना में ज्यादा जोखिम उठा सकता है. वह अपने निवेश को लंबी अवधि के लिए निवेश करके बड़ा जोखिम उठा सकता है. आपकी जीवनशैली और आपके खर्चे जोखिम की क्षमता को भी कम कर सकते हैं.

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    उच्च जोखिम लेने की क्षमता वाले लोग तेजी से चलने वाली लेकिन जोखिम भरी संपत्ति जैसे इक्विटी में निवेश कर सकते हैं. कम जोखिम वाले लोगों को सरकारी बॉन्ड या ट्रेजरी बिल जैसे कम जोखिम वाले निवेश पर ध्यान देना चाहिए. यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि चूंकि जोखिम लेने की क्षमता उम्र और जीवन शैली से प्रभावित होती है, यह समय के साथ बदल जाएगी. इसलिए, परिसंपत्ति आवंटन को निवेशक की बदलती जीवन शैली या बढ़ती उम्र के अनुसार समायोजित किया जाना चाहिए, खासकर जब आप रिटायरमेंट के करीब हों.

    समय की सीमा से अवगत रहें
    समय सीमा वह समय है जहां तक एक निवेशक को निवेश रखना चाहिए. निवेश की समय सीमा अक्सर निवेश लक्ष्यों, जैसे रिटायरमेंट या संपत्ति खरीदने से तय होती है. इसलिए, जब तक आप अपने निवेश के उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक किसी स्टॉक या बॉन्ड को आप पकड़ कर रखते हैं. समय सीमा को आमतौर पर अल्पकालिक (5 वर्ष से कम), मध्य अवधि (5-10 वर्ष), या दीर्घकालिक (10 वर्ष से अधिक) के रूप में बांटा जाता है.

    निवेश की समय सीमा को आपकी रिस्क क्षमता से भी तय किया जा सकता है. लंबी समय सीमा हमें निवेश को बढ़ने देने का समय देती है. उदाहरण के लिए, इक्विटी बाजारों में निवेश करते समय मध्यावधि से लंबी अवधि का समय आदर्श होता है. छोटी अवधि के लिए बॉण्ड को सुरक्षित माना गया है. एक आदर्श पोर्टफोलियो में नियमित अंतराल पर नकदी प्रवाह (cash inflow) के लिए शॉर्ट टर्म, मिड टर्म या लॉन्ग टर्म प्रतिभूतियों का मिश्रण होना चाहिए. यह आपात स्थिति में और निवेश निर्णयों में लचीलापन लाने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

    लिक्विडिटी की ओर रुझान (Lean towards liquidity)
    जब हम अपना अधिकांश पैसा निवेश में लॉक कर देते हैं, तो हमें कुछ पैसा ऐसी जगह भी निवेश करना चाहिए जहां से हमें जरूरत पड़े तो तुरंत निकाल लें. और ऐसे निवेश में रिटर्न भी मिलता रहे. ऐसा निवेश हमें किसी भी इमरजेंसी का सामना करने के लिए तैयार रखता है.

    भावनात्मक फैसलों से बचें (Avoid emotional decisions)
    पोर्टफोलियो बनाने में सबसे बड़ी गलतियों में से एक भावनाओं के आधार पर निर्णय लेना है. अफवाहों से प्रभावित होना और किसी के पोर्टफोलियो में भावनात्मक रूप से निवेश करना आसान है. हालांकि, पोर्टफोलियो रिस्क मैनेजमेंट यह तय करता है कि हम किसी भी परिसंपत्ति का मूल्यांकन करते समय जोखिम की गणना जरूर करें. किसी के कहने या सहानुभूति में ना तो कभी निवेश करें ना ही निवेश से पैसा निकालें.

    पोर्टफोलियो जोखिम प्रबंधन (Portfolio risk management) यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि निवेश लंबी अवधि के विकास को दर्शाता है और बदलती जरूरतों के मुताबिक रहता है. हर कदम पर जोखिम पर सावधानीपूर्वक विचार न केवल अस्थिर बाजारों में हमारे जोखिम को कम करता है बल्कि हमें संकट में अलर्ट रहने में भी मदद करता है. यह हमें एक ऐसे पोर्टफोलियो को बनाए रखने में सक्षम बनाता है जिसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ बदलने का लचीलापन होता है. और लंबी अवधि में हमें अच्छा रिटर्न देता है.

    Tags: Investment, Investment and return, Personal finance

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