नए कृषि कानून का दिखने लगा असर, दूसरे राज्यों से धान की खरीद पर हरियाणा में बड़ा फैसला

दूसरे राज्यों के किसानों भी बेच सकेंगे हरियाणा की मंडियों में धान
दूसरे राज्यों के किसानों भी बेच सकेंगे हरियाणा की मंडियों में धान

Farm Act-2020: नए कृषि कानून के आगे बेबस हुई हरियाणा सरकार, अब हरियाणा की मंडियों में दूसरे राज्यों के किसान भी बेच सकेंगे धान, पोर्टल पर खोलना पड़ा रजिस्ट्रेशन

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 5:11 PM IST
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नई दिल्ली. नया कृषि कानून (Farm Act-2020) लागू होने के बाद किसानों को कहीं भी अपनी उपज बेचने की आजादी मिल गई है. न चाहते हुए भी इसी मजबूरी में हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने अपने राज्य से बाहर के किसानों का भी धान खरीदने की अनुमति दे दी है. यानी यानी यहांं की मंडियों मेंं अब यूपी, राजस्थान और दिल्ली के किसान भी अपनी फसल सरकारी रेट पर बेच सकते हैं. इसके लिए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन खोल दिया गया है. इसी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही हरियाणा के किसान भी अपनी फसल बेच पाते हैं.

पिछले दिनों यूपी के कुछ किसानों (Farmers)  को हरियाणा की करनाल मंडी में जाने से रोक दिया गया था. इसके बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया था कि जब मोदी जी ने किसानों को आजादी दे दी तो मनोहरलाल जी उस आजादी को छीन क्यों रहे हैं? समझा जाता है कि फजीहत से बचने के लिए हरियाणा सरकार ने यह फैसला लिया है. हरियाणा सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह यह निर्णय राज्य की विभिन्न मंडियों के आढ़तियों और प्रदेश से बाहर के किसानों की मांग के चलते लिया गया है. इससे धान खरीद (Paddy procurement)  सीजन के दौरान दूसरे राज्यों के किसानों को अपनी फसल बेचने में मदद मिलेगी.

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क्या नए कृषि कानून से बदलेगी किसानों की दशा?




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यहां कितनी होती है धान की खरीद?

हरियाणा और पंजाब में ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सबसे अधिक खरीद होती है. ऐसे में अब कम से कम यूपी के किसान यहां आसानी से अपनी उपज बेचकर चले जाएंगे. एफसीआई (FCI)  के आंकड़ों के मुताबिक धान खरीद की बात करें तो 2019-20 में यहां 64.23 लाख मिट्रिक टन की खरीद हुई. अब दूसरे राज्यों से धान आना शुरू होगा तो सरकार को पहले से अधिक खरीद करनी पड़ेगी. जिसका भार यहां के रेवून्यू पर पड़ेगा.



दूसरे राज्यों में फसल बेचने से रोके न जाएं किसान

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि ना ना करते-करते कहीं न कहीं मनोहर सरकार ने नए कृषि कानून के दबाव में यह फैसला लिया है. दूसरे राज्यों के किसानों को इससे फायदा मिलेगा. अब कहीं भी फसल बेचने का कानून बन ही गया है तो सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसानों को बार-बार किसी बॉर्डर पर नहीं रोका जाएगा. पुलिस वाले किसी किसान भाई को दूसरे राज्य में फसल ले जाने पर परेशान न करें.

ये होगा खरीद का नियम?

हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को अपने साथ इस आशय के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां लानी चाहिए कि उन्होंने मालिक या किराएदार के तौर पर अपने खेतों में धान की फसल बोई है. इससे व्यापारियों द्वारा की जाने वाली मुनाफाखोरी में कमी आएगी.

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अब किसी भी राज्य के किसान कहीं भी बेच सकेंगे अपनी उपज (File Photo)


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कितनी हुई खरीद?

हरियाणा में 26 सितंबर से खरीद जारी है. यहां की मंडियों में 6 अक्टूबर तक 17,85,582 क्विंटल धान पहुंचा है. जिसमें से 1,02,003 क्विंटल की खरीद हो गई है. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने बताया कि धान की फसल के अलावा 84,930 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है, जिसमें से 31,999 क्विंटल की खरीद हुई है. इसी तरह 1,351 क्विंटल मक्का की आवक हुई, जिसमें से 224 क्विंटल की खरीद की गई है.
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