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किसान आंदोलन के बीच आया अंडा, पोल्ट्री कारोबारियों ने सरकार से की यह मांग...

महामारियों के बीच सबसे ज़्यादा घाटा ये कारोबार
महामारियों के बीच सबसे ज़्यादा घाटा ये कारोबार

मुर्गियों के दाने की एमएसपी बढ़ जाने से यह कारोबार बंदी के कागर पर आ गया है. जिसके चलते अंडे का भी न्यूनतम मूल्य तय करने और स्कूलों में दिए जाने वाले मिड डे मील में अंडे को शामिल करने की मांग उठ रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 19, 2021, 2:22 PM IST
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नई दिल्ली. देश में रोज़ाना करीब 25 करोड़ अंडे का उत्पादन होता है. लाखों लोग पोल्ट्री कारोबार से जुड़े हुए हैं. बर्ड फ्लू और कोराना जैसे महामारियों के बीच सबसे पहले और सबसे ज़्यादा घाटा भी इसी कारोबार को होता है. लेकिन मुर्गियों के दाने की एमएसपी बढ़ जाने से यह कारोबार बंदी के कागर पर आ गया है. जिसके चलते अंडे का भी न्यूनतम मूल्य तय करने की मांग उठ रही है. किसान आंदोलन दौरान यह मांग भी मुखर होने लगी है. साथ ही स्कूलों में दिए जाने वाले मिड डे मील में भी अंडे को शामिल करने की मांग उठ रही है.

पोल्ट्री फार्म संचालक और पोल्ट्री के जानकार अनिल शाक्या बताते हैं, देशभर में करीब 40 करोड़ लेयर मुर्गियों से अंडा उत्पादन कराया जाता है, “जिनसे रोज़ाना करीब 25 करोड़ अंड़ा मिलता है. एक मुर्गी 100 से 125 ग्राम दाने के रूप में बाज़रा, सोयाबीन और मक्का खाती हैं. और बीते कुछ वक्त से केन्द्र सरकार ने तीनों की ही एमएसपी को बढ़ा दिया है. केन्द्र सरकार चाहे तो अंडे को मिड डे मील में शामिल कर के भी पोल्ट्री कारोबार को राहत दे सकती है. इससे अंडे को एक नया बाजार मिल जाएगा. नॉर्थ-ईस्ट में बच्चों को अंडा दिया जाता है.”

अंडे की एमएसपी तय हो तो बचेगा पोल्ट्री कारोबार
यूपी एग एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली का कहना है, “एमएसपी के चलते मुर्गियों की खुराक का दाना महंगा हो गया है. जिसके चलते अंडे की लागत बढ़ गई है. एक अंडे की लागत 3 रुपये से लेकर 3.5 रुपये तक आ रही है. अगर सर्दियों के 2 महीनों को छोड़ दें तो अंडा 360 रुपये से लेकर 425 रुपये तक बिकता है. गर्मियों के दौरान अंडे को कोल्ड स्टोरेज में रखना होता है उसका खर्च अलग से. पोल्ट्री को बिजली भी कॉमर्शियल रेट पर मिलती है.”



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मान्या एग ट्रेडर्स के राजेश राजपूत का कहना है, “एक पोल्ट्री फार्म 10 हज़ार मुर्गियों से लेकर 1 लाख मुर्गियों तक के होते हैं. ऐसे में अगर मुर्गी 100 ग्राम दाना भी खाती है तो 10 हज़ार मुर्गियों के लिए 1000 किलो दाना चाहिए. अब हुआ यह कि सरकार ने बाज़रा, सोयाबीन और मक्का पर एमएसपी तो बढ़ा दी, लेकिन किसान की यह फसल सरकारी केन्द्र पर कम बिकती है और अढ़ाती ज़्यादा खरीदते हैं, वो भी एमएसपी से कम रेट पर. फिर वही अढ़ाती पोल्ट्री वालों को बाज़रा, सोयाबीन और मक्का एमएसपी से भी ऊपर जाकर बेचते हैं.”
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