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देश में बंद होंगे 25 साल पुराने बिजलीघर! 37750 करोड़ की होगी बचत, घाटे में चल रहीं DISCOM को मिलेगी बड़ी राहत

पुराने बिजली संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को लगाने से बचने की वजह से 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त बचत होगी.

पुराने बिजली संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को लगाने से बचने की वजह से 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त बचत होगी.

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) ने बताया कि वित्‍त वर्ष 2018-19 के दौरान बिजली वितरण कंपनियों (Power Distribution Companies) को 61,360 करोड़ का घाटा (Loss) हुआ.

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    नई दिल्ली. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) का कहना है कि 25 साल से ज्यादा पुराने कोयला बिजलीघरों (Coal based Power Houses) को बंद करने से 37,750 करोड़ रुपये की बचत होगी. सीईईडब्ल्यू के एक अध्ययन में कहा गया है कि इससे सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों (Discom) को बड़ी राहत मिलेगा. साथ ही बताया कि डिस्‍कॉम को वित्‍त वर्ष 2018-19 के दौरान 61,360 करोड़ रुपये का घाटा (Loss) हुआ था. सीईईडब्ल्यू ने एक दूसरे अध्ययन में सुझाव दिया है कि डिस्कॉम मौजूदा प्रणाली के बजाय दक्षता के आधार पर कोयला बिजली प्रेषण को प्राथमिकता देकर सालाना 9,000 करोड़ रुपये तक बचा सकती हैं.

    कोरोना से पहले के 30 माह के प्रदर्शन पर आधारित है रिपोर्ट
    सीईईडब्‍ल्‍यू की रिपोर्ट 1.94 लाख मेगावॉट क्षमता की भारतीय कोयला संपत्ति के कोरोना महामारी से पहले के 30 महीनों के प्रदर्शन पर आधारित है. सीईईडब्ल्यू ने अध्ययन में देश के 30,000 मेगावॉट क्षमता के कोयला आधारित बिजलीघरों को तेजी से बंद करने की सिफारिश की है. प्रस्तावित संयंत्र राष्ट्रीय विद्युत योजना-2018 (NEP-2018) में परिचालन से हटाने के लिए पहचाने गए बिजलीघरों के साथ मेल खाते हैं. इसके अलावा 20,000 मेगावॉट क्षमता के संयंत्रों को भी अस्थायी तौर पर सेवा से हटाने की सिफारिश की गई है, जो एनईपी सूची में शामिल नहीं हैं. इन संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को लगाने से बचने की वजह से 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त बचत होगी.

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    संयंत्रों को बंद करने के खर्च की 6 साल में हो जाएगी भरपाई
    काउंसिल के सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस (CEF) के अलग अध्ययन में कोयला आधारित 130 संयंत्रों का परीक्षण किया गया है. इनकी क्षमता 95,000 मेगावॉट है. इसमें पाया गया कि प्राथमिकता के आधार पर 25 साल पुराने कोयला बिजलीघरों (कुल 35,000 मेगावॉट) को बंद करने से पांच साल में सालाना 7,550 करोड़ रुपये बचेंगे. यह बचत मुख्य रूप से संचालन और रखरखाव लागत के जरिये होगी. इसके अलावा बिजलीघरों की बची हुई अवधि पर गौर करें तो कुल बचत 37,750 करोड़ रुपये तक हो जाएगी. दूसरी तरफ, इन संयंत्रों को बंद करने पर 21,500 करोड़ का खर्च आएगा, जिसकी भरपाई पांच से छह साल के भीतर हो जाएगी.

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