PPF को लेकर सरकार ने बदले हैं ये नियम, नहीं जाने तो हो सकता है नुकसान

हाल ही में सरकार ने PPF से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया है.
हाल ही में सरकार ने PPF से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया है.

हाल ही में डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स (Department of Posts) ने स्मॉल सेविंग स्कीम्स के नियमों में कई तरह का बदलाव किया है. ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि इन नियमों को जानने के बाद निवेश के लिए सही कदम उठाएं ताकि आपको ​अधिक फायदा मिल सके.

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नई दिल्ली. डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स (Department of Posts) ने हाल ही में स्मॉल सेविंग स्कीम्स (Small Saving Schemes) में हुए कई बदलावों के बारे में जानकारी दी है. इन्हीं स्मॉल सेविंग स्कीम्स में से एक है पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF - Public Provident Fund), जिसके नियमों में भी कई तरह का बदलाव किया गया है. डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स द्वारा किए गए इस बदलाव का सबसे अधिक असर PPF और नेशनल सेविंग स्कीम्स (National Saving Schemes) पर पड़ने वाला है. 12 दिसंबर को गैजेट नोटिफिकेशन में इन बदलावों के बारे में जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड के नियामों में क्या बदलाव हुआ है और अगर आप भी इस स्कीम में निवेश करते हैं तो आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

1. PPF कॉन्ट्रीब्युशन नियम
PPF में जमा की जाने वाली रकम की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन PPF अकाउंट खोलने के लिए मिनिमम अमाउंट (Minimum Amount in PPF) में कुछ बदलाव किया गया है. इस बदलाव के बाद अब अगर कोई व्यक्ति अपने अकाउंट में या किसी नाबालिग बच्चे के अकाउंट में पैसे जमा करता है तो उसे ध्यान रखना होगा कि यह रकम 500 रुपये से कम नहीं होनी चाहिए और यह 50 रुपये के मल्टीपल में होनी चाहिए. एक वित्तीय वर्ष में PPF अकाउंट में अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही निवेश किया जा सकता है. इसके पहले PPF सब्सक्राइबर्स 5 रुपये के मल्टीपल में कोई भी रकम जमा कर सकते थे. PPF अकाउंट खोलने के लिए ​अब फॉर्म ए की जगह फॉर्म 1 भरना होगा.

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2. मैच्योरिटी और डिपॉजिट्स
PPF अकाउंट की मैच्योरिटी पीरियड 15 साल की होती है. इसके बाद अगर कोई इस अकाउंट को अगले 5 साल के लिए आगे बढ़ाता है तो इसके लिए उन्हें मैच्योरिटी पीरियड खत्म होने से 1 साल के अंदर ही फॉर्म 4 जमा करना होगा. पहले इसके लिए फॉर्मा एच भरना होता था.

3. विड्रॉल
इसी प्रकार अगर कोई मैच्योरिटी के बाद भी बिना कोई डिपॉजिट किए भी PPF अकाउंट को जारी रखा जा सकता है. ऐसा करने पर मैच्योरिटी के समय जो भी रकम होगी, उसपर ब्याज मिलता रहेगा. इसके ब्याज के बारे में समय-समय पर सब्सक्राइबर (PPF Subscribers) को जानकारी भी दी जाएगी. अगर बिना किसी ​डिपॉजिट के भी PPF अकाउंट को मैच्योरिटी के बाद भी जारी रखा जाता है तो सब्सक्राइबर को एक वित्तीय वर्ष में एक बार निकासी का मौका मिलेगा.

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4. PPF लोन पर ब्याज दर
PPF अकाउंट के आधार पर लोन लेने के बाद इसका प्रिंसिपल अमाउंट पे-इन-स्लिप के जरिए जमा किया जा सकता है और इसे सब्सक्राइबर के लोन अकाउंट में ही क्रेडिट किया जाएगा. जब प्रिंसिपल अमाउंट पूरी तरह से चुका दिया जाएगा, तो सब्सक्राइबर्स सालाना 1 फीसदी की दर से ब्याज के आधार पर दो महीने से कम के इन्स्टॉलमेंट में ब्याज की रकम जमा कर सकते हैं. यह भुगतान लोन भुगतान होने के अगले माह से ही शुरू हो जाएगा. अगर लोन की रकम को समय पर नहीं चुकाया जाता है तो इसके लिए पेनाल्टी के तौर पर सालाना 6 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा.

5. कैसे कैलकुलेट होगा ब्याज
पूरी महीने की रकम पर ब्याज पाने के लिए सुझाव दिया जाता है कि हर महीने की 5 तारीख से पहले ही PPF अकाउंट में डिपॉजिट कर दिया जाए. अगर आप किसी PPF इंटरेस्ट कैलकुलेटर का इस्तेमाल करते हैं तो आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि ब्याज हर महीने PPF अकाउंट में जमा सबसे कम रकम के आधार पर जोड़ा जाता है. यह रकम हर महीने की 5 तारीख से लेकर महीने के अंत में जो भी सबसे कम रकम होगी, उसी आधार पर जोड़ा जाएगा. बता दें कि हर तिमाही में सरकार PPF पर मिलने वाले ब्याज को रिवाइज करती है. ब्याज की रकम सब्सक्राइबर के खाते में हर वित्तीय वर्ष के अंत में दी जाती है.

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