किसी काे उधार देते वक्त कर ले सिर्फ ये काम, ताे कभी नहीं डूबेगा पैसा

सांकेतिक फाेटाे

सांकेतिक फाेटाे

काेई आपसे पैसा उधार मांग रहा है. यह अच्छी बात है कि आप उस पर विश्वास करके पैसा दे लेकिन यदि वाे पैसा ना लाैटाए ताे क्या? यदि आप सिर्फ एक चीज का ध्यान रखेंगे ताे खुद चलकर पैसा देने आएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 2:57 PM IST
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नई दिल्ली. पैसे के लेन देन में अक्सर ऐसा हाेता ही है कि हम जिन्हें पैसा उधार देते है वह तय समय पूरा हाेने के बाद भी पैसा नहीं वापस करता. ऐसे में कई बार याद दिलाने पर भी जब पैसा वापस नहीं हाेता या ताे रिश्ता खराब हाेना लाजमी रहता है. लेकिन उससे भी बड़ी दिक्कत यह हाेती है कि हमारी मेहनत का पैसा हमेशा के लिए डूब जाता है. यकीकन ऐसा आपके साथ भी कभी ना कभी हुआ ही हाेगा कि आपने जिसे पैसे कुछ वक्त के लिए मदद के ताैर पर दिए हाेंगे उसने वाे पैसा आज तक आपकाे नहीं लाैटाया हाेगा. और आखिरकार बाेल-बाेल कर आप खुद थक गए हाेंगे और ऐसे में शायद उम्मीद भी छाेड़ ही बैठे हाेंगे कि पैसा अब नहीं मिलेगा. क्याेंकि पैसे देते वक्त आपने ऐसा कुछ भी नहीं किया था जिसके आधार पर आप इसकी शिकायत कर पाए या सामने वाला खुद मजबूर रहे है कि तय समय में उसे पैसे वापस करना है.



हाेता यह है कि इसके लिए एक कानूनी कागज बनता है जाे छाेटे से लेकर बड़े लेनदेन भी एक लीगल दस्तावेज के ताैर पर काम आ सकता है लेकिन जानकारी के अभाव में कई लाेगाें काे इसका पता ही नहीं रहता. इसे प्रॉमिसरी नाेट (promissory note) कहते है. यह एक ऐसे दस्तावेज के ताैर पर हाेता है जिसे यदि आप पैसा देने के पहले सामने वाले से भरवा ले ताे कानूनन तौर पर पैसा वापस करने का दबाव रहता है. 



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आप खुद बना सकते है प्रॉमिसरी नाेट


प्रॉमिसरी नाेट बनाने के लिए आपकाे किसी वकील या नाेटरी करने वालाें के चक्कर नहीं काटने हाेंगे, इसे आप घर में ही बना सकते है. इसके लिए बस आपकाे एक रुपये वाले रेवेन्यू स्टाम्प की जरूरत हाेगी. जिसमें आप जिसे पैसा दे रहे है उसकी तरफ से यह लिखवाते है कि वाे यह वादा करता है कि उसने जाे आपसे पैसे लिए है उसे इस तारिख में यदि कैश देने का वादा हाे ताे उसका जिक्र और यदि चैक दे रहा हाे ताे उसका नंबर लिखना हाेता है. इसमें पैसा लेने वाले की साइन रेवेन्यू स्टाम्प के ऊपर हाेते है. दिनांक स्थान और उस व्यक्ति का पूरा पता रहता है.



एडवाेकेट विराग तिवारी ने न्यूज 18 काे बताया कि यह नाेट अनकंडीशन हाेना चाहिए जिसका मतलब है कि इसमें सीधे-सीधे लिखा जाना चाहिए कि पैसा कब वापस किया जाएगा. ऐसा ना हाे कि यह लिखा जाए कि यदि फला जगह से पैसा मिलेगा ताे दूंगा, या फिर फला व्यक्ति मुझे देगा ताे मैं वापस कर दूंगा जैसी काेई भी शर्त नहीं लिखी हाेनी चाहिए. इसे काेई कंपनी जारी नहीं कर सकती. यदि ब्याज पर पैसा लिया जा सकता है ताे वह भी साफ लिखा हाेना चाहिए. साथ यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि  बिना स्टेम्प के इसकी काेई वैल्यू नहीं है. जाे पैसा उधार दे रहा है उसकी साइन करने की जरूरी नहीं हाेती.





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बड़ा सवाल यह कि इस नाेट के बाद भी काेई आपका पैसा ना दे तब क्या ? ताे ऐसी स्थिति में आप उस व्यक्ति के खिलाफ लीगल केस कर सकते है. इसकी समय सीमा तय हाेती है तीन साल. यदि तीन साल के अंदर आप केस कर सकते है जिस तारिख काे उसने पैसा देने के कहा था और नहीं दिया. यह लिमिटेशन एक्ट के अंदर कानून के दायरे  में आता है.

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