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नरेंद्र मोदी ने लॉन्च की Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana, लाखों किसानों को होगा फायदा

पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.

पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.

नरेंद्र मोदी ने आज पीएमएमएसवाई यानी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ((PMMSY-Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) की शुरुआत की.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पीएमएमएसवाई यानी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY-Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana ) योजना को लॉन्च कर दिया है. इस कार्यक्रम से 55 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. साथ ही, देश में अब मछली क्रायोबैंक स्थापित किए जाएंगे. इनके जरिए किसान जरूरी प्रजातियों के मछली शुक्राणुओं के जरिए मत्स्य उत्पादन को बढ़ा पाएंगे. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की घोषणा बजट में की गई की थी. इसके बाद कोरोना राहत पैकेज की घोषणा करते वक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि मरीन, इनलैंड फिशरी और एक्‍वाकल्‍चर में गतिविधियों के लिए 11,000 करोड़ रुपये का फंड उपलब्‍ध कराया जाएगा.

    क्या है पीएमएमएसवाई यानी मत्स्य संपदा योजना (PMMSY-Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana )- मत्स्य पालन देश का एक उभरता हुआ क्षेत्र है. इस सेक्टर में अभी करीब 15 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है. केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 2024-25 में लगभग 55 लाख करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. मछली उत्पादन बढ़ाने और रोजगार का सृजन करने के मकसद से ही गुरुवार को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY-Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) का लॉन्च किया गया. मत्स्य पालन सचिव डॉ. राजीव रंजन के मुताबिक मछली उत्पादन को 2018-19 में 137.58 लाख टन से बढ़ाकर 2024-25 में 220 लाख टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.





    रंजन के मुताबिक 2024-25 में औसत जल कृषि उत्पादकता को 3.3 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 5.0 टन प्रति हेक्टेयर तक करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है. मत्स्य पालन निर्यात को 2024-25 तक 1 लाख करोड़ रुपये और 2028 तक 2 लाख करोड़ रुपये करने का प्लान है. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जलकृषि उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा समुद्री खाद्य निर्यातक बन गया है.

    आंकड़ों में मछली पालन-2014-15 से लेकर 2018-19 तक, मत्स्य क्षेत्र में 10.87% की वृद्धि हुई है. भारत में मछली उत्पादन में 7.53%, मत्स्य निर्यात में 9.71% वृद्धि हुई है. भारत में मछली उत्पादन की वैश्विक हिस्सेदारी 7.73% हो गई है.

    सचिव डॉ. रंजन ने बताया कि मत्स्य पालन क्षेत्र में हाल ही में कुछ नीतिगत सुधार किए गए हैं. जैसे कि मछुआरों के लिए मत्स्य पालन अवसंरचना विकास कोष का निर्माण और केसीसी सुविधा प्रदान करना. मछली पालन के लिए केसीसी (KCC facility) के जरिए 2 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. सचिव ने मत्स्य पालन में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया. जैसे कि खारे पानी की जलकृषि, समुद्री शैवाल की खेती एवं सजावटी मत्स्य पालन आदि.

    कौन उठा सकता है इस स्कीम का फायदा
    मछुआरा समुदाय के लोग : इस योजना का लाभ केवल मछुआरा समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों को मिलेगा.
    जलीय कृषि : ऐसे व्यक्ति जो कि जलीय क्षेत्रों से संबंध रखते हैं और जलीय कृषि का कार्य करते हैं या इसके लिए इच्छुक हैं, उन्हें इसके लिए पात्र माना जाएगा.
    प्राकृतिक आपदा से ग्रसित मछुआरे:  ऐसे मछुआरे जो कि किसी प्राकृतिक आपदा का बुरी तरह से सामना कर उससे ग्रसित हुए हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा.
    जलीय जीवों की खेती: ऐसे व्यक्ति या मछुआरे जो कि मछली पालन का कार्य करना तो जानते हैं पर इसी के साथ ही जलीय अन्य जीवों की खेती कर सकें उन्हें भी इस योजना में शामिल कर लाभ प्रदान किया जाएगा.
    अब इस किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसान मछली, झींगा मछलियों के पालन और कारोबार के समय आने वाली पैसों की जरूरत को पूरा कर सकते है. किसान क्रेडिट कार्ड धारक 4 फीसदी ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं.
    समय पर ऋण का भुगतान करने पर किसानों को ब्याज में अलग से छूट दी जाती है. बैंक में एक एप्लीकेशन लिखकर किसान क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं. एप्लीकेशन के साथ फोटो, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जमीन की खसरा-खतौनी की फोटो कॉपी लगानी होती है.

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