प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- फेसलेस एसेसमेंट और टैक्सपेयर चार्टर जैसे बड़े सुधार आज से लागू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister of India Narendra Modi)

ईमानदारी से टैक्‍स चुकाने वालों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) एक नया प्‍लेटफॉर्म लॉन्‍च कर दिया है. इसे 'पारदर्शी टैक्स व्यवस्था- ईमानदारों को सम्मान' नाम दिया गया है, पीएम ने नए सुधारों की घोषणा करते हुए कहा कि इससे टैक्सपेयर्स को काफी फायदा होगा.

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ईमानदारी से टैक्‍स देने वालों को पुरस्कृत करने के लिए आज डायरेक्‍ट टैक्‍स रिफॉर्म्‍स (Direct Tax Reforms) के अगले चरण की शुरूआत की.  पीएम ने बताया कि फेसलेस एसेसमेंट और टैक्सपेयर चार्टर जैसे बड़े सुधार आज से लागू हो गए है. प्रधानमंत्री ने कहा देश में चल रहा स्ट्रक्चरल रिफॉर्म का सिलसिला आज एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है. 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की इस नई व्यवस्था का आज लोकार्पण किया गया है. इस प्लेटफॉर्म में Faceless Assessment, Faceless Appeal और Taxpayers Charter जैसे बड़े रिफॉर्म्स हैं. Faceless Assessment और Taxpayers Charter आज से लागू हो गए हैं.

    बीते 6 वर्षों में हमारा फोकस रहा है, Banking the Unbanked, Securing the Unsecured
    और, Funding the Unfunded है. ईमानदार का सम्मान. देश का ईमानदार टैक्सपेयर्स राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. जब टैक्सपेयर्स का जीवन आसान बनता है, वह आगे बढ़ता है तो देश भी आगे बढ़ता है. आज से शुरू हो रही नई व्यवस्थाएं मिनिमम गर्वनेंट और मैक्सिम गर्वनेंस की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है. देशवासियों के जीवन से सरकार के दखल को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है.

    विदेशी निवेशकों का विश्वास का भारत पर बढ़ा- पीएम ने कहाविदेशी निवेशकों का विश्वास भी भारत पर बढ़ रहा है. कोरोना संकट के दौरान भी भारत में बड़े पैमाने पर FDI का आना इसका सबूत है.

    1500 से ज्यादा कानूनों को समाप्त किया गया-सोच और एप्रोच दोनों बदल गई है. हमारे लिए सुधार का मतलब है, यह नीति आधारित हो, टुकड़ों में नहीं हो और एक सुधार दूसरे का आधार बने. ऐसा नहीं है कि एक बार सुधार करके रुक गए. यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है. बीते कुछ वर्षों में देश में 1500 से ज्यादा कानूनों को समाप्त किया गया है. ईज आफ डूइंग में भारत कुछ साल पहले 134वें नंबर पर था. आज भारत की रैंकिंग 63 है. इसके पीछे सुधार है.

    लोगों पर आधारित और उनके जरूरत के हिसाब से नियम बनाए जा रहे हैं. इसके सुखद परिणाम भी देश को मिल रहे हैं. आज हर किसी को यह अहसास हुआ है कि शार्टकार्ट ठीक नहीं है. गलत तौर-तरीके अपनाना सही नहीं है. वो दौर अब पीछे चला गया है.

    अब देश में माहौल इस ओर आगे बढ़ रहा है कि कर्तव्य भाव को सर्वोपरि रखते हुए सारे काम होने चाहिए. सवाल ये है कि ये बदलाव आखिर कैसे आ रहा है. क्या ये सिर्फ सख्ती से आया है, क्या सजा देने से आया है. जी नहीं, बिल्कुल नहीं.

    मोटे तौपर कहूं तो चार बड़े कारण है. पालिसी ड्रिवन सरकार- नीति जब स्पष्ट होती है तो ग्रे एरिया कम हो जाते हैं. दूसरा, सामान्य जन की ईमानदारी पर विश्वास, तीसरा-सरकारी सिस्टम में मानव के काम को कम करके तकनीक का बड़ा इस्तेमाल और चौथा- हमारी सरकारी मशीनरी ब्यूरोक्रसी में काम करने वाले लोगों को को पुरस्कृत किया जा रहा है.

    टैक्स सुधार पर बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स मामलों को लेकर नए कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है. आयकर विभाग ने कई अहम रिफॉर्म किए है. टैक्स भुगतान प्रक्रिया सरल बनाने का काम जारी है. कोरोना महामारी को देखते हुए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय सीमा बढ़ाई गई है.

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएम का मिशन ईमानदार टैक्सपेयर्स को पुरस्कार देना है. इससे चीजों में पारदर्शिता आएंगी.आयकर विभाग और टैक्सपेयर्स में तालमेल होगा.पिछले साल कारपोरेट टैक्स 30 से 20 फीसदी किया गया. आयकर विभाग ने कई सारे टैक्स सुधार लागू किए हैं. करदाताओं को सम्मान देना पीएम की इच्छा है.



    टैक्स सुधारों को लेकर सरकार ने उठाए कई बड़े कदम-केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष करों में कई बड़े टैक्‍स सुधार लागू किए हैं. पिछले वर्ष कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया गया. साथ ही नई विनिर्माण इकाइयों के लिए इस दर को और भी अधिक घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया. 'डिविडेंड डिस्‍ट्रीब्‍यूशन टैक्‍स' को भी हटा दिया गया.

    टैक्‍स रिफॉर्म्‍स के तहत दरों (tax Rates) में कमी करने और प्रत्यक्ष कर कानूनों को आसान बनाने पर जोर रहा है. आयकर विभाग के काम में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए भी केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से कई पहल की गई हैं.

    कोविड-19 संकट के बीच उठाए गए ये कदम -करदाताओं की शिकायतों और मुकदमों में तेजी से कमी लाने के लिए विभिन्‍न अपीलीय न्यायालयों में विभागीय अपील दाखिल करने के लिए शुरुआती मौद्रिक सीमाएं भी बढ़ा दी गई हैं. डिजिटल लेनदेन (Digital Transactions) और भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक (E-Payments) तरीकों को बढ़ावा देने के लिए भी कई उपाय किए गए हैं. आयकर विभाग ने कोरोना संकट (Coronavirus Crisis) के बीच इनकम टैक्‍स रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है. वहीं, तेजी से इनकम टैक्‍स रिफंड जारी किए गए हैं.

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