प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुरू करेंगे Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana, खर्च होंगे 20000 करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुरू करेंगे Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana, खर्च होंगे 20000 करोड़ रुपये
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगाढ़ता को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है. (फाइल फोटो)

सरकार मत्स्य पालन के विकास के लिए बड़ी कवायद शुरू करने वाली है. पीएमएमएसवाई यानी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY-Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana ) के तहत इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की घोषणा बजट में की गई की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 8:25 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को प्रधानमंत्री पीएमएमएसवाई यानी मत्स्य संपदा योजना ((PMMSY-Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana ) योजना को लॉन्च करेंगे. इस कार्यक्रम से 55 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.साथ ही, देश में अब मछली क्रायोबैंक स्थापित किए जाएंगे. इनके जरिए किसान जरूरी प्रजातियों के मछली शुक्राणुओं के जरिए मत्सय उत्पादन को बढ़ा पाएंगे.

क्या है पीएम मत्स्य संपदा योजना- इस योजना के तहत इससे पांच सालों में अतिरिक्‍त 70 लाख टन मछली का उत्‍पादन हो सकेगा. यह मत्‍स्‍य एक्सपोर्ट को दोगुना बढ़ाकर 1,00,000 करोड़ रुपये कर देगी.

राहत पैकेज की घोषणा करते वक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि मरीन, इनलैंड फिशरी और एक्‍वाकल्‍चर में गतिविधियों के लिए 11,000 करोड़ रुपये का फंड उपलब्‍ध कराया जाएगा.




इसके अलावा फिशिंग हार्बर, कोल्‍ड चेन और मार्केट वगैरह जैसे इंफास्‍ट्रक्‍चर को बनाने में 9,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. केज कल्‍चर, सीवीड फार्मिंग, ऑर्नामेंटल फिशरीज के साथ न्‍यू फिशिंग वेसेल, लेबोरेटरी नेटवर्क जैसी गतिविधियां इस स्‍कीम का हिस्‍सा होंगी.

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मछलीपालन से जुड़े लोगों के लिए जरूरी खबर (प्रतीकात्मक तस्वीर)


देश में बनेगा क्रायोबैंक (What is Cryobanks)-गिरिराज सिंह ने  एनएफएफजीआर (नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज) के सहयोग से एनएफडीबी (नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड) देश के विभिन्न हिस्सों में मछली क्रायोबैंक स्थापित करने के लिए काम करेगा. यह दुनिया में पहली बार होगा जब मछली क्रायोबैंक की स्थापना की जाएगी, जो मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए देश में मत्स्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है और जिससे मछली किसानों के बीच समृद्धि बढ़ सकती है..

कौन उठा सकता है इस स्कीम का फायदा
मछुआरा समुदाय के लोग :  इस योजना का लाभ केवल मछुआरा समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों को मिलेगा.
जलीय कृषि : ऐसे व्यक्ति जो कि जलीय क्षेत्रों से संबंध रखते हैं और जलीय कृषि का कार्य करते हैं या इसके लिए इच्छुक हैं, उन्हें इसके लिए पात्र माना जाएगा.
प्राकृतिक आपदा से ग्रसित मछुआरे:  ऐसे मछुआरे जो कि किसी प्राकृतिक आपदा का बुरी तरह से सामना कर उससे ग्रसित हुए हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा.
जलीय जीवों की खेती: ऐसे व्यक्ति या मछुआरे जो कि मछली पालन का कार्य करना तो जानते हैं पर इसी के साथ ही जलीय अन्य जीवों की खेती कर सकें उन्हें भी इस योजना में शामिल कर लाभ प्रदान किया जाएगा.
मछली पालने वाले किसानों को भी आसानी से से मिलेगा 3 लाख रुपये का लोन-  मछलीपालन (Fish farming) को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने के पीछे सरकार का मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग खेती-बाड़ी से इतर गतिविधियों से जुड़ें और अपनी आमदनी में इजाफा कर सकें.
अब इस किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसान मछली, झींगा मछलियों के पालन और कारोबार के समय आने वाली पैसों की जरूरत को पूरा कर सकते है.किसान क्रेडिट कार्ड धारक 4 फीसदी ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं.
समय पर ऋण का भुगतान करने पर किसानों को ब्याज में अलग से छूट दी जाती है.बैंक में एक एप्लीकेशन लिखकर किसान क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं. एप्लीकेशन के साथ फोटो, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जमीन की खसरा-खतौनी की फोटो कॉपी लगानी होती है.
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