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दूध की क्वालिटी कंट्रोल पर सख्त हुई सरकार! 1 जनवरी से पैकेट बंद दूध की होगी जांच

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Updated: October 18, 2019, 6:26 PM IST
दूध की क्वालिटी कंट्रोल पर सख्त हुई सरकार! 1 जनवरी से पैकेट बंद दूध की होगी जांच
1 जनवरी 2020 से लागू होगा नया नियम

1 जनवरी 2020 से संगठित क्षेत्र की दूध कंपनियां जैसे मदर डेरी (Mother Dairy), अमूल (AMUL), पारस (Paras) को भी अपने दूध के सैंपल (Milk Sample) की जांच फूड सेफ्टी एंड स्टैंडडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की लैब में करानी होगी.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 6:26 PM IST
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नई दिल्ली. दूध की शुद्धता (Milk Quality) को बरकरार रखने और उसकी गुणवत्ता और बेहतर करने लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने नए नियम लागू करने का ऐलान किया है. 1 जनवरी 2020 से संगठित क्षेत्र की कंपनियां जैसे मदर डेरी (Mother Dairy), अमूल (AMUL), पारस (Paras) को भी अपने दूध के सैंपल (Milk Sample) की जांच FSSAI की लैब में कराना होगी. इससे पहले देश की बड़ी कंपनियों के रॉ और प्रोसेस्ड दूध में मिलावट सामने आई है. फूड रेगुलेटर FSSAI की एक स्टडी में सामने आया है कि कई बड़े ब्रांड दूध की निर्धारित क्वालिटी और स्टैंडर्ड्स पर फेल हो गए है. आपको बता दें कि दूध की शुद्धता को लेकर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अपनी सर्वे रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, 41 फीसदी प्रोसेस्ड और कच्चा दूध गुणवत्तापूर्ण के पैमाने में कम है. वहीं, 41 फीसदी दूध में फैट और एसएनएफ यानी सोलिडस नॉट फैट का मात्रा भी तय मानकों से कम पाई गई है.

41 फीसदी दूध की गुणवत्ता पैमाने से कम- CNBC आवाज़ के संवाददाता रोहन सिंह ने Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के सीईओ पवन अग्रवाल के साथ खास बातचीत की. पवन अग्रवाल का कहना है कि 41 फीसदी प्रोसेस्ड और कच्चा दूध गुणवत्तापूर्ण के पैमाने में कम है. 41 फ़ीसदी दूध में फैट और एसएनएफ यानी सोलिडस नॉट फैट का मात्रा कम पाया गया. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता है. इसके दो कारण हो सकते है कि या तो गाय को प्रॉपर खाना नहीं मिल पा रहा है या दूध में पानी मिलाकर बेचा जाता है.

पवन अग्रवाल कहते हैं कि खोया,पनीर और घी में मिलावटी को लेकर शिकायतें मिली है.राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस पर काम कर रहे है.दिल्ली में इन उत्पादों पर सर्विलेंस करवा रहे है इसका नतीजा नवंबर के पहले सप्ताह में आ जायेगा. उसके बाद ऐसा प्रैक्टिस देश भर में करेंगे.

पवन अग्रवाल का कहना है कि कच्चे दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा(क्वालिटी और सेफ्टी) के लिए पंजाब फार्मर आर्गेनाइजेशन के साथ एक मॉडल पर काम कर रहे है.

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FSSAI के सीईओ पवन अग्रवाल


दूध पर जारी हुआ FSSAI का नया सर्वे- सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 93 फीसदी दूध शुद्ध और सुरक्षित है. बाकी 7% में contaminants और मिलावट है. 5.7 फीसदी सैंपल में अफ़लटॉक्सिन एम 1 तय सीमा से ज्यादा है. 1.2 फीसदी सैंपल में एंटी-बायोटिक्स तय सीमा से ज्यादा है. कुल 6432 सैंपल में से सिर्फ 12(0.18%) में यूरिया, डिटरजेंट और हाईड्रोजन पेरॉक्साईड जैसी मिलावट जो सेहत के लिए खतरनाक है. वहीं, 6432 सैंपल में से 156 में maltodextrin और 78 में शुगर पाया गया है.
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>> देशभर में मई 2018 से अक्टूबर 2018 के बीच सैंपल कलेक्ट किया गया.50 हज़ार से अधिक जनसंख्या वाले 1103 शहरों से 6432 दूध सैम्पल्स कलेक्ट किया गया.

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प्रोसेस्ड दूध की क्वालिटी चिंता की वजह- आम तौर पर हम मानते हैं कि पैकेज्ड दूध की क्वालिटी अच्छी होगी लेकिन सर्वे में पाया गया कि पैकेज्ड मिल्क के भी 37.7% सैंपल क्वालिटी स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं है. यानी उसमें फैट और SNF की मात्रा कम. हालांकि इसका ये मतलब नहीं है कि दूध असुरक्षित है.

क्वालिटी की जांच ( Fat, SNF,etc)
>> कुल मिलाकर 41% दूध स्टैंडर्ड को पूरा नहीं कर रहे हैं.
>> खुले दूध का 47% स्टैंडर्ड को पूरा नहीं कर रहे हैं.
>> पैकेज्ड मिल्क के भी 37.7% सैंपल क्वालिटी स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं है. इसके दो कारण हो सकते है कि या तो गाय को प्रॉपर खाना नहीं मिल पा रहा है या दूध में पानी मिलाकर बेचा जाता है.

>> अफ़लटॉक्सिन एम 1 के मामले में प्रोसेस्ड मिल्क ज्यादा खतरनाक है. 8.7% प्रोसेस्ड दूध में है.
>> अफ़लटॉक्सिन एम 1 पाया गया जबकि खुले दूध में सिर्फ 3.7% .
>> अफ़लटॉक्सिन एम 1 दूध में फोडर और फीड के जरिये जाता है.

(रोहन सिंह, संवाददाता, CNBC आवाज़)

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First published: October 18, 2019, 12:48 PM IST
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