ये सरकारी कंपनी भारत में ला रही है 800 किमी प्रति घंटा रफ्तार वाली ट्रेन, पटरी पर नहीं दौड़ती मैग्‍लेव ट्रेन

ये सरकारी कंपनी भारत में ला रही है 800 किमी प्रति घंटा रफ्तार वाली ट्रेन, पटरी पर नहीं दौड़ती मैग्‍लेव ट्रेन
भारत में जल्‍द ही अल्‍ट्रा-हाईस्‍पीड ट्रेन मैग्‍लेव आ सकती है. अभी ये ट्रेन सिर्फ चीन और जापान में चलती है.

सार्वजनिक क्षेत्र की भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने मैग्‍लेव ट्रेन को भारत लाने के लिए SwissRapide AG के साथ समझौता कर लिया है. इस ट्रेन का मॉडल मध्य प्रदेश के इंदौर में राजा रामन्‍ना प्रगत प्रौद्योगिक केंद्र (RRCAT) ने फरवरी 2019 में तैयार किया था.

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  • Last Updated: September 17, 2020, 6:07 AM IST
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नई दिल्‍ली. सार्वजनिक क्षेत्र भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने मैग्‍लेव ट्रेन को भारत लाने के लिए SwissRapide AG के साथ गठजोड़ किया है. मैग्‍लेव ट्रेन का मॉडल मध्य प्रदेश के इंदौर में राजा रामन्‍ना प्रगत प्रौद्योगिक केंद्र (RRCAT) ने फरवरी 2019 में तैयार किया था. केंद्र के के वैज्ञानिक आरएन शिंदे ने 50 लोगों की टीम के साथ मैग्‍लेव ट्रेल (Maglev Train) के मॉडल को 10 साल की कड़ी मेहनत से तैयार किया था. इसमें ट्रेन मैग्‍नेटिक फील्ड की सतह पर चलती दिखी. बताया जा रहा है कि ये ट्रेन 800 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकती है. फिलहाल ये ट्रेन जापान और चीन में ही चलती हैं.

मैग्‍नेटिक फील्‍ड की मदद से पटरी के बजाय हवा में दौड़ती है ये ट्रेन
भेल ने कहा कि शहरी परिवहन में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए उसनने SwissRapide AG के साथ समझौता किया है. इसके तहत कंपनी मैग्‍लेव ट्रेन को भारत लाएगी. ये ट्रेन पटरी पर दौड़ने के बजाय हवा में रहती है. इसके लिए ट्रेन को मैग्‍नेटिक फील्‍ड की मदद से नियंत्रित किया जाता है. इसलिए उसका पटरी से कोई सीधा संपर्क नहीं होता. ये ट्रेन को 500-800 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक दौड़ सकती है. भेल ने कहा कि यह समझौता पीएम नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को ध्यान में रखकर किया गया है.

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पांच दशक से भारतीय रेलवे की भरोसेमंद साझेदार है भेल


SwissRapide AG के साथ किया गया यह समझौता इंटरनेशनल टेक्‍नोलॉजी को भारत लाने और उसका निर्माण करने में भेल को सक्षम बनाएगा. SwissRapide AG को मैग्‍लेव प्रॉजेक्ट्स व टेक्नोलॉजीज प्रमोशन, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, प्लानिंग, डिजाइन, इंप्लीमेंटेशन और कमीशनिंग में विशेषज्ञता है. कंपनी अल्ट्रा हाई स्पीड मग्‍लेव रेल सिस्टम 'ट्रान्सरैपिड मैग्‍लेव' टेक्नोलॉजी की पेशकश में अलग ही पहचान रखती है. वहीं, भेल नई टेक्नोलॉजी में सबसे आगे है. ये सरकारी कंपनी पिछले पांच दशक से भारतीय रेलवे के विकास में भरोसेमंद साझेदार है. भेल रेलवे को इलेक्ट्रिक व डीजल लोकोमोटिव्स, इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट और प्रपल्शन सिस्टम सेट्स की आपूर्ति करती है.

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चीन-जापान को छोड़ अमेरिका के पास भी नहीं ये तकनीक
आरआरसीएटी ने जब मैग्‍लेव ट्रेन का मॉडल बनाया था तब माना जा रहा था कि भारत उस टेक्‍नोलॉजी के बहुत करीब है जो अमेरिका के पास भी नहीं है. अभी ये टेक्‍नोलॉजी सिर्फ चीन और जापान के पास है. बता दें कि भारत में हाईस्पीड ट्रेन को लेकर आकर्षण काफी बढ़ रहा है. भारत में सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस शुरू हो चुकी है. यह ट्रेन 8 घंटे में नई दिल्ली से वाराणसी तक का सफर तय करती है. वहीं, मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम चल रहा है. इससे 508 किलोमीटर की दूरी सिर्फ दो घंटे सात मिनट में तय हो जाएगी.
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