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अब असली-नकली दवाओं की पहचान होगी आसान, API पर QR कोड लगाना होगा अनिवार्य

8 सितंबर से दवाओं में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (Active Pharmaceutical Ingredients) पर QR कोड लगाना अनिवार्य होगा.

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    केंद्र सरकार (Central government) ने दवाओं में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (Active Pharmaceutical Ingredients) पर क्यूआर (QR) कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है. अब 8 सितंबर से API में QR कोड लगाना अनिवार्य होगा. API में QR कोड लगाने से असली और नकली दवाओं की पहचान में आसानी होगी. साथ ही, इससे दवा बनाने वाली कंपनी को ट्रैक करना आसान होगा.

    क्या होता है एपीआई?
    API यानी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स. ये इंटरमीडिएट्स, टेबलेट्स, कैप्सूल्स और सिरप बनाने के मुख्य रॉ मैटेरियल्स होते हैं. किसी भी दवाई के बनने में एपीआई की मुख्य भूमिका होती है और इसी API के लिए अब भारतीय कंपनियां बहुत हद तक चीन पर निर्भर हैं.

    सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन
    इस पर केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया है. QR कोड में निर्माता और बैच नंबर की जानकारी होगी. एक्सपायरी और इंपोर्टर की भी जानकारी होगी. भारत हर साल 13,000 करोड़ रुपये का API आयात करता है.

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    नकली API से बनी दवाओं से मरीजों को फायदा नहीं होता. DTAB यानी ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने जून में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बनी 20 फीसदी दवाएं नकली होती हैं. एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 3 फीसदी दवाओं की क्वालिटी घटिया होती है.

    सरकार ने पकड़ी थी दवा में बड़ी धांधली
    बता दें कि केंद्र सरकार ने दवाओं के लिए आयात हो रहे कच्चे माल यानी API में बड़ी धांधली पकड़ी थी. खासकर चीन से बिना रोकटोक घटिया गुणवत्ता, प्रतिबंधित और मिलावटी श्रेणी का API आयात हो रहा है. इंपोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर न सिर्फ बगैर मंजूरी नई दवाइयां लॉन्च कर दी जा रही हैं बल्कि घटिया कच्चे माल की वजह से कई दवाओं का मरीजों पर सही प्रभाव भी नहीं पड़ रहा है. चीन से भारत 72 फीसदी एपीआई इम्पोर्ट करता है. प्रतिबंधित एपीआई भी भारत में पहुंच रहा है. एपीआई बिना लाइसेंस इंपोर्ट हो रहा है.

    (असीम मनचंदा, संवाददाता- CNBC आवाज़)

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