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राफेल डील पर कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक झूठ बोला: वित्त मंत्री

News18Hindi
Updated: January 17, 2019, 4:18 PM IST
राफेल डील पर कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक झूठ बोला: वित्त मंत्री
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों का नाम लिए बगैर एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक झूठ बोला है. साथ ही, सरकार की छवि पर चोट पहुंचाने वाला दुष्प्रचार किया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों का नाम लिए बगैर एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक झूठ बोला है. साथ ही, सरकार की छवि पर चोट पहुंचाने वाला दुष्प्रचार किया है.

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  • Last Updated: January 17, 2019, 4:18 PM IST
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी दलों का नाम लिए बगैर एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि सकारात्मक मानसिकता वाले लोगों और राष्ट्रीय शक्ति से राष्ट्र का निर्माण होता है ना कि ‘बात बात पर विरोध करने वालों से होता है. उन्होंने राफेल मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक झूठ बोला और सरकार की छवि पर चोट पहुंचाने वाला दुष्प्रचार किया है. उन्होंने कहा कि संसद में वो डिबेट में हारे लेकिन इसके बाद भी उनका झूठ फैलाना जारी है. आपको बता दें कि अरुण जेटली चिकित्सा जांच के लिए अमेरिका में हैं.

जेटली ने ब्लॉग में लिखा है कि लगातार आलोचना करने वाले ये लोग सरकार के हर उस प्रस्ताव में कमियां ढूंढते रहते हैं, जो लोगों के विकास के लिए हैं। चाहे फिर बात 10 फीसदी आरक्षण की हो, आधार, नोटबंदी, जीएसटी, आरबीआई और सरकार के रिश्ते, सीबीआई विवाद, राफेल फाइटर विमान, बिना किसी मुद्दे के सुप्रीम कोर्ट हो या फिर जज लोया केस हो.

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जेटली ने इस पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि संसद से सड़क तक कांग्रेस ने झूठा और सरकार की छवि पर चोट पहुंचाने वाला दुष्प्रचार किया. जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौदे में देश के हजारों करोड़ रुपये बचान का श्रेय दिया जाना चाहिए. वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर "एक दशक से अधिक के लिए सौदे में देरी" और सार्वजनिक क्षेत्र में "लड़ाकू और मनगढ़ंत आंकड़े" बोलने के साथ लड़ाकू विमान की खरीद मूल्य के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया.

क्या है राफेल-साल 2000 में वायुसेना ने मिग-21की जगह मिराज-2000 विमानों की जरूरत महसूस हुई. वायुसेना ने 126 मध्यम बहु भूमिका वाले युद्धक विमान(MMRCA)खरीदने का मूड बना लिया. सात साल बाद वर्ष 2007 में विमानों की खरीद के लिए प्रस्ताव अनुरोध जिसे अंग्रेजी में रिक्वेस्ट फार प्रपोजल(आरएफपी) कहते हैं, जारी की गई. कुल छह विक्रेता(वेंडर्स) ने टेंडर भरे. फील्ड मूल्यांकन परीक्षण के पूरा होने पर छह में से दो फर्म के विमानों को ही योग्य पाया गया. इन दो विक्रेताओं के नाम रहे दसॉल्ट एविएशन(फ्रांस) और ईएडीएस(जर्मनी). इन्हीं दोनों कंपनियों के प्रस्ताव खोले गए. चूंकि दसॉल्ट की कीमत कम थी, इस नाते दसॉल्ट एविएशन के साथ एल 1 विक्रेता के रूप में नवंबर, 2011 में पहली बार डील को लेकर बातचीत शुरू हुई.

राफेल डील- 26, मई 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद राफेल की फाइल पर नई सरकार ने काम करना शुरू किया. इस बीच अप्रैल, 2015 में पीएम मोदी फ्रांस के दौरे पर गए. इस दौरान दोनों देशों ने राफेल सौदे पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया .

जिसके बाद राफेल डील का प्रारूप तय करने के लिए वार्ता दल गठित हुआ. वार्ता दल की रिपोर्ट के आधार पर डील फाइनल हुई. आखिरकार, तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर(अब गोवा के सीएम) के कार्यकाल में 23 सितंबर 2016 को राफेल की खरीद के लिए फ्रांस के साथ अंतर सरकारी करार यानी इंटर गवर्नमेंटल एग्रीमेंट(IGA)किया गया.
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डील से पहले 126 मध्यम बहु भूमिका वाले युद्धक विमान(MMRCA)के लिए प्रस्ताव वाले अनुरोध(आरएफपी) को 24 जून, 2015 में मोदी सरकार ने वापस ले लिया था. यह आरएफपी यूपीए के दौरान हुई थी. सरकार का कहना है कि कांट्रैक्ट को लेकर दसॉल्ट से जारी वार्ता में गतिरोध पैदा होने के कारण 126 की जगह 36 राफेल विमानों की डील हुई. निर्मला ने कहा कि इतने बड़े आर्डर के लिए इतनी लागत ही प्रभावी थी.

 

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First published: January 17, 2019, 4:18 PM IST
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