रघुराम राजन बोले- PMO में दी थी हाई-प्रोफाइल धोखेबाजों की लिस्ट, आगे क्या हुआ नहीं पता

संसदीय समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को भेजे गए जवाब में राजन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी का आकार बढ़ रहा है, हालांकि एनपीए की कुल मात्रा के मुकाबले इसका आकार छोटा है.

News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 10:21 PM IST
रघुराम राजन बोले- PMO में दी थी हाई-प्रोफाइल धोखेबाजों की लिस्ट, आगे क्या हुआ नहीं पता
रघुराम राजन (File Photo)
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Updated: September 11, 2018, 10:21 PM IST
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक नोट के जरिए संसदीय पैनल से कहा कि बैंकिंग धोखाधड़ी से संबंधित हाई-प्रोफाइल मामलों की एक लिस्ट कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) को भेजी गई थी. लेकिन, इस लिस्ट पर आगे कुछ कार्रवाई हुई या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता में संसदीय समिति को भेजे गए जवाब में राजन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी का आकार बढ़ रहा है, हालांकि एनपीए की कुल मात्रा के मुकाबले इसका आकार छोटा है.

राजन ने कहा, 'जब मैं जांच एजेंसियों के लिए धोखाधड़ी के मामलों की शुरुआती रिपोर्टिंग के लिए गवर्नर था, तब आरबीआई ने धोखाधड़ी कंट्रोल रूम बनाया था. मैंने पीएमओ को हाई-प्रोफाइल मामलों की एक लिस्ट भी भेजी कि हम कम से कम एक या दो के खिलाफ समन्वयित कार्रवाई करें. मुझे नहीं पता कि इस मामले में आगे क्या हुआ. यह ऐसा मामला था जिसपर तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी.'


बता दें कि सितंबर 2016 तक तीन साल आरबीआई गवर्नर रहने वाले रघुराम राजन वर्तमान में शिकागो यूनिवर्सिटी में इकॉनोमिक्स के प्रोफेसर हैं.

राजन ने कहा कि सिस्टम हाई-प्रोफाइल धोखेबाजों को पकड़ने में नाकाम रहा है. उन्होंने कहा धोखेबाजी एनपीए से अलग है. राजन ने कहा, 'एक के बाद एक फ्रॉड होते हैं तो जांच एजेंसियां बैंकों को दोषी ठहराती हैं, इसके बाद बैंक कर्ज देना कम कर देते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि अगर एक बार लेन-देन के लिए धोखाधड़ी का लेबल लगा, तो जांच एजेंसियों दोषियों को पकड़े बना उनका उत्पीड़न करने लगेंगी.'

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी केस को लेकर राजन का यह बयान महत्वपूर्ण है, दोनों पर पीएनबी से 14 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप हैं.


क्या आरबीआई बेहतर कर सकता था इस पर राजन ने कहा कि आत्म-मूल्यांकन करना मुश्किल है लेकिन बैंकों द्वारा ऋण देने के शुरुआती दिनों में आरबीआई को अधिक सवाल करने चाहिए थे. अंत में उन्होंने कहा कि आरबीआई गैर अनुपालन बैंकों पर दंड लागू करने में अधिक निर्णायक हो सकता था.

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