जानेमाने बिजनेसमैन राहुल बजाज ने एक और बजाज ग्रुप की कंपनी के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा

जानेमाने बिजनेसमैन राहुल बजाज ने एक और बजाज ग्रुप की कंपनी के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा
राहुल बजाज

राहुल बजाज (Rahul Bajaj) ने बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. संजीव बजाज अब चेयरमैन पद पर नियुक्त हुए है. 1 अगस्त से कार्यभार संभालेंगे

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मुंबई. देश के जाने-माने बिजनेसमैन और लंबे समय तक बजाज समूह के चेयरमैन रहे राहुल बजाज (Rahul Bajaj) के रोल में एक और बदलाव हुआ है. राहुल बजाज ने बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. संजीव बजाज (Sanjeev Bajaj) अब चेयरमैन पद पर नियुक्त हुए है.  1 अगस्त से वह कार्यभार संभालेंगे.आपको बता दें कि राहुल बजाज को इससे पहले बजाज ऑटो के बोर्ड में नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद दिया गया है.  31 मार्च 2020 को उनका कार्यकाल खत्म हो गया था. 1 अप्रैल 2020 से  राहुल बजाज कंपनी में नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन (non-executive Chairman of Bajaj Auto) की भूमिका में है.

आपको बता दें कि साल 1972 में बजाज ऑटो ने देश में अपने चेतक स्कूटर को लांच किया. इस स्कूटर ने बाजार में आते ही धूम मचा दी थी और देश के युवाओं की पहली पसंद बन चुकी थी. आपको ये जानकार हैरानी होगी कि उस दौर में इस स्कूटर का वेटिंग परियड 4 से 5 साल का था. वहीं, कंपनी ने बीते हफ्ते चेतक को इलेक्ट्रिक वर्जन के साथ फिर से री-लॉन्च किया है.


राहुल बजाज के बारे में जानिए-  राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को एक मारवाड़ी परिवार में बंगाल प्रेसिडेंसी (आजादी से पहले का पश्चिम बंगाल) में हुआ था. राहुल बजाज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाजसेवी जमनालाल बजाज के पोते हैं. बचपन से ही व्यवसायिक परिवार से ताल्लूक रखने वाले राहुल बजाज के रगो में भी बिजनेस ही दौड़ता था.



दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफ़न कॉलेज से इकोनॉमिक ऑनर्स करने के बाद राहुल बजाज ने तीन साल तक बजाज इलेक्ट्रिकल्स कंपनी में ट्रेनिंग की. इसी दौरान उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से वक़ालत की पढ़ाई भी की हैं. राहुल बजाज ने 60 के दशक में अमेरिका के हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल से एमबीए की डिग्री ली थी.

पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1968 में 30 वर्ष की उम्र में जब राहुल बजाज ने 'बजाज ऑटो लिमिटेड' के सीईओ का पद संभाला तो कहा गया कि ये मुकाम हासिल करने वाले वो सबसे युवा भारतीय हैं. जब राहुल बजाज के हाथों में कंपनी की कमान आई तब देश में 'लाइसेंस राज' था यानी देश में ऐसी नीतियां लागू थीं जिनके अनुसार बिना सरकार की मर्ज़ी के उद्योगपति कुछ नहीं कर सकते थे.

बजाज चेतक स्कूटर


ये व्यापारियों के लिए मुश्किल परिस्थिति थी. उत्पादन की सीमाएं तय थीं. उद्योगपति चाहकर भी मांग के अनुसार पूर्ति नहीं कर सकते थे. उस दौर में ऐसी कहानियां चलती थीं कि किसी ने स्कूटर बुक करवाया तो डिलीवरी कई साल बाद मिली.

जिन परिस्थितियों में अन्य निर्माताओं के लिए काम करना मुश्किल था, उन्हीं परिस्थितियों में बजाज ने कथित तौर पर निरंकुश तरीक़े से उत्पादन किया और ख़ुद को देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बनाने में सफलता हासिल की. बजाज 1965 में तीन करोड़ के टर्नओवर से 2008 में करीब दस हज़ार करोड़ के टर्नओवर तक पहुंच गई.
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