लाइव टीवी

इन दोस्तों ने IndiGo को बनाया नंबर वन, 15 साल बाद इस बात पर छिड़ी जंग

News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 1:02 PM IST
इन दोस्तों ने IndiGo को बनाया नंबर वन, 15 साल बाद इस बात पर छिड़ी जंग
दो दोस्तों ने IndiGo को बनाया नंबर 1, अब इस बात पर छिड़ी जंग

लो कॉस्ट एयरलाइन इंडिगो (Indigo) में मतभेद गहरा गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.

  • Share this:
देश के एविएशन सेक्टर में मुश्किलें लगातार बढ़ रही है. जेट एयरवेज (Jet Airways) के बंद होने के बाद लो कॉस्ट एयरलाइन इंडिगो (Indigo) में मतभेद गहरा गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. दोनों के बीच मतभेद इतना बढ़ गया है कि अब उन्होंने मार्केट रेगुलेटर की शरण ली है. इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई है. बुधवार को NSE पर इंडिगो (Interglobe Aviation) का शेयर 198.24 फीसदी यानी 301.45 रुपये गिरकर 1,264.85 रुपये पर आ गया.

दोनों दोस्तों के पास हैं कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी
राकेश गंगवाल एक अमेरिकी नागरिक हैं. वह इंडिगो में नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर हैं. उनके पास एविएशन इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा का अनुभव और Indigo में गंगवाल की 36.68 फीसदी हिस्सेदारी है. गंगवाल ने इस मामले में अब मार्केट रेगुलेटर सेबी की मदद मांगी है. गंगवाल ने सेबी से एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल (EGM) बैठक करने की अनुमति मांगी है. उनका आरोप है कि कंपनी विवादित रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन में शामिल है. वहीं कंपनी में भाटिया की 37.9 फीसदी हिस्सेदारी है. उन्होंने भी बोर्ड को लिखा है कि गंगवाल का RG ग्रुप सिर्फ कंपनी की प्रतिष्ठा को धूमिल करना चाहते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स बताया जा रहा है कि दोनों के बीच एयरलाइंस स्ट्रैटेजी, महत्वाकांक्षा को लेकर मतभेद हुए हैं. अमेरिका के राकेश गंगवाल अब खेतान एंड कंपनी के साथ मिलकर अपने पार्टनर के साथ मतभेद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही राहुल भाटिया भी JSA लॉ के साथ ही मामला सुलझाने में लगे हैं.

रजत भाटिया, एविएशन कंपनी इंडियो के फाउंडर


दोनों दोस्तों के बीच बढ़ी तकरार
2003-04 में राकेश गंगवाल और भाटिया ने भारत में साथ मिलकर इंडिगो एयरलाइन लॉन्च की. एयरलाइन ने करीब 2-3 साल तक बढ़िया और आसानी से परिचालन किया और इसके बाद कम दाम वाली इस हवाई सेवा ने बड़ा विस्तार किया. देश में मार्केट शेयर के तौर पर यह नंबर-1 एयरलाइन बन गई.>> विदेशों में टॉप एविएशन प्रफेशनल्स का बड़ा नेटवर्क रखने वाले राकेश गंगवाल ने इंडिगो के विदेशी बाजारों में विस्तार करने के बारे में सोचना शुरू कर दिया. इसी दौरान पिछली गर्मियों में इंडिगो के प्रेजिडेंट आदित्य घोष ने कंपनी छोड़ दी थी. इससे पहले इंडिगो के मुख्य कमर्शल और नेटवर्क चीफ संजय कुमार ने भी कंपनी को बाय-बाय बोल दिया था. (ये भी पढ़ें: जानिए 2000, 500 और 200 रुपये के नोट छापने में सरकार कितना करती हैं खर्च!)



>> अब इंडिगो में कई टॉप पॉजिशन खाली पड़ी हैं. जनवरी में, इंडिगो ने रोनोजॉय दत्ता को सीईओ के तौर पर नियुक्त किया. दत्ता ने अमेरिका में 20 साल तक काम किया है और वह यूएस एयरवेज में अडवाइजर भी रहे हैं. दो साल तक उन्होंने एयर सहारा के प्रेजिडेंट का तौर पर भी काम किया. इंडिगो के कर्मचारियों ने पहली बार कंपनी में काम करने के माहौल को लेकर भी शिकायत की.

>> एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दोनों दोस्तों के बीच ज्यादा एग्जिक्यूटिव कंट्रोल को लेकर खींचतान चल रही है. इसीलिए अब ये मामला लॉ फर्म के पास पहुंच गया है.

ऐसे शुरू हुई थी कंपनी
दोनों दोस्तों ने मिलकर शुरू की थी कंपनी-इंडिगो एयरलाइंस के राहुल भाटिया ने कनाडा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और भारत लौटकर परिवार के बिजनेस में शामिल हो गए. सन 1991 में पार्टनर्स ने इस कंपनी पर कब्जा कर लिया और पिता-पुत्र को बाहर का रास्ता दिखा दिया. अपनी डिग्री के दम पर राहुल ने आईटी कंपनी इंटरग्लोब शुरू की.



>> लंबे समय तक इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने अपने गहरे दोस्त राकेश गंगवाल से एक एयरलाइन शुरू करने की बात की.काफी सोच-विचार के बाद 2004 में एयरलाइन लाइसेंस के लिए अर्जी दे दी गई और इंडिगो एयरलाइन की नींव पड़ी.

>> 2004 में लाइसेंस हासिल करने के बाद 2006 तक यह कंपनी उड़ान नहीं भर पाई थी. उस दौर में एविएशन फ्यूल की कीमतें आसमान पर थीं. इंडस्ट्री को लीड करने वाली किंगफिशर, स्पाइस जेट और जेट तक दिक्कत का सामना कर रही थीं.

>> सन 2005 के ऐसे विपरीत माहौल में इस कंपनी ने पेरिस एअर शो में 100 विमानों की शॉपिंग की. जेब में केवल 100 करोड़ रुपए थे. यहां राकेश गंगवाल की साख काम आई जो 35 साल से एयरलाइन बिजनेस में इज्जत कमा चुके थे.

>> एयरबस ने तमाम शर्तें मानते हुए इतने कम एडवांस पर बड़ा ऑर्डर स्वीकारा था. पहले विमान की डिलिवरी 28 जुलाई 2006 को मिली और 4 अगस्त 2006 से कंपनी ने अपनी उड़ान शुरू की.

>> 2007 तक 15 विमान का बेड़ा इनके पास था. 2010 तक मार्केट शेयर 17.3 प्रतिशत हो चुका था और एयर इंडिया को पीछे कर यह तीसरी बड़ी कंपनी बन चुकी थी.

>> 2011 में कंपनी ने तब चौंकाया जब एअरबस को 180 विमानों का ऑर्डर दिया. इसी साल इंटरनेशनल फ्लाइट्स भी शुरू कर दीं. फिर कंपनी का 3200 करोड़ रुपए का आईपीओ आया और यह आगे बढ़ती चली गई.

>> जनवरी 2019 में भारत में मार्केट शेयर 42.5 प्रतिशत है. इसके बेड़े में कई प्लेन हैं.

ये भी पढ़ें: घर खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! SBI ने ब्याज दर में की कटौती

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 10, 2019, 12:15 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर