RBI के पूर्व गवर्नर ने केंद्र सरकार पर लगाया बड़ा आरोप, कही ये बात

डी सुब्बाराव ने कहा कि सरकार आरबीआई के रिजर्व को हड़पने की कोशिश कर रही है.

पीटीआई
Updated: August 3, 2019, 5:31 PM IST
RBI के पूर्व गवर्नर ने केंद्र सरकार पर लगाया बड़ा आरोप, कही ये बात
RBI के पूर्व गवर्नर ने सरकार पर लगाया बड़ा आरोप, कही ये बात
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Updated: August 3, 2019, 5:31 PM IST
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. डी. सुब्बाराव ने कहा है कि केंद्रीय बैंक का रिजर्व हड़पने की कोशिशों से सरकार की हताशा का पता चलता है. उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक के रिजर्व का मूल्य तय करते हुए सजग रहने की जरूरत है.

हालांकि, विदेशी बाजारों में सरकारी बॉन्ड जारी कर धन जुटाने के मामले में सुब्बाराव ने कहा कि यदि बाजार की गहराई मापने के लिये सरकारी बांड जारी किया जाता है तो उन्हें दिक्कत नहीं है, लेकिन विदेशी मुद्रा बाजार से नियमित रूप से धन जुटाने को लेकर सावधान रहने की जरूरत है. उन्होंने सीएफए सोसायटी इंडिया के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुये ये बातें कहीं.

रिजर्व बैंक के जोखिम दूसरे केंद्रीय बैंकों से अलग
सुब्बाराव ने कहा, यदि दुनिया में कहीं भी एक सरकार उसके केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट को हड़पना चाहती है तो यह ठीक बात नहीं है. इससे पता चलता है कि सरकार इस खजाने को लेकर काफी व्यग्र है.

सुब्बाराव ने केंद्रीय बैंक के रिजर्व में हिस्सा लेने के सरकार के प्रयासों पर अपने विरोध का बचाव करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक के जोखिम अन्य केंद्रीय बैंकों से अलग हैं. उसके लिये पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय परंपराओं और नियमों का अनुसरण करना पूरी तरह से फायदेमंद नहीं होगा. सुब्बाराव की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कहा जा रहा है कि विमल जालान समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने के अंतिम चरण में है. समिति रिजर्व बैंक की पर्याप्त पूंजी की पहचान करने तथा अतिरिक्त राशि सरकार को ट्रांसफर करने के तौर तरीके के बारे में रिपोर्ट तैयार कर रही है.

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रिजर्व पर RBI-सरकार में खींचतान
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रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे के लिये केन्द्रीय बैंक के रिजर्व को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक के बीच के खींचतान को मुख्य कारणों में से एक माना गया है. सुब्बाराव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों के बैलेंसशीट पर गौर करते हैं. संकट के समय में कर्ज देने के लिये अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष भी इसी तरीके को अपनाती है.

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First published: August 3, 2019, 5:29 PM IST
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