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Budget 2022 : इस बार रेल किराया बढ़ेगा या नहीं, जानें पूरी डिटेल

Budget 2022 : इस बार रेल किराया बढ़ेगा या नहीं, जानें पूरी डिटेल

2014 के बाद से सरकार ने बजट के जरिये यात्री अथवा माल ढुलाई किराये में कोई वृद्धि नहीं की है.

2014 के बाद से सरकार ने बजट के जरिये यात्री अथवा माल ढुलाई किराये में कोई वृद्धि नहीं की है.

दिसंबर 2019 में सरकार ने यात्री किराये में मामूली वृद्धि की थी, जिसके बाद से अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया. रेलवे यात्री किराये पर भारी-भरकम सब्सिडी भी देता है, जिसकी भरपाई मालभाड़े के रूप में की जाती है. इसका सीधा असर रेलमार्ग से सामान भेजने वाले कारोबारियों पर पड़ता है.

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नई दिल्‍ली. अगले हफ्ते 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2022 में रेल किराये को लेकर सरकार बड़ी राहत दे सकती है. महामारी से प्रभावित भारतीय रेल यात्रियों को सहूलियत देने के लिए बजट में रेल किराये में कोई बदलाव नहीं होने की उम्‍मीद है.

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार माल भाड़े अथवा यात्री किराये में बढ़ोतरी करने के बजाए रेलवे के खर्चे पूरे करने के लिए बजट में अलग से फंड का प्रावधान कर सकती है. कोरोना महामारी से प्रभावित 2021-22 में भी रेलवे माल ढुलाई से होने वाली आय (freight revenue) में 25 फीसदी की वृद्धि हासिल करने के करीब है. माना जा रहा है कि चालू वित्‍तवर्ष में रेलवे को माल ढुलाई से कुल 1.45 लाख करोड़ की आमदनी होने का अनुमान है. यात्री किराये से भी रेलवे की कमाई 10 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. लिहाजा बजट में किराया बढ़ाने की फिलहाल कोई जरूरत नहीं होगी.

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दो साल से नहीं बढ़ा यात्री किराया
दिसंबर 2019 में रेलवे ने अलग से आदेश जारी कर यात्री किराये में 4 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद से किराया स्थिर बना हुआ है. वहीं, 2014 के बाद से सरकार ने बजट के जरिये यात्री अथवा माल ढुलाई किराये में कोई वृद्धि नहीं की है. रेल बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार का कहना है कि इस साल रेल किराया बढ़ाने के पीछे कोई तर्क नहीं है और हम लोगों पर अतिरिक्‍त बोझ नहीं डाल सकते. हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान अतिरिक्‍त शुल्‍क के रूप में यात्रियों पर बोझ जरूर बढ़ा है.

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मालभाड़े से होती है यात्री किराये की भरपाई
भारतीय रेलवे अपने यात्रियों को हर साल किराये पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देता है. इसकी भरपाई के लिए उसे मजबूरन मालभाड़े में बढ़ोतरी करनी पड़ती है. यही कारण है कि भारत सबसे ज्‍यादा रेल माल भाड़ा वसूलने वाले देशों में शामिल है. इसका नुकसान भी रेलवे को उठाना पड़ रहा, क्‍योंकि माल ढुलाई में उसकी हिस्‍सेदारी लगातार घटती जा रही. पिछले 50 वर्षों में कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्‍सेदारी 75 फीसदी से घटकर 39 फीसदी पर आ गई है.

Tags: Budget, Indian railway

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