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मोदी सरकार ने गरीबों की मेहनत की कमाई को किया सुरक्षित, इस कानून में किया संशोधन- पासवान

मोदी सरकार ने चिट फंड कानून (Chit Fund Act) में संशोधन किया

मोदी सरकार ने चिट फंड कानून (Chit Fund Act) में संशोधन किया

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में MODI2.0 सरकार ने गरीब और छोटे निवेशकों की मेहनत की कमाई पूर्ण सुरक्षा हेतु चिट फंड कानून (Chit Fund Act) में संशोधन किया और कानून बनाकर अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाया.

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    नई दिल्ली. मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में गरीबों और छोटे निवेशकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित किया है. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में MODI2.0 सरकार ने गरीब और छोटे निवेशकों की मेहनत की कमाई पूर्ण सुरक्षा हेतु चिट फंड कानून (Chit Fund Act) में संशोधन किया और कानून बनाकर अनियमित जमा योजनाओं (Banning unregulated deposit scheme) पर प्रतिबंध लगाया. आपको बता दें कि चिट फंड सालों से छोटे कारोबारियों और गरीब लोगों के लिए निवेश का स्रोत रहा है. लेकिन कुछ पक्षकारों ने इसमें अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद सरकार ने एक परामर्श समूह बनाया. 1982 के मूल कानून को चिट फंड के विनियमन का उपबंध करने के लिए लाया गया था. संसदीय समिति की सिफारिश पर कानून में संशोधन के लिए विधेयक लाया गया था.

    क्या है चिटफंड?
    चिटफंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिटफंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे. चिटफंड एक्ट 1982 के सेक्शन 61 के तहत चिट रजिस्ट्रार की नियुक्ति सरकार के द्वारा की जाती है. चिटफंड के मामलों में कार्रवाई और न्याय निर्धारण का अधिकार रजिस्ट्रार और राज्य सरकार का ही होता है.

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    चिटफंड कंपनियां गैर-बैंकिंग कंपनियों की श्रेणी में आती हैं. ऐसी कंपनियों को किसी खास योजना के तहत खास अवधि के लिए रिजर्व बैंक और सेबी की ओर से आम लोगों से मियादी (फिक्स्ड डिपाजिट) और रोजाना जमा (डेली डिपाजिट) जैसी योजनाओं के लिए धन उगाहने की अनुमति मिली होती है. जिन योजनाओं को दिखाकर अनुमति ली जाती है, वह तो ठीक होती हैं. लेकिन इजाजत मिलने के बाद ऐसी कंपनियां अपनी मूल योजना से इतर विभिन्न लुभावनी योजनाएं बनाकर लोगों से धन उगाहना शुरू कर देती हैं.



    चिटफंड में निवेश की सीमा बढ़ी
    चिटफंड संशोधन बिल में कई प्रावधान किए गए हैं. इसमें ये भी कहा गया है कि चिटफंड कंपनियां बेहतर तरीके से विकास कर सकें इसके लिए भी जरूरी प्रावधान हुआ है. चिटफंड में व्यक्तिगत और कंपनियों की निवेश की सीमा बढ़ाई गई है. चिटफंड में व्यक्तिगत निवेश की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है. वहीं कंपनियों के लिए यह सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 18 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है.

    चिटफंड में कोई भी कंपनी जो भी फैसला लेगी उसमें कम से कम दो सब्सक्राइबर का होना जरूरी होगा.  इसका दुरुपयोग न हो इसका भी इसमें प्रावधान किया गया है.

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