TATA vs Cyrus Mistry: रतन टाटा ने कहा-साइरस मिस्त्री को बाहर करने का फैसला सुखद नहीं था

TATA vs Cyrus Mistry: रतन टाटा ने कहा-साइरस मिस्त्री को बाहर करने का फैसला सुखद नहीं था
रतन टाटा vs साइरस मिस्त्री

TATA vs Cyrus Mistry: रतन टाटा (Ratan Tata) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कहा कि साइरस मिस्त्री को बाहर करने का निर्णय सुखद नहीं था. लेकिन उसमें टाटा ग्रुप की गरिमा और प्रतिष्ठा की कमी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 11:26 AM IST
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नई दिल्ली. लंबे समय से चले आ रहे टाटा और मिस्त्री के कानूनी दांव पेच के बीच हाल ही में एक नया मोड़ आ गया, जब टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि साइरस मिस्त्री को बाहर करने का निर्णय सुखद नहीं था. लेकिन उसमें टाटा ग्रुप की गरिमा के अनुरूप गुणों की कमी थी. इसी के साथ टाटा ने अपने प्रतिउत्तर में मिस्त्री को ट्रोजन हॉर्स कहते हुए कहा कि उसके द्वारा किया गया कार्य और लगाए गए आरोप मर्यादाहीन हैं, जो टाटा की गरिमा के विरुद्ध हैं.

इससे पहले टाटा संस (TATA sons) द्वारा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 18 दिसंबर के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देने के एक दिन बाद टाटा संस के पूर्व प्रमुख सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंचे थे. रतन टाटा ने मिस्त्री पर आरोप लगाया था कि टाटा संस के चेयरमैन बनने के बाद भी हितों के टकराव की वजह से मिस्त्री अपने को परिवार के व्यवसाय से अलग नहीं करना चाहते थे.

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आरोपों से मुक्त करते हुए 18 दिसंबर 2019 को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें फिर से टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने का आदेश दिया था. बाद में, टाटा संस ने NCLAT के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
जनवरी में शीर्ष अदालत ने एनसीएलएटी के फैसले पर रोक लगा दी थी और मई में मिस्त्री ने भी एनसीएलएटी के फैसले को चुनौती दी थी. क्रॉस-अपील में, मिस्त्री ने टाटा संस के बोर्ड में पलोनजी समूह के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व की मांग की थी और दावा किया था कि दोनों समूहों के बीच अर्ध-साझेदारी मौजूद है.

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क्या है पूरा मामला
साइरस मिस्‍त्री, जो टाटा संस के छठे चेयरमैन थे, को अक्‍टूबर 2016 में एक नाटकीय घटनाक्रम में उनके पद से हटा दिया गया था. रतन टाटा के रिटायर होने के बाद मिस्‍त्री ने 2012 में चेयरमैन का पद संभाला था. इसके बाद टीसीएस के प्रबंध निदेशक और सीईओ एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का नया चेयरमैन बनाया गया. इसके दो महीने बाद मिस्त्री की ओर से उनके परिवार की दो इन्वेस्टमेंट कंपनियों- साइरस इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प ने टाटा संस के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच में चुनौती दी थी.

इन कंपनियों की दलील थी कि मिस्त्री को हटाने का फैसला कंपनीज एक्ट के नियमों के मुताबिक नहीं था, लेकिन जुलाई 2018 में एनसीएलटी ने दावे खारिज कर दिए. इसके बाद मिस्त्री ने खुद एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ अपील की थी.
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