जन्मदिन विशेष: भारत-चीन लड़ाई की वजह से शादी नहीं कर पाए थे रतन टाटा! जानें उनकी जिंदगी के और भी रोचक पहलू

रतन टाटा आज अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं.

रतन टाटा आज अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं.

Ratan Tata Birthday: रतन टाटा को जन्मदिन के मौके पर सोशल मीडिया के जरिए जमकर बधाई मिल रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉलोवर्स को आए दिन अपने बारे में कुछ खास जानकारी देने वाले रतन टाटा ने एक इंटरव्यू में अपने लव स्टोरी भी बताई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 2:37 PM IST
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नई दिल्ली. आज रतन टाटा (Ratan Tata) का 83वां जन्मदिन है. 28 दिसंबर 1937 को जन्में रतन टाटा देश के सबसे सफल बिजनेसमैन में से एक है. अपने बिजनेस एथिक्स के अलावा उन्हें एक परोपकारी व्यक्ति के रूप में भी जाना जाता है. आज उनके जन्मदिन के मौके पर सोशल मीडिया पर लोग रोचक तरीके से उन्हें बधाई दे रहे हैं. किसी ने उन्हें सबसे चार्मिंग लुक वाला बिजनेसमैन बताया तो किसी ने समाज के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों को सराहा. दरअसल, रतन टाटा ने शिक्षा, मेडिसिन से लेकर ग्रामीण भारत के विकास के कई तरह की पहल का हिस्सा रहे चुक है. आज भी उनके 65 फीसदी शेयर्स चैरिटेबल ट्रस्ट में ​इन्वेस्टेड हैं.

कुछ समय पहले स्टैनफोर्ड सोशल इनोवेशन रिव्यू (Standford Social Innovation Review) में उन्होंने कहा था, 'अपने शुरुआती दिनेां में एक दुकान पर काम करने के साथ मैंने समाज में फैले कई बुराईयों को करीब से देखा. मेहनत करने के बाद भी लोगों को सफलता नहीं मिल पाती है. यही कारण रहा कि मैंने सोचा कि कोई व्यक्ति दूसरे की जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है. जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे मैंने ऐसी परेशनियां देखी और ऐसे लोगों के लिए कुछ न कुछ करता रहा.

टाटा प्रमुख नहीं तो क्या करते रतन टाटा?

इसी साल 5 सितंबर को रतन टाटा ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट (Ratan Tata Instagram Post) किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि अगर वो टाटा ग्रुप के प्रमुख नहीं होते तो क्या करते. इस पोस्ट में लिखा था, 'मेरे इनबॉक्स में ढेर सारे मैसेजेज़ हैं, लेकिन मैं सबका जवाब नहीं दे सकता. आप सबने कई बड़े अच्छे सवाल भी पूछे हैं. इसमें से मैं कुछ का जवाब देना चाहता हूं. इंस्टाग्राम पर एक सवाल-जवाब का फीचर है, मैं यहीं पर रविवार शाम को कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश करूंगा.'
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इसके बाद रविवार शाम को उन्होंने ढेरों सवाल के जवाब दिए. उनके हर जवाब पढ़कर आपके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाएगी. किसी यूज़र ने उनसे पूछा कि अगर आप टाटा ग्रुप के प्रमुख नहीं होते तो फिर क्या होते? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- संभवत मैं एक कामयाब आर्किटेक्ट बनने की कोशिश करता.

सोशल पर एक्टिव रहने वाले रतन टाटा आए दिन अपने फॉलोवर्स को अपने बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी देते रहते हैं. इसी साल वेलेंटाइन डे से ठीक एक दिन पहले उन्होंने अपनी लव स्टोरी के बारे में भी जानकारी दी थी. 'ह्यूमंस ऑफ बॉम्‍बे' (Facebook Page Humans of Bombay) से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि ग्रेजुएशन के बाद लॉस एंजेलिस (Los Angeles) में काम करने के दौरान उनकी शादी लगभग हो ही गई थी. इस बातचीत में उन्होंने अपनी जिंदगी, माता-पिता के तलाक, दादी के साथ बिताए दिन, उनकी अच्‍छी सीख, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई, प्‍यार और यहां तक कि ये रिश्‍ता क्‍यों खत्‍म हो गया जैसे कई मुद्दों परउबातचीत की.



अपनी लव स्टोरी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आर्किटेक्‍चर में ग्रेजुएशन करने पर उनके पिता नाराज हो गए. इसीलिए रतन टाटा लॉस एंजेलिस में नौकरी करने लगे. वहां उन्‍होंने दो साल तक काम किया. उन दिनों को याद करते हुए रतन टाटा कहते हैं वो समय बहुत अच्‍छा समय था- मौसम बहुत खूबसूरत था, मेरे पास अपनी गाड़ी थी और मुझे अपनी नौकरी से प्‍यार था. लॉस एंजेलिस में रतन टाटा को प्‍यार हुआ और वो उस लड़की से शादी करने ही वाले थे. लेकिन, अचानक उन्‍हें वापस भारत आना पड़ा क्‍योंकि उनकी दादी की तबीयत ठीक नहीं थी.

..और फिर भारत-चीन लड़ाई आ गई रतन टाटा की शादी के बीच में

रतन टाटा को ये लगा था कि जिस महिला को वो प्‍यार करते हैं वह भी उनके साथ भारत चली जाएगी. लेकिन 1962 की भारत-चीन लड़ाई के चलते उनके माता-पिता उस लड़की के भारत आने के पक्ष में नहीं थे और इस तरह उनका रिश्‍ता टूट गया.

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रतन टाटा का बचपन

अपने बचपन के बारे में रतन टाटा कहते हैं कि उनका बचपन बहुत बढ़िया बीता, लेकिन माता-पिता के अलग (तलाक लेने के बाद) होने से उन्हें और उनके भाई को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. बातचीत के दौरान रतन टाटा ने अपनी दादी को भी याद करते हुए बताया कि, मुझे आज भी याद है कि किस तरह द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद वो मुझे और मेरे भाई को गर्मियों की छुट्टियों के लिए लंदन लेकर चली गई थीं. वास्‍तव में वहीं उन्‍होंने हमारे जीवन के मूल्यों के बारे में समझाया. वह हमें बताती थीं कि ऐसा मत कहो या इस बारे में शांत रहो और इस तरह हमारे दिमाग में ये बात डाल दी गई कि प्रतिष्‍ठा सबसे ऊपर है.

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