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कोरोना का बुरा असर: अगले 1 साल में 10 फीसदी तक बढ़ सकता है NPA, रेटिंग एजेंसी का अनुमान

अगले 1 साल में 10 फीसदी तक बढ़ सकता है NPA
अगले 1 साल में 10 फीसदी तक बढ़ सकता है NPA

भारतीय बैंकों के लिए बुरी खबर है S&P ने कहा कि भारतीय बैंकों का इस साल एनपीए रेश्यो 10 से 11 फीसदी तक बढ़ सकता है. इसके अलावा आने वाले 12 से 18 महीनों में एनपीए रेश्यो 10 से 11 फीसदी तक बढ़ सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 10:36 PM IST
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नई दिल्ली: भारतीय बैंकों के लिए बुरी खबर है S&P ने कहा कि भारतीय बैंकों का इस साल एनपीए रेश्यो 10 से 11 फीसदी तक बढ़ सकता है. इसके अलावा आने वाले 12 से 18 महीनों में एनपीए रेश्यो 10 से 11 फीसदी तक बढ़ सकता है. आपको बता दें लंबे समय तक लॉकडाउन के कारण बिजनस बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं, जिसका असर देश की इकोनॉमी पर साफ-साफ देखने को मिल रहा है.

इतना रह सकता है बैंकों का एनपीए
रेटिंग एजेंसी S&P का अनुमान है कि भारतीय बैंकों का NPA रेश्यो 10-11% तक बढ़ सकता है. इसके अलावा 12 से 18 महीनों में NPA रेश्यो 10-11% तक बढ़ सकता है. वहीं, अगले साल भारतीय बैंकों का क्रेडिट कॉस्ट 2.2-2.9% रहने का अनुमान लगाया है.


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एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) के मुताबिक, कोरोना वायरस संकट के चलते एशिया-प्रशांत बैंकों की ऋण लागत में 300 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है. उसका अनुमान है कि चीन का एनपीए अनुपात लगभग दो फीसदी बढ़ेगा, जबकि क्रेडिट कॉस्ट रेश्यो में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

मार्च के अंत में बैंकों का फंसा कर्ज यानी एनपीए का अनुपात 8.5 फीसदी था जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक अनुपात में शुमार है. बैंकिंग सेक्टर में दो साल के संकट के कारण इसमें खासी बढ़ोतरी हुई है. आरबीआई का कहना है कि अगर माइक्रोइकॉनमिक एनवायरमेंट और बदतर होता है तो यह अनुपात 14.7 फीसदी तक जा सकता है.

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पिछले साल सरकार ने दिए 3.5 लाख करोड़ रुपये
बीते 5 साल में केंद्र सरकार ने इन सरकारी बैंकों में 3.5 लाख करोड़ रुपये डाला है ताकि इनकी स्थिति बेहतर हो सके. फरवरी में चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में सरकार ने बैंकों कों पूंजीगत निवेश के बारे में कोई ऐलान नहीं किया था. लेकिन, बैंकों को कहा गया था कि वो फंड के लिए कैपिटल मार्केट (Capital Market) के विकल्प पर भी ध्यान दें.
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