Ration Card: 11 साल की बेटी की 2017 में भूख से हो गई थी मौत, अब 3 करोड़ लोगों के खातिर पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने यह आदेश हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम में तैनात एक चौकीदार की कानूनी उत्तराधिकारी नर्बदा देवी की याचिका पर दिया (File photo)

शीर्ष अदालत ने यह आदेश हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम में तैनात एक चौकीदार की कानूनी उत्तराधिकारी नर्बदा देवी की याचिका पर दिया (File photo)

One Nation One Ration Card: आधार से लिंक (Aadhar Link) न होने के कारण तकरीबन 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द (Ration Cards Canceled) कर दिए गए हैं. यह मामला पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट (SC) में चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष लाया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 9:47 AM IST
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नई दिल्ली. देश की मीडिया में झारखंड (Jharkhand) की रहने वाली कोइली देवी (Koili Devi) की एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई है. साल 2017 में भी कोइली देवी की खूब चर्चा हुई थी. 2017 में कोइली देवी की 11 साल की बेटी की भूख से मौत (Died of Hunger) हो गई थी. भूख से हुई इस मौत पर राज्य की तत्कालीन बीजेपी की रघुवर सरकार (Raghuvar Government) की काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी. अब चार साल बाद एक बार फिर से उसी कोइली देवी की चर्चा सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल एक याचिका को लेकर हो रही है. कोइली देवी ने आधार से लिंक (Aadhar Link) नहीं होने के कारण तकरीबन तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द (Ration Card Cancellation) किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बुधवार को इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई भी हुई है. कोर्ट ने आधार कार्ड से जुड़े नहीं होने के कारण करीब 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए जाने को ‘अत्यंत गंभीर’ मामला बताया. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एसी बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की बेंच ने कहा कि इसे विरोधात्मक मामले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. यह बेहद ही गंभीर मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर सभी पक्षों से 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सवाल खड़े किए

गौरतलब है कि हाल के दिनों में आधार से लिंक न होने के कारण तकरीबन 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं. यह मामला पिछले दिनों चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष लाया गया था. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रांची हाई कोर्ट जाने को कहा गया, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने आग्रह करते हुए कहा कि यह गंभीर मसला है. देश में हाल के दिनों में 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए गए हैं. खासकर आदिवासी इलाकों में आधार से लिंक करने में फिंगर प्रिंट और आंखों की स्केनिंग की समस्या है. गोंजाल्विस की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए सुनवाई पर सहमति जता दी और चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड से जुड़े नहीं होने के कारण करीब 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए जाने को ‘अत्यंत गंभीर’ मामला बताया.

केंद्र सरकार ने क्या दलील दी

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा कि केवल फर्जी राशन कार्ड ही रद्द किए गए हैं. लेखी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून में शिकायत निवारण की व्यवस्था है. अगर आधार उपलब्ध नहीं है तो वैकल्पिक दस्तावेज जमा कराए जा सकते हैं.

आधार नहीं होने से क्या भोजन के अधिकार से वंचित किया जा सकता है?



लेखी ने कोर्ट में दलील दी कि केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि आधार न होने की स्थिति में भी भोजन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यह बेहद ही गंभीर मामला है. आप इसे विरोधी याचिका न समझें और चार सप्ताह में जवाब दाखिल करें. अब चार सप्ताह बाद एक बार से कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई होगी.

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केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि आधार न होने की स्थिति में भी भोजन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.


2019 में भी सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था सवाल

आपको बता दें कि 9 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने वैध आधार कार्ड न होने पर राशन आपूर्ति से इन्कार किए जाने के आरोपों पर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा था. उस समय कोर्ट ने राज्यों से कहा था कि वे बताएं कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतगर्त शिकायत निवारण तंत्र बनाने की दिशा में आपने क्या किया है. उस समय भी केंद्र सरकार ने भुखमरी से मौत के आरोपों से साफ इन्कार किया था और कहा था कि भूख से किसी की मौत नहीं हुई है.

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चार साल बाद एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर राशन कार्ड रद्द किए जाने को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं. कोइली देवी ने अपनी याचिका में कहा है कि साल 2017 में उनका राशन कार्ड भी रद्द कर दिया गया था, जिससे मेरी 11 साल की बेटी की मौत हो गई थी. याचिका में कहा गया है कि देशभर में तकरीबन तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द किए गए हैं. पहले इन्हें फर्जी बताकर रद्द किया गया अब इसको सही ठहराया जा है, जबकि, जांच में पता चला है कि राशन कार्डधारकों को कभी भी इस बारे में नोटिस नहीं भेजा गया.
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