क्या होगा अब RBI के रेपो रेट कम होने से, बैंक इसके बाद क्यों कम करते है लोन की EMI?

क्या होगा अब RBI के रेपो रेट कम होने से, बैंक इसके बाद क्यों कम करते है लोन की EMI?
ब्याज दरें घटाने का मतलब

रिजर्व बैंक (RBI- Reserve Bank of India) ने ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की बड़ी कटौती कर दी है. इस कटौती के बाद अब रेपो रेट घटकर 4.4 फीसदी रह गया है. ब्याज दरें घटाने का मतलब है कि अब बैंक जब भी RBI से फंड (पैसे) लेंगे, उन्हें नई दर पर फंड मिलेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2020, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा ऐलान किया है. रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की बड़ी कटौती कर दी है. इस कटौती के बाद अब रेपो रेट घटकर 4.4 फीसदी रह गया है. ब्याज दरें घटाने का मतलब है कि अब बैंक जब भी RBI से फंड (पैसे) लेंगे, उन्हें नई दर पर फंड मिलेगा. सस्ती दर पर बैंकों को फंड मिलेगा तो इसका फायदा बैंक अपने उपभोक्ता को भी देंगे. यह राहत आपके साथ सस्ते कर्ज और कम हुई EMI के तौर पर बांटी जाती है. इसी वजह से जब भी रेपो रेट घटता है तो आपके लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है. साथ ही जो कर्ज फ्लोटिंग हैं उनकी ईएमआई भी घट जाती है. आपने आरबीआई क्रेडिट पॉलिसी के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुने होंगे. पर क्या आप इन शब्दों के मतलब जानते हैं. आज हम आपको इसका मतलब और मायने बता रहे हैं. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की आर्थिक समीक्षा नीतियों से जुड़े इन शब्दों के बारे में जानिए.

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क्या है रेपो रेट
जिस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाेने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.



क्या होता है रिवर्स रेपो रेट


जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आता है. बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है.

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क्या है SLR
जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है, जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है.

क्या है CRR 
बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंकों को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है, जिसे कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं.

क्या है MSF 
आरबीआई ने इसकी शुरुआत साल 2011 में की थी. एमएसएफ के तहत कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं.

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First published: March 27, 2020, 10:49 AM IST
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