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DBS की रिपोर्ट में दावा! रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया लंबे समय तक नहीं बदलेगा नीतिगत दरें, जानें क्‍यों होगा ऐसा

सिंगापुर के बैंक डीबीएस (DBS) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) कोरोना संकट के दौरान उठाए गए आपात कदमों में भी कमी कर सकता है. पहले भी रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी के कारण महंगाई दर ऊंची रहने पर लगातार तीन बार मौद्रिक नीति समीक्षा (MPR) में नीतिगत दरों (Policy Rates) को लेकर यथास्थिति बरकरार रखी.

सिंगापुर के बैंक डीबीएस (DBS) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) कोरोना संकट के दौरान उठाए गए आपात कदमों में भी कमी कर सकता है. पहले भी रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी के कारण महंगाई दर ऊंची रहने पर लगातार तीन बार मौद्रिक नीति समीक्षा (MPR) में नीतिगत दरों (Policy Rates) को लेकर यथास्थिति बरकरार रखी.

सिंगापुर के बैंक डीबीएस (DBS) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) कोरोना संकट के दौरान उठाए गए आपात कदमों में भी कमी कर सकता है. पहले भी रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी के कारण महंगाई दर ऊंची रहने पर लगातार तीन बार मौद्रिक नीति समीक्षा (MPR) में नीतिगत दरों (Policy Rates) को लेकर यथास्थिति बरकरार रखी.

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    मुंबई. खाद्य पदार्थों (Food Items) को छोड़कर दूसरे सामानों (Non-Food Items) की कीमतों में तेजी महंगाई (Inflation) को उच्चस्तर पर बनाए रखेगी. इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) नीतिगत दरों को लंबे समय तक जस का तस रख सकता है. आसान भाषा में समझें तो महंगाई के कारण केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत दरों (Policy Rates) में किसी तरह की कटौती नहीं करेगा. सिंगापुर के बैंक डीबीएस (DBS) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्रीय बैंक कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौरान उठाए गए आपात कदमों में भी कमी कर सकता है.

    खाद्य महंगाई दर 6 महीने से ज्‍यादा समय में रह सकती है नरम
    रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी के कारण महंगाई दर ऊंची रहने पर लगातार तीन बार मौद्रिक नीति समीक्षा (MPR) में दरों को लेकर यथास्थिति बनाए रखी. हालांकि, वृद्धि दर लगातार नकारात्मक दायरे में रही. आरबीआई ने वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है. बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्‍यादा समय में खाद्य महंगाई दर नरम रह सकती है. हालांकि, गैर-खाद्य वस्तुओं के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं. इसका कारण लंबे समय तक बंद रहने के बाद मैन्‍युफैक्‍चरिंग कॉस्‍ट में वृद्धि, जिंसों के दाम में तेजी, दूरसंचार कीमत समायोजन और कुछ क्षेत्रों में मांग में तेजी है.

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    औसत महंगाई दर 2021 में 4 फीसदी के लक्ष्‍य से ऊपर रहेगी
    रिपोर्ट में कहा गया है कि जिंसों के दाम में हाल की तेजी से लागत पर असर पड़ा है. औद्योगिक धातु के मामले में लागत पर ज्‍यादा ही असर देखा गया है. सितंबर 2020 के बाद स्टील हॉट रोल्ड कॉयल का वायदा भाव 80 फीसदी से अधिक मजबूत हुआ है. तेल, ब्रेंट क्रूड अक्‍टूबर-दिसंबर 2020 तिमाही के दौरान 30 फीसदी मजबूत हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रस्फीति नरम होगी और 2021 में औसत महंगाई दर 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर ही रहेगी. ऐसे में नीतिगत दर में कटौती की गुंजाइश सीमित है. केंद्रीय बैंक नीतिगत दर को जस का तस रख सकता है.

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