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दाल और खाद्य तेल के भाव में आएगी तेजी! RBI ने वित्‍त वर्ष 2021-22 के लिए आर्थिक वृद्धि अनुमान में भी किया संशोधन

आरबीआई का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के कारण अभी खाद्य तेलों और दालों के दाम बढ़ सकते हैं.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मुताबिक, कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण देश की आर्थिक वृद्धि दर (Growth Rate) 10.50 फीसदी रह सकती है. साथ ही कहा कि वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास से ही कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के खिलाफ अच्‍छे नतीजे हासिल किए जा सकते हैं.

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    नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आम आदमी को झटका देते हुए कहा है कि मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण दाल व खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी का रुख अभी बना रहेगा. साथ ही कहा है कि वित्‍त वर्ष 2020-21 में बंपर पैदावार के चलते अनाज के दामों में कमी आ सकती है. आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि अगले कुछ महीनों तक वैश्विक स्तर पर कच्‍चे तेल के भाव में उतार-चढ़ाव बना रहेगा. बता दें कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई के जरिये खाद्य महंगाई का पता चलता है.

    'कोरोना वायरस की दूसरी लहर का महंगाई पर पड़ेगा असर'
    आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 के दौरान कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण सीपीआई आधारिक खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी हुई थी. वहीं, डब्‍ल्‍यूपीआई आधारित खाद्य महंगाई में गिरावट दर्ज की गई थी. इससे आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों का अंदाजा लगाया जा सकता है. रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कोरोना की दूसरी लहर का हवाला देते हुए कहा कि इसका महंगाई पर असर पड़ेगा. महामारी के चलते बाजार में प्रतिस्पर्धा कम हुई है. मार्च 2021 से कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और सख्‍त पाबंदियों के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे महंगाई पर असर पड़ सकता है.

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    डब्‍ल्‍यूपीआई आधारित महंगाई दर FY21 में हुई थी कम
    रिपोर्ट में बताया गया है कि सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते वित्‍त वर्ष 2020-21 में महंगाई दर वित्‍त वर्ष 2019-20 के मुकाबले 1.4 फीसदी बढ़कर 6.2 फीसदी तक पहुंच गई था. अप्रैल-जुलाई 2020 में डब्‍ल्‍यूपीआई आधारित महंगाई शून्य के नीचे चली गई थी. वहीं, मई 2020 में 54 महीनों के निचले स्तर -3.4 फीसदी पर पहुंच गई थी. वैश्विक स्तर पर नॉन-फूड प्राइमरी ऑर्टिकल्स के भाव में गिरावट और लॉकडाउन के चलते कीमतों में गिरावट के कारण मई 2020 में यह स्थिति बनी थी. डब्‍ल्‍यूपीआई आधारित महंगाई वित्‍त वर्ष 2020-21 में 1.3 फीसदी तक कम हुई थी, जबकि 2019-20 में यह 1.7 फीसदी थी.

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    RBI ने कहा, दूसरी लहर के कारण बदला ग्रोथ का अनुमान
    रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल कोरोना महामारी के चलते अर्थव्‍यवस्‍था पर बुरा असर पड़ा था. हालांकि, दूसरी लहर के बीच वैक्सीनेशन ड्राइव के चलते अर्थव्‍यवस्‍था में फैली निराशा दूर करने में मदद मिली है. आरबीआई के मुताबिक, दूसरी लहर के चलते वृद्धि दर के अनुमानों में बदलाव किया जा रहा है. आरबीआई के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2021-22 में वृद्धि दर 10.5 फीसदी रह सकती है. तिमाही आधार पर बात करें तो आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल-जून 2021 में 26.2 फीसदी, जुलाई-सितंबर 2021 में 8.3 फीसदी, अक्टूबर-दिसंबर 2021 में 5.4 फीसदी और जनवरी-मार्च 2022 में 6.2 फीसदी की दर से बढ़ेगी. साथ ही कहा कि वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास से ही कोरोना महामारी के खिलाफ बेहतर नतीजे पाए जा सकते हैं.