RBI पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा- अगले छह महीने में डूबे कर्ज़ में हो सकती है भारी बढ़ोतरी

RBI पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा- अगले छह महीने में डूबे कर्ज़ में हो सकती है भारी बढ़ोतरी
रघुराम राजन

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (RBI Former Governor Raghuram Rajan) ने कहा है कि अगले छह महीने में बैंकों के फंसे कर्ज या एनपीए में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस समस्या को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, उतना अच्छा होगा.

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  • Last Updated: July 15, 2020, 10:41 AM IST
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नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (RBI Former Governor Raghuram Rajan) ने कहा है कि अगले छह महीने में बैंकों के फंसे कर्ज यानी एनपीए (NPA- Non Performing Assets) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि समस्या को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, उतना अच्छा होगा. कोविड-19 (Coronavirus Pandemic) और उसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन से कंपनियों पर निगेटिव असर पड़ा है और उनमें से कई कर्ज की किस्त लौटाने में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं. आपको बता दें कि रघुराम राजन ने नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड एकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) द्वारा आयोजित इंडिया पॉलिसी फोरम 2020 के एक सत्र में कहा कि अगर हम वाकई में एनपीए के वास्तविक स्तर को पहचाने तो अगले छह महीने में एनपीए का स्तर काफी अप्रत्याशित होने जा रहा है.

राजन ने कहा कि जनधन खाते ने उस रूप से काम नहीं किया जैसा कि इसका प्रचार-प्रसार किया गया. हालांकि उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक सकारात्मक चीज कृषि क्षेत्र है जो वास्तव में अच्छा कर रहा है. राजन ने कहा, "निश्चित रूप से मोदी सरकार ने सुधारों को आगे बढ़ाया है. इन सुधारों की लंबे समय से बात हो रही थी, उसके सही तरीके से क्रियान्वयन होने से अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को लाभ होगा.

कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन का लाभ उठाए भारत: सुब्बाराव
भारतीय रिजर्व बैंक के एक और पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि मानसून अनुकूल रहने की संभावना के बीच सरकार को कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन का लाभ उठाकर वृद्धि को प्रोत्साहन देने की जरूरत है.
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आर्थिक शोध संस्थान एनसीएईआर द्वारा मंगलवार को आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए सुब्बाराव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था शहरी अर्थव्यवस्था की तुलना में कुछ बेहतर प्रदर्शन कर रही है. शहरी अर्थव्यवस्था अभी कोविड-19 संकट से जूझ रही है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का कुल आबादी में हिस्सा 65 प्रतिशत है, जबकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उसका योगदान 25 प्रतिशत है. विस्तारित मनरेगा खर्च की वजह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कुछ अधिक बेहतर साबित हुई है.

सुब्बाराव ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत खर्च तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा कृषि उपज की खरीद से किसानों के हाथ में पैसा आ गया है. इसके अलावा अनकूल मानसून से भी कृषि क्षेत्र की स्थिति बेहतर रहने की संभावना है.

पूर्व गवर्नर ने कहा कि इन सभी कमजोर परिदृश्य के बीच कुछ अच्छी चीज भी है. देखना यह हे कि हम कैसे इसका लाभ उठाकर अर्थव्यवस्था की वृद्धि को प्रोत्साहन देते है. कृषि क्षेत्र में सुधारों के तहत सरकार ने साठ साल से अधिक पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया है और अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दलहन, प्याज और आलू जैसे उत्पादों को इसके नियमन के दायरे से बाहर कर दिया है.
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